पराली और कृषि अपशिष्ट से बदलेगी किसानों की आर्थिक तस्वीर! बिलासपुर में सीबीजी उद्योगों को मिलेगा नियमित बायोमास, कलेक्टर ने किसानों को जागरूक करने के दिए निर्देश।

पराली और कृषि अपशिष्ट से बदलेगी किसानों की आर्थिक तस्वीर! बिलासपुर में सीबीजी उद्योगों को मिलेगा नियमित बायोमास, कलेक्टर ने किसानों को जागरूक करने के दिए निर्देश।

कृषि अपशिष्ट से किसानों को मिलेगी अतिरिक्त आय, सीबीजी उद्योगों के लिए बनेगी नियमित आपूर्ति व्यवस्था

कलेक्टर ने सीबीजी मॉनिटरिंग समिति की बैठक में किसानों को जागरूक करने और विभागीय समन्वय बढ़ाने के दिए निर्देश

बिलासपुर  : जिले में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उद्योगों के लिए कृषि अपशिष्ट और अन्य बायोमास की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में कलेक्टर संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में मंथन सभाकक्ष में सीबीजी मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि अपशिष्ट, धान की पराली, नगरीय ठोस अपशिष्ट, गोबर एवं अन्य बायोमास की आपूर्ति की रणनीति पर विचार किया गया। नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल सहित बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधि, बायो ऊर्जा उद्यमी और संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

कलेक्टर ने कहा कि सीबीजी उद्योग किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकते हैं। खेतों में अनुपयोगी रह जाने वाले कृषि अवशेषों का इन उद्योगों में उपयोग होने से किसानों को उनका मूल्य मिलेगा। उन्होंने कृषि विभाग के सहयोग से किसानों को इसके आर्थिक लाभ और आपूर्ति प्रक्रिया की जानकारी देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि किसानों की सक्रिय भागीदारी से ही उद्योगों को बायोमास की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

बैठक में बताया गया कि तखतपुर में रिलायंस बायो एनर्जी लिमिटेड द्वारा संचालित कृषि अपशिष्ट आधारित सीबीजी उद्योग की क्षमता 22.5 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। वहीं सेंदरी में बीपीसीएल का प्रस्तावित संयंत्र अप्रैल-मई में शुरू होना संभावित है। यह संयंत्र नगरीय निकायों से प्राप्त गीले कचरे पर आधारित होगा, जिसमें प्रतिदिन लगभग 10 टन गीले कचरे का उपयोग प्रस्तावित है। दोनों उद्योगों की जरूरत के अनुरूप बायोमास संग्रहण क्षेत्र चिह्नित करने और आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने पर चर्चा की गई।

बैठक में किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), बायोमास संग्रहकर्ताओं एवं आपूर्तिकर्ताओं तथा सीबीजी उद्यमियों के बीच समन्वय और आपूर्ति संबंधी अनुबंध के प्रारूप पर भी विचार किया गया। इसके साथ ही संयंत्रों से उत्पादित जैविक खाद के उपयोग एवं विपणन, उद्योग विभाग से आवश्यक अनुमतियों और अंतरविभागीय समन्वय के विषयों पर चर्चा हुई।

कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कहा कि परंपरागत ईंधन के साथ वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की जरूरत है। बायोफ्यूल इसका अच्छा विकल्प है। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से सीबीजी उद्योगों के संचालन और बायोमास की उपलब्धता के लिए कार्य करने के निर्देश दिए।

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