नये कानून के तहत् विवाह का झूठा झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले आरोपी मनोज कुमार पाण्डेय को मिला 07 वर्ष का सश्रम कारावास,
न्यायालय विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम् जशपुर श्री सत्येन्द्र कुमार साहू ने सुनाई सजा,
आरोपी मनोज कुमार पाण्डेय के विरूद्ध थाना कुनकुरी में अप.क्र. 169/2025 बी.एन.एस. की धारा 69 एवं धारा 3(2)(5) एस.सी/एसटी एक्ट दर्ज था,
आरोपी का नाम:- मनोज कुमार पाण्डेय उम्र 43 साल निवासी बाराकाल जिला सतना (म.प्र.)
जशपुर : जिला जशपुर के थाना कुनकुरी में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 169/2025 में विशेष न्यायालय (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम), जशपुर द्वारा आरोपी मनोज कुमार पाण्डेय (उम्र 44 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए 07 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड से दंडित किया गया।
घटना का विवरण
पीड़िता द्वारा थाना कुनकुरी में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर बताया गया कि वर्ष 2024 में उसकी पहचान अभियुक्त मनोज कुमार पाण्डेय से हुई। दोनों एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। परिचय बढ़ने पर अभियुक्त ने स्वयं को अविवाहित बताते हुए पीड़िता से प्रेम संबंध स्थापित किए तथा उससे विवाह करने का झूठा आश्वासन दिया। अभियुक्त के झूठे वादों एवं विश्वास में आकर पीड़िता उसके साथ रहने लगी।
अभियुक्त मनोज कुमार पाण्डेय ने दिनांक 07.03.2024 से 08.05.2025 के मध्य कुनकुरी एवं राजनांदगांव में विभिन्न स्थानों पर विवाह करने का झूठा विश्वास दिलाकर पीड़िता के साथ कई बार शारीरिक संबंध स्थापित किए। इस दौरान अभियुक्त ने पीड़िता को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का भरोसा दिया, उसके साथ पति-पत्नी की तरह रहा तथा पीड़िता से जन्मे बच्चे को भी अपना नाम दिया। साथ ही पीड़िता एवं उसके बच्चे के पालन-पोषण का आश्वासन भी देता रहा।
कुछ समय बाद पीड़िता को जानकारी मिली कि अभियुक्त पहले से विवाहित है तथा उसके बच्चे भी हैं। इसके बावजूद वह लगातार विवाह का झूठा भरोसा देकर पीड़िता का शारीरिक एवं मानसिक शोषण करता रहा। जब पीड़िता ने विवाह करने एवं साथ रखने की बात कही तो अभियुक्त ने स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया। इसके पश्चात पीड़िता ने थाना कुनकुरी में शिकायत दर्ज कराई।
उक्त शिकायत के आधार पर थाना कुनकुरी में अपराध क्रमांक 169/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 69 एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(अ) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान पीड़िता, गवाहों एवं संबंधित व्यक्तियों के कथन दर्ज किए गए तथा दस्तावेजी, वैज्ञानिक एवं अन्य आवश्यक साक्ष्य संकलित कर अभियोग पत्र विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय का निर्णय
प्रकरण की सुनवाई उपरांत विशेष न्यायाधीश श्री सतेंद्र कुमार साहू, विशेष न्यायालय (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम), जशपुर द्वारा दिनांक 23 जुलाई 2026 को निर्णय पारित किया गया। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों तथा प्रभावी न्यायालयीन पैरवी के आधार पर अभियुक्त मनोज कुमार पाण्डेय को दोषी ठहराया।
न्यायालय द्वारा अभियुक्त को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 69 के अंतर्गत 07 वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹1,000 /- अर्थदण्ड तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(अ) के अंतर्गत 03 माह के सश्रम कारावास से दंडित किया गया।
विवेचना एवं न्यायालयीन पैरवी
प्रकरण की विवेचना उप पुलिस अधीक्षक श्री भावेश समरथ के द्वारा गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ करते हुए सभी आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए तथा समय-सीमा में अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रभावी न्यायालयीन पैरवी किए जाने के फलस्वरूप अभियुक्त को दोषसिद्धि एवं कठोर दण्ड प्राप्त हुआ। जिला अभियोजन अधिकारी सुरेष कुमार साहू, एडीपीओ श्री विपिन शर्मा द्वारा प्रकरण का गहन अध्ययन किया गया, प्रकरण में विषेष लोक अभियोजक श्री अजीत रजक द्वारा प्रभावी पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को कठोर दंड दिलाया जा सका।

