सामुदायिक भवन बना कानूनी संग्राम का केंद्र : बजट जारी, काम शुरू… फिर अदालत की एंट्री से ठप पड़ा निर्माण—खसरा 99/2 पर स्वामित्व विवाद ने बढ़ाई कुनकुरी की सियासत और तनाव

सामुदायिक भवन बना कानूनी संग्राम का केंद्र : बजट जारी, काम शुरू… फिर अदालत की एंट्री से ठप पड़ा निर्माण—खसरा 99/2 पर स्वामित्व विवाद ने बढ़ाई कुनकुरी की सियासत और तनाव

कुनकुरी : विकास कार्यों और भूमि विवाद के टकराव का एक ताज़ा मामला कुनकुरी में सामने आया है, जहां सेन समाज सामुदायिक भवन के विस्तार को लेकर शुरू हुआ निर्माण अब कानूनी उलझनों में फंस गया है। प्रशासन की ओर से विधिवत स्वीकृति और बजट जारी होने के बावजूद तहसील न्यायालय के हस्तक्षेप ने इस पूरे प्रोजेक्ट को फिलहाल रोक दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर चर्चा और असमंजस दोनों की स्थिति बनी हुई है।

जिले के कुनकुरी क्षेत्र में सेन समाज सामुदायिक भवन के विस्तार कार्य को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक दायरे से निकलकर तहसील न्यायालय तक पहुंच चुका है। तहसीलदार न्यायालय कुनकुरी ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए विवादित स्थल पर जारी निर्माण कार्य पर यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बजरंग नगर कुनकुरी निवासी राजेश साव सहित अन्य आवेदकों ने न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर यह आरोप लगाया है कि जिस भूमि पर सामुदायिक भवन का बाउंड्रीवाल निर्माण किया जा रहा है, वह खसरा नंबर 99/2 की शासकीय अथवा वन भूमि है। आवेदकों का कहना है कि इस भूमि का उपयोग पूर्व में सार्वजनिक सुविधाओं जैसे प्राथमिक विद्यालय और शौचालय के रूप में किया जाता रहा है, जिसे हटाकर अब नया निर्माण कार्य किया जा रहा है।

आवेदकों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति के पुराने निर्माण को हटाकर नया भवन तैयार किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार ने सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि पटवारी का प्रतिवेदन प्राप्त होने तक निर्माण कार्य को यथास्थिति में रखा जाए। इसका अर्थ है कि न तो निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा और न ही वर्तमान स्थिति में किसी प्रकार का परिवर्तन किया जाएगा।

गौरतलब है कि इसी कार्य के लिए जनपद पंचायत कुनकुरी द्वारा 4 फरवरी 2026 को “उन्नति” योजना के अंतर्गत लगभग 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। कार्य आदेश में ग्राम पंचायत रेमते को कार्य एजेंसी नियुक्त करते हुए निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही गुणवत्ता, समय-सीमा, मासिक प्रगति रिपोर्ट, निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगाने और निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य पूर्ण करने जैसी शर्तें भी स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई थीं, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर परियोजना को विधिवत प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा रहा था।

वहीं तकनीकी प्रतिवेदन में इस निर्माण कार्य का विस्तृत विवरण भी दिया गया है। इसमें भवन के समीप शौचालय निर्माण, पेयजल व्यवस्था, ईंट-सीमेंट का कार्य, प्लास्टर, लोहे के दरवाजे, पुताई सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं को शामिल किया गया है। दस्तावेज में निर्माण की गुणवत्ता, सामग्री और मापदंड तक तय किए गए हैं, जो इस बात को दर्शाते हैं कि योजना को तकनीकी रूप से भी पूरी तैयारी के साथ लागू किया जा रहा था।

लेकिन दूसरी ओर भूमि के स्वामित्व और उपयोग को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को विवादित बना दिया है। तहसील न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद निर्माण कार्य पर लगी रोक ने इस परियोजना को फिलहाल अधर में लटका दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 24 में सभी पक्षों को अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास कार्यों के क्रियान्वयन से पहले भूमि संबंधी विवादों का पूर्ण निराकरण कितना आवश्यक है। फिलहाल कुनकुरी में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा या फिर कानूनी अड़चनों के चलते इस पर स्थायी विराम लग सकता है।

इस प्रकरण में अन्य अपडेट प्राप्त होने के बाद अगले अंक में विस्तार से मिलेगी जानकारी..

Breaking Jashpur