जसवंत क्लॉडियस का दूरदर्शी विश्लेषण: जम्मू चिंतन बैठक से निकला नया खेल मंत्र—इन्फ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शिता और प्रतिभा संवर्धन से भारत को ओलंपिक महाशक्ति बनाने की दिशा तय

जसवंत क्लॉडियस का दूरदर्शी विश्लेषण: जम्मू चिंतन बैठक से निकला नया खेल मंत्र—इन्फ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शिता और प्रतिभा संवर्धन से भारत को ओलंपिक महाशक्ति बनाने की दिशा तय

2047 तक विश्व में पहले पांच पर लाने की कवायद शुरू

जम्मू में 24 से 26 अप्रैल 2026 तक भारत के समस्त राज्यों के खेलमंत्रियों की बैठक

आलेख… जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर.

रायपुर : इन दिनों जम्मू में हमारे देश के खेल मंत्रियों और प्रत्येक राज्य के संबंधित खेल प्रशासकों की बैठक का आयोजन केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के मार्गदर्शन व अगुवाई में की गई है। करीब 147 करोड़ की आबादी वाला भारत देश चाहे विज्ञान हो, संचार हो, आवागमन के साधन हो, खाद्यान्न उत्पादन हो, व्यापार व्यवसाय हो, शिक्षा का या स्वास्थ्य का सभी क्षेत्रों में 1947 में स्वतंत्र होने के बाद बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल की है लेकिन खेलकूद के क्षेत्र में हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन विशेषकर ओलंपिक जैसे बहुविध खेलों वाली स्पर्धा में सोचनीय रहा है।

इस सच्चाई को 2014 में सत्ता में आते ही हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काफी गंभीरता से लिया है और खेलों की दुनिया में भी भारत को विश्वमंच पर स्थापित करने का प्रयास शुरू हो गया है। 2016-17 से आरंभ खेलो इंडिया कार्यक्रम के विभिन्न आयोजन ने भारत के गांव- गांव तक खेलकूद की महत्ता को फिर से पहुंचा दिया है। जमीन से जुड़ी अनजान खेल प्रतिभाओं का अनेकों प्रतियोगिताओं से चयन किया जा रहा है। उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस प्रकार भारत में खेल प्रतिभाओं को तलाशने की जिम्मेदार पहल 2014 से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है।

2022 में राष्ट्रीय खेलों को गोवा से गुजरात स्थानांतरण के साथ ही यह तय हो गया था कि प्रधानमंत्री अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से असंतुष्ट है। भारत में खेलकूद को उचित प्राथमिकता देने के लिए 2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों को भारत में आयोजित करवाना चाहते हैं। प्रश्न यह था कि यह कैसे संभव होगा? खेलो इंडिया कार्यक्रम की महत्ता अपनी जगह है लेकिन उस आधार पर जो खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं उनका परीक्षण किस तरह हो। अत: भारत के राष्ट्रीय खेलों का प्रत्येक दो वर्षों याने 2027 में मेघालय,2029 में छत्तीसगढ़, फिर 2031, 2033,2035 तक नियमित रूप से आयोजित किए जाने का सैद्धांतिक निर्णय ले लिया गया है।

अब 2030 में राष्ट्रमंडल खेल,2036में ओलिंपिक, 2038 के एशियाई खेलों की मेजबानी के लिए भारतीय ओलंपिक संघ ने अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक परिषद के समक्ष अपना दावा ठोक दिया है। इस तरह आने वाले 12 वर्षों में भारत में खेलकूद का जो माहौल बनेगा उससे अधोसरंचना निर्माण, प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्याधुनिक होगा और 2047 में विकसित भारत की परिकल्पना के फलस्वरूप भारत को संसार के पहले पांच देशों में जगह पाना आसान होगा। इन सब विषयों के साथ प्रतिबंधित दवा के सेवन, खेल चिकित्सा, ओपन , इनडोर जिम की महत्ता पर भी विचार विमर्श इन दिनों जम्मू में खेल के कर्णधार कर रहे हैं .ऐसे समय के लिए भारत के अनेक प्रसिद्ध खिलाड़ियों, खेल पत्रकारों आदि की मदद ली गई होगी। इसमें सुझाव के तौर पर जरूरी है एक.. सबसे पहले ओलंपिक फिर युवा ओलंपिक (15 से 18 वर्ष के युवाओं के लिए) एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल में भाग लेने लिए

योग्यता के मापदंड को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। दो.. भारत के खिलाड़ियों ने अब तक 28 ओलंपिक कोर गेम्स में से ताज्जुब की बात है कि व्हालीबाल, हैंडबाल, ट्राईथलान, केनोइंग, मार्डन पेंटाथलन, रग्बी 07, ताइक्वांडो के लिए पिछले 126 वर्षों में कभी भी योग्यता हासिल नहीं कर सके हैं। अत: उसके लिए कोशिश जल्द से जल्द की जाए। तीसरा.. भारतीय प्रतिभागियों ने अब तक सिर्फ आठ खेलों हाकी एथलेटिक्स,निशानेबाजी, कुश्ती, मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, बैडमिंटन, टेनिस में ही पदक जीता है। अत: स्पष्ट है कि अन्य भाग ले चुके 13 खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने कोई पदक नहीं जीता है। जिसमें खिलाड़ी तैयार करने की योजना बनाई जाय। चौथा.. प्रत्येक ग्राम पंचायत में चार से छह एकड़, विकासखंड- तहसील में छ: से आठ एकड़ जिला में दस से बारह एकड़ भूमि खेल मैदान के लिए आरक्षित किया जाए और राम- रामजी कार्यक्रम के अंतर्गत उन मैदानों में बाउंड्रीवाल बनवाई जाए।

प्रत्येक संभाग में बारह से 15 एकड़ भूमि आरक्षित की जाए। पांचवा.. प्रत्येक तहसील/ जिला मुख्यालय में ओपन जिम की स्थापना की जाए। छठा.. सभी जिला मुख्यालय में एक बहु खेल सुविधायुक्त इंडोर स्टेडियम की स्थापना की जाए जिसमें खेल क्षेत्र /फ्लोर कम से कम 60 फुट चौड़ा और 110 फुट लंबा होना चाहिए। ऐसा होने से उसमें ओलंपिक के करीब 15, नॉन ओलंपिक के, भारत के पुरातन खेल 09 खेल आसानी से खेले जा सकेंगे। इस तरह के ठोस निर्णय का भी ध्यान रखा जाना भारत के खेल हित में होगा। इस तरह की बैठक के लिए आम जनता से भी सलाह लेना अच्छी परंपरा की शुरुआत मानी जाएगी .एक अंतिम बात .. मीडिया के उन साथियों को भी सम्मानित किया जाना चाहिए़ जिन्होंने किसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को गांव, जंगल ,गली, मुहल्ले से याने सबसे पहली बार खोजकर समाज, देश के सामने लाया हो.ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करने से मीडिया जगत के खोजी पत्रकार गौरवान्वित होंगे साथ ही देश के लिए खेलरत्न चुनने मेआदघर भी होंगे।

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