दोषमुक्ति के कारणों की समीक्षा कर दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने पर आईजी सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा का जोर, 791 प्रकरणों की हुई संभाग स्तरीय समीक्षा
बलात्कार एवं पॉक्सो के मामलों में पीड़िता के न्यायालयीन कथन को साक्ष्य के रूप में प्रदर्शित कराने और पक्षद्रोही होने पर वैधानिक कार्रवाई के निर्देश
एक वर्ष से अधिक समय से लंबित अपराधों के निराकरण, एनडीपीएस मामलों में अनिवार्य प्रावधानों के पालन तथा साइबर अपराधों की समीक्षा पर भी दिया गया विशेष जोर
बैठक के दूसरे चरण में रेंज के सभी जिलों के एसपी के साथ समीक्षा बैठक
आईजी दीपक कुमार झा ने लंबित मामलों के त्वरित निराकरण और अपराध नियंत्रण की कार्ययोजना पर दिए निर्देश
अम्बिकापुर : सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार झा (भा.पु.से.) के नेतृत्व में 23 अक्टूबर 2026 को जिला कोरिया में संभाग स्तरीय दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जुलाई एवं अगस्त माह के दौरान सेशन न्यायालय के 221 तथा लोअर न्यायालय के 570, इस प्रकार कुल 791 दोषमुक्ति प्रकरणों की जिलेवार विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान प्रकरणों में आरोपियों के दोषमुक्त होने के कारणों का विश्लेषण करते हुए विवेचना की गुणवत्ता, साक्ष्य संकलन, अभियोजन की प्रभावशीलता तथा न्यायालयीन कार्यवाही में सामने आने वाली कमियों को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया। आईजी झा ने निर्देशित किया कि प्रत्येक जिले में नियमित रूप से दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा की जाए तथा प्रत्येक मामले में दोषमुक्ति के वास्तविक कारणों की पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि न्यायालयों में दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाया जा सके।
बैठक में निर्देश दिए गए कि ई-प्रॉसिक्यूशन के माध्यम से जिला अभियोजन अधिकारी को अभियोग पत्र पर्याप्त समय पूर्व उपलब्ध कराया जाए, जिससे अभियोजन पक्ष द्वारा प्रकरणों में पाई जाने वाली कमियों एवं त्रुटियों को समय रहते दूर किया जा सके और न्यायालयीन विचारण के दौरान आरोपियों को तकनीकी कमियों का लाभ न मिले। बलात्कार एवं पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों में दोषसिद्धि की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देशित किया गया कि पीड़िता के धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत दर्ज कथन, जिसका समकक्ष प्रावधान धारा 183 बीएनएसएस में है, को विचारण के दौरान विधि के अनुरूप साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कराने की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यदि विचारण के दौरान पीड़िता पूर्व कथन से विपरीत या पक्षद्रोही बयान देती है, तो प्रकरण के तथ्यों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए। इसी प्रकार, विवेचना में यदि किसी शिकायत या प्रथम सूचना रिपोर्ट के झूठे अथवा मिथ्या पाए जाने के तथ्य सामने आते हैं, तो साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में खात्मा/खारिजी की स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया विधिसम्मत तरीके से पूरी कर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध लागू कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सात वर्ष से अधिक अवधि के कारावास से दंडनीय अपराधों में घटनास्थल पर उपलब्ध भौतिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन पर भी विशेष जोर दिया गया। ऐसे मामलों में एफएसएल अधिकारियों की उपस्थिति में घटनास्थल का निरीक्षण कराकर आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षण एवं रिपोर्ट प्राप्त करने तथा उसे न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ मामलों में विवेचना के दौरान अधिनियम के अनिवार्य प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है। इस पर आईजी श्री झा ने विवेचकों को एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों की जानकारी एवं अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर इकाई स्तर पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में विवेचना अधिक प्रभावी और त्रुटिरहित हो सके।
बैठक के दूसरे चरण में पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार झा ने सरगुजा रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण एवं पुलिस कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान एक वर्ष से अधिक समय से लंबित अपराधों के निराकरण, लंबित खात्मा प्रकरणों में न्यायालय से स्वीकृति की स्थिति तथा एमआरएम, जीआरएम, एनसीआरपी एवं साइ-ट्रेन पोर्टल पर लंबित प्रकरणों की जिलेवार समीक्षा की गई। मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के अंतर्गत तैयार की जाने वाली कार्ययोजना, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों एवं आगामी कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही नेटग्रिड, ई-समंस एवं ई-साक्ष्य के उपयोग और लंबित कार्यों की प्रगति, प्रशिक्षु उप निरीक्षकों के प्रशिक्षण की स्थिति तथा विभिन्न पुलिस कार्यालयों में लंबित शिकायतों के निराकरण की समीक्षा की गई। पुलिसकर्मियों के कल्याण से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन एवं उनके प्रभावी संचालन पर भी चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। आईजी श्री झा ने सभी जिलों को लंबित मामलों के समयबद्ध निराकरण, तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग, गुणवत्तापूर्ण विवेचना और पुलिस कार्यप्रणाली में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक में उप पुलिस महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल, जशपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, कोरिया के पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर, बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर, एमसीबी की पुलिस अधीक्षक श्रीमती रत्ना सिंह सहित सरगुजा रेंज के संबंधित अधिकारी एवं लोक अभियोजन अधिकारी उपस्थित रहे।

