शिक्षा जगत में हड़कंप: गंभीर आपराधिक मामलों में फंसे सहायक कार्यक्रम समन्वयक राजेश कुमार अम्बस्थ, सलाखों के पीछे!
जशपुर : छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आई है। जिला जशपुर में समग्र शिक्षा के अंतर्गत सहायक कार्यक्रम समन्वयक के रूप में पदस्थ और मूल रूप से प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत श्री राजेश कुमार अम्बस्थ को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के बाद जेल की हवा खानी पड़ी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक और शैक्षणिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, सूरजपुर जिले के थाना प्रतापपुर के अंतर्गत चौकी खड़गवा में दिनांक 18.09.2026 को श्री अम्बस्थ के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई थी। मामला बेहद गंभीर धाराओं से जुड़ा हुआ है:
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा: 309 (6)
- आर्म्स एक्ट की धारा: 25, 27, और 30
इन संगीन धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किए जाने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दिनांक 19.09.2026 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
घोर लापरवाही और कदाचरण का आरोप
एक शिक्षक और जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर आसीन अधिकारी द्वारा इस तरह के आपराधिक कृत्यों में संलिप्त होना शिक्षा जगत की गरिमा पर एक बड़ा आघात है। जिला कलेक्टर, जशपुर द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि श्री अम्बस्थ का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 03 के सर्वथा विपरीत है, जो स्पष्ट रूप से गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है। उन्होंने अपने पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता बरती है।
निलंबन की तलवार और बड़ी कार्रवाई तय
नियमों के अनुसार, किसी भी शासकीय सेवक द्वारा 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत या जेल में निरुद्ध रहने पर निलंबन की अनिवार्य कार्रवाई की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत, कलेक्टर जशपुर ने संयुक्त संचालक, संभागीय लोक शिक्षण, सरगुजा संभाग (अम्बिकापुर) को तत्काल निलंबन की अनुशंसा सहित आधिकारिक प्रतिवेदन प्रेषित कर दिया है।
इस मामले की गंतव्य सूचना शासन के उच्च स्तर पर—सचिव (स्कूल शिक्षा विभाग), संचालक (लोक शिक्षण संचालनालय), और प्रबंध संचालक (समग्र शिक्षा, रायपुर) सहित कई अन्य प्रमुख अधिकारियों को भेज दी गई है। अब देखना यह है कि विभाग इस गंभीर प्रकरण में कितनी त्वरित और कड़ी कार्रवाई अमल में लाता है, लेकिन इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


