भारतीय रेल उपकेंद्रों के उपयोग से निर्धारित स्थल से माल उठाकर बीच में पैकेजिंग जैसी सुविधाओं के साथ अंतिम गंतव्य तक माल पहुंचाने के प्रचालन तंत्र को सुदृढ़ बना रही है
दक्षिण मध्य रेलवे ने हैदराबाद, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, गुंटूर, राजमुंद्री, बेंगलुरु और चेन्नई सहित 7 शहरों के 17 स्टेशनों पर पायलट आधार पर ‘रेल पार्सल’ ऐप-आधारित प्रचालन प्लेटफॉर्म आरंभ किया है
संयुक्त पार्सल उत्पाद – तीव्र कार्गो सेवा 7 निर्धारित सेवाओं के साथ परिचालन में है, जिससे मौजूदा वित्त वर्ष में फरवरी तक लगभग 56 करोड़ रुपए राजस्व अर्जित हुआ है
पिछले 3 वर्षों में देश में माल और पार्सल टर्मिनलों पर ग्राहक सुविधाओं और बुनियादी अवसंरचना में सुधार के लिए 14,500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं
कॉनकोर दिल्ली-कोलकाता और मुंबई-कोलकाता गलियारे पर डोर-टू-डोर पार्सल सेवाएं प्रदान कर रहा है, जिससे निर्धारित स्थल से अंतिम गंतव्य तक सामान भेजने के प्रचालन तंत्र को मजबूती मिल रही है
रायपुर/बिलासपुर : केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में प्रश्न के उत्तर में जानकारी दी कि भारतीय रेल ने माल ढुलाई प्रचालन क्षमता और क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने के लिए, ढुलाई दक्षता बढ़ाने, निर्बाध क्षेत्रीय संपर्क सुनिश्चित करने और निर्धारित स्थल से अंतिम गंतव्य तक माल पहुंचाने की कुशल सुविधा के लिए बहुआयामी रणनीति लागू की है।
भारतीय रेल ने टर्मिनलों पर रेल माल ढुलाई क्षमता में सुधार के लिए, गति शक्ति मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनल नीति के तहत आधुनिक रेल माल टर्मिनलों के विकास को प्रोत्साहित करने और रेलवे माल गोदामों में बुनियादी ढांचे मजबूत/उन्नत बनाने की दोहरी रणनीति अपनाई है। 05.03.2026 तक, भारतीय रेल में 128 गति शक्ति मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनल क्रियाशील हो गए हैं और ऐसे 288 कार्गो टर्मिनल के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। इसके अतिरिक्त, देश भर के माल और पार्सल टर्मिनलों पर ग्राहकों की सुविधाओं में सुधार के लिए, वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए 14,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
रेल मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड- कॉनकोर, दिल्ली-कोलकाता और मुंबई-कोलकाता मार्गों पर संयुक्त पार्सल उत्पाद – तीव्र कार्गो सेवा- जेपीपी-आरसीएस का उपयोग कर घर तक पार्सल सेवाएं प्रदान कर रहा है। कॉनकोर पायलट परियोजना के तहत सोनिक गुड्स शेड में डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स सेवाएं भी मुहैया करा रहा है।
भारतीय डाक के साथ संयुक्त पार्सल उत्पाद पहल को वर्ष 2022 में कुछ मार्गों पर पायलट आधार पर आरंभ किया गया था। इसका उद्देश्य ई-कॉमर्स और सुक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम बाजार पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए बिजनेस-टू-कस्टमर (बी2सी) और बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) बाजारों को लक्षित करना था, जिसमें 35 किलोग्राम से 100 किलोग्राम तक के भार वर्ग के लिए बाजार के रुझानों के अनुसार किफायती मूल्य उपलब्ध कराया गया। इस योजना के तहत भारतीय डाक ने निर्धारित से अंतिम गंतव्य तक पार्सल सेवा प्रदान कीं, जबकि भारतीय रेल ने उपकेंद्रों तक इन्हें पहुंचाने की सेवाएं दीं।
पायलट परियोजना के अनुभव के आधार पर, संयुक्त पार्सल योजना अन्य पार्सल सेवा प्रदाताओं के लिए भी उपलब्ध कराई गई और इसका नाम बदलकर जॉइंट पार्सल प्रोडक्ट – रैपिड कार्गो सर्विस कर दिया गया। इस योजना के तहत, पंजीकृत पार्सल प्रदाता भारतीय रेल द्वारा विकसित “वर्चुअल एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म” के माध्यम से जेपीपी-आरसीएस की ऑनलाइन बुकिंग करते हैं। अभी बाजार की मांग और परिचालन व्यवहार्यता के आधार पर निर्धारित विशिष्ट स्थानों के बीच (समय सारणीबद्ध) 7 जोड़ी निर्धारित सेवाएं संचालित हो रही हैं। मौजूदा वर्ष फरवरी 2026 तक जेपीपी-आरसीएस से लगभग 56 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ है।
दक्षिण मध्य रेलवे ने 25.02.2026 को एक वर्ष की अवधि के लिए रेलवे पार्सल प्रचालन के लिए व्यापक “ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म” विकसित करने हेतु पायलट परियोजना आरंभ की। इसके तहत, प्रचालन सेवा प्रदाताओं के सहयोग से डोर-टू-डोर पार्सल सेवा प्रदान की जा रही है। एकीकृत पार्सल लॉजिस्टिक्स ऐप, “रेल पार्सल”, को डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें चयनित लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं को भागीदार के रूप में शामिल किया गया है। ये प्रचालन भागीदार निर्धारित स्थल से माल उठाने, गंतव्य तक इसे पहुंचाने और पैकेजिंग जैसी सेवाओं सहित अन्य सेवाएं प्रदान करते हैं, जबकि भारतीय रेल, रेल सेवाओं द्वारा मिड-माइल परिवहन (उपकेंद्रों तक माल पहुंचाने की सुविधा) प्रदान करती है।
यह परियोजना हैदराबाद, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, गुंटूर, राजमुंद्री, बेंगलुरु और चेन्नई सहित सात शहरों में सत्रह स्टेशनों पर कार्यान्वित की जा रही है। रुचि की अभिव्यक्ति प्रक्रिया के माध्यम से तीन निजी प्रचालन भागीदारों को भी इसमें शामिल किया गया है।
सभी रेलवे मंडलों (डिवीजनों) में संचालित व्यवसाय विकास इकाइयों को विभिन्न हितधारकों के साथ जुड़कर यातायात के आकलन के साथ ही प्रथम और अंतिम गंतव्य तक पार्सल सेवा पहुंचाने के लिए प्रचालन सेवा प्रदाताओं की उपलब्धता और तत्परता के आकलन करने को कहा गया है।
इस ऐप को पूरे देश में संचालित करने का निर्णय परियोजना से प्राप्त अनुभव के आधार पर लिया जाएगा।

