कुनकुरी (जशपुर), 28 फरवरी 2026। सागर जोशी – संपादक
रक्त संबंधों की पवित्रता को कलंकित कर देने वाली एक हृदयविदारक घटना में जशपुर जिले की कुनकुरी सत्र अदालत ने एक व्यक्ति को अपने ही बड़े भाई की निर्मम हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पारिवारिक विवाद की आग में भड़की हिंसा ने एक घर को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। लगभग दस महीनों तक चले विचारण, वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहियों के सूक्ष्म परीक्षण के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, कुनकुरी बलराम कुमार देवांगन ने आरोपी वैद/बैध कुमार को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दोषसिद्ध ठहराते हुए आजीवन कारावास का दंड सुनाया।
यह मामला थाना तुमला क्षेत्र के ग्राम कुल्हारबुड़ा मोहानटोली का है। 23 अप्रैल 2025 की शाम लगभग 7 से 8 बजे के बीच आरोपी का अपनी पत्नी से विवाद चल रहा था। घर के भीतर हो रहा झगड़ा जब बढ़ने लगा तो बड़े भाई अभिमन्यु ने हस्तक्षेप कर छोटे भाई को पत्नी से मारपीट करने से रोका। किंतु यही हस्तक्षेप उसके जीवन का अंतिम क्षण सिद्ध हुआ। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने क्रोध में आकर डंडे से अपने बड़े भाई के सिर, कान, माथे और आंख के पास लगातार वार किए। गंभीर चोटों से लहूलुहान अभिमन्यु की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई।
घटना कैसे बनी खून की कहानी
घटना की सूचना अगले दिन 24 अप्रैल की सुबह मृतक के छोटे भाई लालधर राम द्वारा पुलिस चौकी कोल्हेनझरिया में दी गई। पुलिस ने तत्परता से मर्ग इंटीमेशन दर्ज कर जांच प्रारंभ की। घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी, डंडे के टुकड़े, आरोपी के खून लगे कपड़े और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुएं जब्त की गईं। पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्यवाही पूरी की गई, जिसमें स्पष्ट हुआ कि मृत्यु सिर पर गंभीर चोटों के कारण हुई है।
जांच के दौरान आरोपी के मेमोरण्डम कथन के आधार पर बरामद वस्तुओं को क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, अंबिकापुर भेजा गया। एफएसएल रिपोर्ट में खून के धब्बों की पुष्टि होने से अभियोजन का मामला और मजबूत हुआ। वैज्ञानिक साक्ष्य, परिस्थितिजन्य प्रमाण और गवाहों के बयान अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने घटना की कड़ी को स्पष्ट रूप से जोड़ दिया।
प्रकरण सत्र क्रमांक 31/2025 के रूप में विचाराधीन रहा। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक पुष्पा सिंह ने सशक्त और प्रभावी पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि यह अपराध न केवल जघन्य है बल्कि सामाजिक संरचना को भी आहत करने वाला है। उन्होंने कड़ी से कड़ी सजा की मांग की। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने इसे प्रथम अपराध बताते हुए आरोपी की उम्र और पारिवारिक परिस्थिति को आधार बनाकर नरमी की अपील की।
न्यायालय की टिप्पणी: “अक्षम्य और गंभीर अपराध”
सभी पक्षों को सुनने और साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि अभियुक्त द्वारा अपने ही भाई की हत्या किया जाना अत्यंत गंभीर और अक्षम्य अपराध है। हालांकि अदालत ने इसे “विरलतम से विरल” श्रेणी में नहीं माना, इसलिए मृत्युदंड के स्थान पर आजीवन कारावास को उपयुक्त दंड बताया।
अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास तथा ₹1000 के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। साथ ही मृतक के पिता विष्णु प्रसाद को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत प्रतिकर दिलाने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देशित किया गया।
इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पारिवारिक विवाद चाहे कितना भी निजी क्यों न हो, कानून के सामने उसका कोई औचित्य नहीं। एक क्षणिक क्रोध ने एक जीवन समाप्त कर दिया और एक परिवार को बिखेर दिया, लेकिन न्यायालय के इस कठोर निर्णय ने समाज को यह संदेश दिया है कि कानून अपने हाथ में लेने वालों के लिए दया की कोई गुंजाइश नहीं है।

