जशपुर : जशपुर में पत्रकारों के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत को लेकर मीडिया जगत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। सोशल मीडिया पर वायरल विवादित ऑडियो-वीडियो के आधार पर प्रकाशित समाचारों के बाद भाजपा नेता कृपा शंकर भगत द्वारा पत्रकारों के विरुद्ध सिटी कोतवाली में की गई शिकायत को प्रेस क्लब ने “झूठी, आधारहीन और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला” बताया है।
बुधवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस क्लब की आपात बैठक में पत्रकारों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि मीडिया का दायित्व तथ्यों का संकलन कर उन्हें जनता और शासन-प्रशासन के समक्ष रखना है। यदि किसी जनप्रतिनिधि या सार्वजनिक व्यक्ति से जुड़ा ऑडियो-वीडियो सोशल मीडिया में प्रसारित होता है और उसमें कथित रूप से आपत्तिजनक व हिंसक भाषा का प्रयोग होता है, तो उसे प्रकाशित करना पत्रकारिता का कर्तव्य है, अपराध नहीं।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि वायरल ऑडियो-वीडियो में गोली मारने जैसी आपराधिक धमकी और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है। साथ ही उरांव समाज को लेकर कथित टिप्पणियों तथा उसे “जशपुर की बोली” बताकर पूरे क्षेत्र की छवि धूमिल करने के प्रयास की भी पत्रकारों ने कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय या जिले की गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक के बाद पत्रकार एकजुट होकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह से मिले और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की। पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि तथ्यों को सामने लाने पर यदि मीडिया को दबाने या डराने की कोशिश की गई तो इसका लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।
प्रेस क्लब ने मांग की है कि वायरल ऑडियो-वीडियो की फोरेंसिक जांच कर सत्यता सार्वजनिक की जाए और यदि उसमें आपराधिक तत्व पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए। पत्रकारों ने दो टूक कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं होगा और सत्य को दबाने की हर कोशिश का डटकर प्रतिरोध किया जाएगा।

