जशपुर। जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी दो अलग-अलग आदेशों ने स्वास्थ्य विभाग में हलचल मचा दी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोलेनजोरिया, विकासखंड फरसाबहार में पदस्थ मेडिकल लैब टेक्नीशियन श्री संजय कुजूर पर लगे गंभीर आरोपों के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच समिति का गठन कर दिया है और संबंधित कर्मचारी से तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
समाचार प्रकाशन के बाद हरकत में आया विभाग
दिनांक 22 फरवरी 2026 को समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया में प्रकाशित खबरों में आरोप लगाया गया था कि संबंधित लैब टेक्नीशियन द्वारा नर्सों के साथ अभद्र व्यवहार, धमकी, रात्रिकालीन ड्यूटी में हस्तक्षेप तथा अस्पताल परिसर में अशोभनीय टिप्पणियां की जा रही थीं। आरोप यह भी है कि उनके व्यवहार से नर्सिंग स्टाफ में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था, जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही थी।
इन गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला जशपुर ने तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश जारी किए।
चार सदस्यीय जांच समिति गठित
जारी आदेश के अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच हेतु चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें—
- डॉ. किसनी कुजूर (अध्यक्ष)
- डॉ. जे.डी. तिर्की (सदस्य)
- श्रीमती ललिता पैंकरा (सदस्य)
- श्री भुवन सोनी, लेखापाल (सदस्य)
को शामिल किया गया है। समिति को निर्देशित किया गया है कि वह 07 दिवस के भीतर समस्त तथ्यों की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करे।
3 दिन में मांगा गया स्पष्ट जवाब
एक अन्य आदेश में संबंधित लैब टेक्नीशियन श्री संजय कुजूर को कारण बताओ नोटिस जारी कर 03 दिवस के भीतर स्वयं उपस्थित होकर स्पष्ट एवं लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की होगी।
प्रशासन सख्त, कर्मचारियों में संदेश
स्वास्थ्य विभाग की इस त्वरित कार्रवाई को प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता, अभद्रता या भय का वातावरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कर्मचारियों और आमजन की नजरें जांच रिपोर्ट पर
अब सभी की निगाहें गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित कर्मचारी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जिला स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कार्यस्थल की गरिमा और महिला कर्मियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।


