विद्युत लोको प्रशिक्षण केंद्र /उस्लापुर में दिनांक 04.11.26 को संरक्षा विभाग/ मुख्यालय द्वारा संरक्षा संगोष्ठी का आयोजन
संरक्षा मानकों के पालन और दुर्घटना-रोकथाम के उपायों पर दिया गया जोर
बिलासपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, संरक्षा विभाग (मुख्यालय) द्वारा संरक्षा सेमिनार आयोजित किया गया । संरक्षा सेमिनार में मुख्य संरक्षा अधिकारी, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, श्रीअनुप कुमार सतपथी मुख्य अतिथि संरक्षा सेमिनार के रूप में उपस्थित थे, विशिष्ट अतिथि ए.के.पाठक, मुख्य विद्युत इंजीनियर/परि/ बिलासपुर की गरिमामयि उपस्थिति रही। इसके साथ ही विभिन्न अधिकारी यथा श्रीमति शिवरंजनी पी. वर्मा, उप मुख्य संरक्षा अधिकारी/ सिग्नल एवं टेलिकॉम/ बिलासपुर, पी के शराफ़, उप मुख्य संरक्षा अधिकारी /विद्युत/ बिलासपुर, आर .के.देवांगन, उप मुख्य संरक्षा अधिकारी /मेकेनिकल/ बिलासपुर, बी.एन.पटेल, प्रिन्सिपल विद्युत लोको प्रशिक्षण संस्थान, उस्लापुर एवं आर के सोनी, सहायक मण्डल विद्युत अभियंता/बिलासपुर उपस्थित रहे तथा मण्डल एवं मुख्यालय के सेफ़्टी काउन्सलर,अनुदेशकगण, मुख्य लोको निरीक्षक लोको पायलट,सहायक लोको पायलट और प्रशिक्षण केंद्र के प्रशिक्षुगण उपस्थित रहे ।
इस अवसर पर अनुप कुमार सतपथी, प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी, बिलासपुर ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में रेलकर्मचारियों को सदैव सुरक्षित रहने तथा प्रत्येक कार्य में निर्धारित सुरक्षित कार्यप्रणाली का अनिवार्य रूप से पालन करने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने कहा कि कार्य के दौरान आने वाली किसी भी समस्या, बाधा अथवा संरक्षा संबंधी व्यवधान को उचित माध्यम से समय रहते उच्चस्तर तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि उसका समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने संरक्षा के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। ए.के. पाठक, मुख्य विद्युत इंजीनियर (परिचालन), बिलासपुर ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि सुरक्षित कार्यप्रणाली की शुरुआत प्रत्येक कर्मचारी को स्वयं
अपने कार्यस्थल एवं कार्यशैली से करनी होगी। पी.के. शराफ, उप मुख्य संरक्षा अधिकारी (विद्युत), बिलासपुर ने कर्मचारियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य तथा गुणवत्तापूर्ण विश्राम के महत्व को रेखांकित किया।
वहीं, श्रीमती शिवरंजनी पी. वर्मा, उप मुख्य संरक्षा अधिकारी (सिग्नल एवं टेलीकॉम), बिलासपुर ने रेल परिचालन में व्यावहारिक अनुभव एवं मानवीय दक्षता की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। आर.के. देवांगन, उप मुख्य संरक्षा अधिकारी (मैकेनिकल), बिलासपुर ने ट्रेन को स्टार्ट करने से पूर्व एवं स्टार्ट करते समय अपनाई जाने वाली आवश्यक सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी। बी.एन. पटेल, प्रिंसिपल, विद्युत लोको प्रशिक्षण संस्थान, उस्लापुर ने कहा कि संरक्षा संबंधी नियमों एवं प्रक्रियाओं का ज्ञान तभी सार्थक है, जब उन्हें कार्यस्थल पर पूरी निष्ठा के साथ व्यवहार में अपनाया जाए। उन्होंने कर्मचारियों को निर्धारित संरक्षा नियमों का नियमित एवं अनिवार्य रूप से पालन करने के लिए प्रेरित करते हुए सुरक्षित कार्यप्रणाली के लाभों से अवगत कराया।
इसी क्रम में आर.के. सोनी, सहायक मंडल विद्युत इंजीनियर (परिचालन), बिलासपुर ने “एसपीएडी” में सहायक लोको पायलट की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने लोको पायलट की सतर्कता, सिग्नल के प्रति सजगता एवं निर्धारित परिचालन नियमों के पालन के महत्व को समझाया। साथ ही, आर.एस. वाल्व सिमुलेटर के माध्यम से दिए जाने वाले व्यावहारिक प्रशिक्षण की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इस प्रकार का प्रशिक्षण कर्मचारियों की कार्यदक्षता बढ़ाने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं उचित प्रतिक्रिया विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संगोष्ठी में उपस्थित प्रतिभागियों ने सभी वक्ताओं के विचारों एवं मार्गदर्शन में गहरी रुचि दिखाई। प्रतिभागियों की ओर से इस आयोजन को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया गया। इस प्रकार की संरक्षा संगोष्ठियाँ रेल परिचालन से जुड़े कर्मचारियों के तकनीकी ज्ञान, व्यावहारिक अनुभव, मानसिक सजगता एवं संरक्षा के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
संगोष्ठी में बताया गया कि रेल संरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक रेलकर्मी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी, सतत सजगता, अनुभव, अनुशासन और सामूहिक प्रतिबद्धता का परिणाम है।


