बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए जशपुर में मजबूत हुई स्वास्थ्यकर्मियों की तैयारी, यूनिसेफ के सहयोग से तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में 400 से अधिक कर्मी प्रशिक्षित—बाल मधुमेह की पहचान, उपचार, फॉलोअप और समुदाय स्तर पर जागरूकता को मिलेगा नया संबल

बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए जशपुर में मजबूत हुई स्वास्थ्यकर्मियों की तैयारी, यूनिसेफ के सहयोग से तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में 400 से अधिक कर्मी प्रशिक्षित—बाल मधुमेह की पहचान, उपचार, फॉलोअप और समुदाय स्तर पर जागरूकता को मिलेगा नया संबल

“बाल मधुमेह और बच्चों का स्वस्थ भविष्य – जशपुर जिले में स्वास्थ्यकर्मियों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम”

जशपुर : बच्चों में बढ़ते मधुमेह, विशेषकर टाइप-1 डायबिटीज यानी बाल मधुमेह की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार, नियमित फॉलोअप तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग जशपुर एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय (एक सत्र) उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के चार विकासखंडों — बगीचा, कांसाबेल, पत्थलगांव, फरसाबहार — से कुल 400 से ज्यादा कर्मियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रशिक्षण को चरणबद्ध रूप से आयोजित किया गया, जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, मितानिन कार्यक्रम से जुड़े जिला समन्वयक, ब्लॉक समन्वयक एवं मितानिन प्रशिक्षक, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक महिला महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हुईं।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों एवं समुदाय स्तर पर कार्यरत प्रमुख स्वास्थ्यकर्मियों को टाइप-1 डायबिटीज के लक्षणों, शीघ्र पहचान, उपचार, परामर्श, फॉलोअप एवं समग्र देखभाल के संबंध में तकनीकी रूप से सशक्त बनाना था, ताकि बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों को समय पर उचित सहयोग, उपचार एवं सेवाओं से जोड़ा जा सके।

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल मधुमेह के प्रमुख लक्षणों जैसे अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, वजन घटना, थकान, भूख बढ़ना तथा बीमारी की स्थिति में समय पर रेफरल की आवश्यकता पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। ।

प्रतिभागियों को बताया गया कि टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों के लिए नियमित इंसुलिन उपयोग, रक्त शर्करा की निगरानी, संतुलित आहार, स्कूल एवं परिवार का सहयोग तथा आपातकालीन स्थितियों की समय पर पहचान अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला में निम्न प्रमुख विषयों पर विस्तृत उन्मुखीकरण किया गया: • टाइप-1 डायबिटीज की प्रारंभिक पहचान, उपचार एवं प्रबंधन • बच्चों में खतरे के संकेतों की पहचान एवं समय पर रेफरल • इंसुलिन, ग्लूकोमीटर एवं नियमित शुगर मॉनिटरिंग का महत्व • परामर्श, परिवार आधारित सहयोग एवं रोगी सहायता समूहों की भूमिका • स्कूल एवं समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की रणनीतियाँ • बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग की आवश्यकता

प्रतिभागियों ने समूह चर्चा, अनुभव साझा करने एवं संवाद आधारित सत्रों के माध्यम से विषय की व्यावहारिक समझ विकसित की। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बाल मधुमेह केवल एक चिकित्सीय स्थिति नहीं है, बल्कि इसके सफल प्रबंधन के लिए परिवार, स्कूल, स्वास्थ्यकर्मी और समुदाय की संयुक्त भूमिका आवश्यक है।

यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जशपुर डॉ. घनश्याम सिंह जात्रा, मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

कार्यक्रम को जिला एनसीडी सलाहकार डॉ. रूपा प्रधान द्वारा सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया। यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में एवं तकनीकी सहायता से आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।

जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताया गया कि इस प्रशिक्षण से जिले में बाल मधुमेह की समय पर पहचान, उपचार से जुड़ाव, नियमित फॉलोअप और सामुदायिक जागरूकता को मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से मितानिन कार्यक्रम, सीएचओ एवं महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भागीदारी से ग्राम स्तर तक बाल मधुमेह से संबंधित संदेश पहुंचाने तथा संभावित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

Jashpur