जशपुर में तसर रेशम उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार, एमआरएमए 2.0 के तहत तैयार होगी पाँच वर्षीय विकास कार्ययोजना

जशपुर में तसर रेशम उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार, एमआरएमए 2.0 के तहत तैयार होगी पाँच वर्षीय विकास कार्ययोजना

एमआरएमए पहल 2.0 के अंतर्गत हितधारक परामर्श बैठक संपन्न

जशपुर : एमआरएमए (MRMA) पहल 2.0 के अंतर्गत जशपुर में एक परामर्श बैठक का आयोजन किया गया।

डॉ. निधि सुखीजा, वैज्ञानिक-बी, केंद्रीय रेशम बोर्ड, केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीएसबी-सीटीआरटीआई), राँची तथा श्री श्याम कुमार, सहायक संचालक, रेशम, जशपुर के समन्वय में किया गया। बैठक में श्री अजय राय (ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी), श्रीमती सुरबाला पैकरा (सहायक उद्यान अधीक्षक), श्री जेवियर टोप्पो (फील्ड ऑफिसर, रेशम) तथा श्रीमती उषा पैकरा (फील्ड मैन) की विशेष सहभागिता रही।

बैठक में कुल 28 हितधारकों, जिनमें तसर कृषक, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं क्षेत्रीय कार्मिक शामिल थे, ने सहभागिता की।

बैठक के दौरान सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (Participatory Rural Appraisal–PRA) के माध्यम से कृषकों की आवश्यकताओं, समस्याओं एवं प्राथमिकताओं का आकलन किया गया। साथ ही क्षेत्र का आधारभूत सर्वेक्षण (Baseline Survey) भी संपन्न किया गया।

सर्वेक्षण एवं पीआरए के आधार पर यह पाया गया कि क्षेत्र में तसर पालन की प्रमुख समस्याएँ चींटियों एवं ततैया (Wasp) का प्रकोप तथा वायरोसिस (Virosis) रोग हैं, जिनके कारण उत्पादन एवं उत्पादकता प्रभावित हो रही है।

कृषकों की आवश्यकताओं एवं सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर 9 आवश्यकता-आधारित कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई, जिन्हें आगामी वर्षों में चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाएगा।

इस हितधारक परामर्श बैठक एवं आधारभूत सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर जशपुर जिले के लिए पाँच वर्षीय तसर रेशम विकास कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्राप्त हुआ। यह कार्ययोजना स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी हस्तक्षेप, क्षमता निर्माण, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ करते हुए तसर रेशम उद्योग के सतत एवं समावेशी विकास में सहायक सिद्ध होगी।

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