कुनकुरी : रिश्तों के कत्ल और पारिवारिक मूल्यों के पतन की एक बेहद दर्दनाक और रूह कँपा देने वाली घटना में जशपुर जिले के कुनकुरी न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है । माननीय न्यायालय ने अपनी ही सास की बेरहमी से हत्या करने वाली कलयुगी बहू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा से दंडित किया है । यह फैसला समाज में पारिवारिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने और अपराध के प्रति कड़ा संदेश देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।
न्यायालय, न्यायधीश और अभियोजन पक्ष की सशक्त भूमिका
इस संवेदनशील और जघन्य हत्याकांड का संपूर्ण विचारण द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश (कुनकुरी, जिला जशपुर) श्री बलराम कुमार देवांगन के न्यायालय द्वारा किया गया । मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने अदालत में पुरजोर पैरवी की और समाज पर इस वीभत्स अपराध के पड़ने वाले विपरीत असर को रेखांकित करते हुए अभियुक्त को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की । वहीं, अभियुक्त मुन्नी बाई की ओर से अधिवक्ता ने यह दलील पेश की थी कि यह महिला का पहला अपराध है और उसकी उम्र को देखते हुए उस पर उदारता बरती जानी चाहिए । परंतु, दोनों पक्षों को बेहद बारीकी से सुनने के बाद न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया । माननीय न्यायाधीश ने अपने फैसले में गंभीर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि यह घटना केवल एक साधारण अपराध नहीं है, बल्कि हमारे समाज में लगातार बढ़ती असंवेदनशीलता और पारिवारिक मूल्यों के पतन का एक जीता-जागता संकेत है, जो सामाजिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है और किसी भी स्थिति में क्षमा योग्य नहीं है ।
क्या था पूरा घटनाक्रम? (खूनी दास्तान)
इस खौफनाक वारदात की शुरुआत 20 जून 2024 की सुबह करीब 11:00 बजे तुमला थाना क्षेत्र के ग्राम कोनपारा में हुई थी । घटना के दिन मृतिका पुनो बाई का बेटा और आरोपिया का पति सहित कुमार प्रधान सुबह करीब 9:00 बजे अपने गांव के कुछ सहयोगियों—पदमन पटेल, भगीरथी सिदार और मोहर साय के साथ कुम्हारबहार स्थित अपनी पुस्तैनी जमीन का पटवारी से सीमांकन कराने के लिए गया हुआ था । उस वक्त घर पर उसकी वृद्ध मां पुनो बाई, पत्नी मुन्नी बाई और उसके दो छोटे लड़के ही मौजूद थे । दोपहर लगभग 11 से 12 बजे के बीच, जमीन नापी के काम में व्यस्त सहित कुमार के मोबाइल पर उसके छोटे बेटे का फोन आया, जिसने रोते हुए बेहद घबराए स्वर में कहा कि “दादी की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई है, आप जल्दी घर आ जाओ” ।
बेटे की बात सुनकर चिंतित सहित कुमार दोपहर करीब 1:00 बजे जब वापस अपने घर पहुंचा, तो उसने देखा कि उसके दोनों बच्चे घर में ही सहमे हुए खड़े थे । उसके छोटे लड़के ने रोते हुए एक भयानक सच से पर्दा उठाया और बताया कि मां (मुन्नी बाई) ने दादी पर किसी धारदार हथियार से हमला कर उनकी हत्या कर दी है और वारदात को अंजाम देकर वह मौके से भाग निकली है । यह सुनते ही सहित कुमार के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह बदहवास हालत में घर के अंदर भागा । अंदर कमरे का मंजर बेहद खौफनाक था; उसकी मां पुनो बाई पलंग के बगल में जमीन पर पूरी तरह से खून से लथपथ पड़ी हुई थीं । उनके सिर, गाल और गले पर किसी धारदार हथियार से 4-5 बार बेहद गहरे और बेरहमी से वार किए गए थे, जिसके कारण अत्यधिक खून बह जाने से उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो चुकी थी ।
पुलिसिया जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य और त्वरित कार्रवाई
इस दिल दहला देने वाली घटना के तुरंत बाद, पीड़ित पति सहित कुमार प्रधान ने तुमला थाने जाकर मामले की मौखिक मर्ग सूचना दर्ज कराई । तत्कालीन निरीक्षक कोमल नेताम ने तत्परता दिखाते हुए मर्ग क्रमांक 21/2024 और अपराध क्रमांक 48/2024 के तहत भादसं की धारा 302 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर मामले की कमान अपने हाथों में ली । पुलिस टीम ने तत्काल घटनास्थल का मौका नक्शा तैयार किया, शव का पंचनामा कराया और पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) फरसाबहार भेजा । पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी बहू मुन्नी बाई को गिरफ्तार कर लिया ।
विवेचना के दौरान पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में जब मुन्नी बाई का मेमोरेण्डम कथन दर्ज किया, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया । उसकी निशानदेही पर पुलिस ने उसके ही घर से हत्या में प्रयुक्त लकड़ी के बेंट वाला लोहे का बसुला (कुल्हाड़ीनुमा धारदार हथियार) और घटना के समय पहनी हुई खून से सनी नीले रंग की साड़ी बरामद कर जप्त कर ली । इसके अलावा, पुलिस ने घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी और सादी मिट्टी को भी जप्त किया । जप्तशुदा तमाम साक्ष्यों को रासायनिक परीक्षण के लिए पुलिस अधीक्षक जशपुर के माध्यम से FSL अंबिकापुर भेजा गया था, जहां की फॉरेंसिक रिपोर्ट ने आरोपी महिला के कपड़ों और हथियार पर इंसानी खून होने की पुष्टि कर अभियोजन के मामले को वैज्ञानिक रूप से अकाट्य बना दिया । संपूर्ण जांच के बाद पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष चार्जशीट पेश की, जहां से मामला विचारण हेतु सत्र न्यायालय को सुपुर्द किया गया ।
न्यायालय का अंतिम फैसला और दण्डादेश
मामले के विचारण के दौरान आरोपी महिला मुन्नी बाई ने खुद को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने की बात कही थी, लेकिन अदालत के समक्ष पेश किए गए चश्मदीद बच्चों के बयानों, मेमोरेण्डम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के ठोस सबूतों के आगे उसकी एक न चली । द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने अपने विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि यद्यपि आरोपी महिला का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और न ही उससे समाज को कोई सीधा खतरा है, जिसके कारण यह मामला ‘विरलतम से विरल’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में नहीं आता और उसे मृत्युदंड नहीं दिया जा रहा है । परंतु, कानून के मुताबिक धारा 302 के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम सजा आजीवन कारावास ही निर्धारित है और इस घिनौने कृत्य के लिए न्यायालय के पास आरोपी को उम्रकैद से कम सजा देने का कोई कानूनी विकल्प शेष नहीं है ।
अदालत द्वारा मुन्नी बाई को दी गई मुकम्मल सजा:
माननीय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन के न्यायालय ने मामले के समस्त तथ्यों, साक्ष्यों और अपराध की गंभीर प्रकृति को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त मुन्नी बाई को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 302 के अंतर्गत अपनी सास की हत्या करने के अपराध में पूर्णतः दोषी ठहराया है । अदालत ने कानून के प्रावधानों के तहत मुन्नी बाई को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है और साथ ही 1,000 रुपये के नगद अर्थदण्ड से दंडित किया है । इसके अतिरिक्त न्यायालय ने यह भी आदेशित किया है कि यदि दोषी महिला द्वारा अर्थदण्ड की राशि समय पर नहीं पटाई जाती है, तो उसे मुख्य सजा के अतिरिक्त 06 माह का पृथक से सश्रम (कठोर) कारावास भुगतना होगा ।
न्यायालय ने अपने फैसले में संवेदनशीलता दिखाते हुए यह भी आदेशित किया कि मृतिका के पुत्र (पीड़ित परिवार) को संबल देने के लिए ‘पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना’ के प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा दिलाया जाए, जिसके लिए निर्णय की प्रति सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई है । इस कड़े और ऐतिहासिक फैसले ने समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पारिवारिक रिश्तों को लहूलुहान करने वाले कलयुगी अपराधियों को कानून कभी नहीं बख्शता और न्याय की चौखट पर उन्हें उनके कर्मों की पूरी सजा भुगतनी ही पड़ती है।

