वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का विशेष विश्लेषण: भारत में जन्मे रोलबाल की तेज रफ्तार लोकप्रियता, इंदौर लीग 2026 के रोमांच और वैश्विक विस्तार का जीवंत चित्रण

वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का विशेष विश्लेषण: भारत में जन्मे रोलबाल की तेज रफ्तार लोकप्रियता, इंदौर लीग 2026 के रोमांच और वैश्विक विस्तार का जीवंत चित्रण

रोलबाल का मैच जिसे देखना पड़ता है दिल थामकर

मध्यप्रदेश रोलबाल लीग 2026: इंदौर में 21 से 25 मई तक जारी है

आलेख . जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, रायपुर . (छ ग)

रायपुर : चालीस मीटर लंबे और बीस मीटर चौड़े कठोर सतह वाले कोर्ट में जब खिलाड़ी पैरों में रोलर स्केट बांधकर स्केटिंग करते हुए एक दूसरे को पछाड़ने के उद्देश्य से उतरते हैं तो कोर्ट में रोलबाल की चमक,धूम धड़ाका मैच को देखने आये दर्शकों, डिजीटल माध्यम से प्रसारण को देख रहे देश,विदेश के दर्शकों की आंखों को चौंधिया देते हैं।

इस खेल की लोकप्रियता दुनिया भर में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह सिर्फ चालीस मिनट के खेल में विपक्षी को मात देने के लिए मिनट दर मिनट खिलाड़ियों की बढ़ती रफ्तार, गोल करने के लिए निरंतर बदलती रणनीति,तेज तर्रार खिलाड़ी को घेरने की कोशिश, पलक झपकते ही गेंद कभी इस पाले में, कभी उस पाले में रोलबाल के मुकाबले के दौरान आक्रमण करने या बचाव करने वाले खिलाड़ियों के द्वारा गेंद को फटाफट भेजा जाना किसी चमत्कार से कम नहीं। तेज रफ्तार से गेंद को कब्जा में करके गोल करने के लिए गोल पोस्ट की ओर निशाना साधने वाले खिलाड़ी से रक्षा पंक्ति द्वारा गेंद छिन लेने का सफल या असफल प्रयास दर्शकों के दिल की धड़कन को बढ़ा देती है। यही है रोमांच रोलबाल का। भारत के सपूत रोलर स्केटिंग के ट्रेनर द्वारा शहर के आसपास समाचार पत्र को घर घर पहुंचाने वाले पुणे निवासी राजू दभाडे द्वारा 2002/03 में इस खेल का अविष्कार अद्भुत घटना द्वारा संभव हुआ। इतिहास के पन्नों को पलटाकर देखने से पता चलता है कि सिर्फ 24 वर्षों का युवा खेल, अपने भारत का रोलबाल आज संसार के सभी महाद्वीपों के 60 से अधिक देशों में अधिकृत रूप से खेला जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय खेल परिषद से मान्यता प्राप्त करने के लिए इस खेल के चाहने वाले निरंतर आगे आ रहे हैं।जिसकी वजह से रोलबाल 21 वीं सदी का सबसे अधिक तेजी से लोकप्रिय होता हुआ रोमांचक तेज रफ्तार वाला खेल साबित हुआ है। आज की पीढ़ी तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ने में यकीन करती है और रोलबाल उनकी आशा का प्रतीक बन गया है। विदेशों में फुटबाल, वॉलीबॉल, बास्केटबाल, बेसबाल, हाकी.हैंडबाल, रग्बी, मोटर चालन आदि ऐसे कई खेल हैं जो अलग-अलग देशों में लोकप्रिय हैं और जिनकी टीम विश्व चैंपियन हैं। इसका कारण इन खेलों के टूर्नामेंट लगातार होना है। इसके प्रमुख दो कारण हैं। एक यह तभी संभव है इन खेलों में क्लब का गठन होता है। और दूसरा जब लीग आधार पर मुकाबले होते है। हमारे देश की परिस्थिति सामाजिक बनावट कुल अलग प्रकार कर रहा है। इसलिए फुटबाल, हाकी, वालीबाल, टेबल टेनिस, टेनिस , हैंडबॉल,मुक्केबाजी कबड्‌डी,खो-खो जैसे खेलों को छोड़ दिया जाए तो आज तक क्लब या लीग आधार पर अन्य खेलो की चैंपियनशिप शुरू ही नहीं हो सकी है। आखिरकार कम मुकाबलों के कारण खेलकूद में विशेषकर ओलंपिक खेलों में भारत के गिने चुने खिलाड़ी ही उभर पाये। 21 वीं सदी में हमारे देश के खेल प्रशासकों, खेल संघ के पदाधिकारियों, सार्वजनिक उपक्रम की संस्थाओं, औद्योगिक घरानों ने यह बात स्वीकारी कि खेल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि पाने के लिए क्लब तथा लीग आधार पर प्रतियोगिताओं का निरंतर आयोजन हमारे देश में खेलकूद की तकदीर व तस्वीर बदल सकती है।

 इसमें कोई दो मत 2014 के बाद भारत में खेलकूद का माहौल बनता जा रहा है। अब भारत सरकार का खेल मंत्रालय खेल नीति में स्वयं होकर लीग आधार पर होने वाले चैंपियनशिप को बढ़ावा दे रहा है। पहले और अब में अंतर सिर्फ इतना ही कि चूंकि विश्व मंच पर ओलंपिक जैसे बहुखेल स्पर्धा में हासिल की गई उपलब्धि के आधार पर किसी भी देश को खेल शक्ति माना जाता है। अत: अब ओलंपिक में शामिल आवश्यक 31 खेलों को पहले प्राथमिकता मिलती है बाद में भारत के प्राचीन व लुप्त खेल को भी प्रोत्साहित किया जाता है। लीग आधार पर खेलों का बढ़ावा देने की दृष्टि से 21 से 25 मई 2026 तक इंदौर में रोलबाल का चौथा लीग चैंपियनशिप मध्यप्रदेश रोलबाल लीग स्पर्धा आयोजित की गई है। इसमें पूरे भारत की 18 पुरुष व महिला टीम भाग ले रही है। इस लीग के लिए हुए नीलाम में देश भर के 250 खिलाड़ियों ने भाग लिया उसके आधार पर विभिन्न नामों से लीग टीम तैयार की गई। इस रोलबाल लीग के इस संस्करण के प्रायोजक श्री राजवंश रिएल स्टेट ग्रुप है जिसके प्रतिनिधि दीपम शुक्ला और शुभम शुक्ला उद्घाटन अवसर पर स्वयं उपस्थित थे। विधायक महेन्द्र हार्डिया ने लीग का उद्घाटन किया। इंदौर में रंगारंग उद्घाटन की बेला में मप्र रोलबाल एसोसिएशन के अध्यक्ष और इस लीग के आयोजन समिति के अध्यक्ष अर्जुन चौहान उनके साथ हेमंत जोशी तथा चेतन मंडल और बड़ी संख्या में उत्साही दर्शक, रोलबाल के जन्मदाता राजू दभाडे स्वयं उपस्थित थे .उन्होंने बड़े ही गर्व से कहा कि इस आयोजन के लिए मैं प्रायोजकों, अर्जुन चौहान उनके सहयोगियों और इंदौर की खेल प्रेमी जनता का हृदय से आभारी हु जिन्होंने भारत की धरती पर उदय हुए रोलबॉल के खेल को अपनाया . अपने देश का खेल होने के कारण प्रत्येक भारतीय के मन में रोलबाल के प्रति लगाव होना चाहिए। साथ ही साथ भारत में 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों, 2036 में ओलंपिक खेलों में भी रोलबॉल को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किए जाने के लिए अभी से व्यवस्थित व ईमानदार प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

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