आदिवासी सशक्तिकरण की सबसे बड़ी पहल! ₹42 हजार करोड़ से अधिक के प्रावधान के साथ शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा तैयारी, आवासीय विद्यालय, खेल, संस्कृति, वन अधिकार और आजीविका के लिए सरकार ने खोले विकास के नए द्वार

आदिवासी सशक्तिकरण की सबसे बड़ी पहल! ₹42 हजार करोड़ से अधिक के प्रावधान के साथ शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा तैयारी, आवासीय विद्यालय, खेल, संस्कृति, वन अधिकार और आजीविका के लिए सरकार ने खोले विकास के नए द्वार

छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजातियों के समावेशी विकास और सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम: बजट में भारी वृद्धि के साथ अनेक नवीन योजनाओं का शुभारंभ

रायपुर :  छत्तीसगढ़ शासन का आदिम जाति विकास विभाग प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों (ST) के शैक्षणिक, आर्थिक तथा सामाजिक उत्थान के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सामाजिक न्याय के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है । राज्य की कुल जनसंख्या में 30.62% हिस्सेदारी रखने वाले 43 विभिन्न अनुसूचित जनजातियों और उनके उपसमूहों के कल्याण के लिए विभाग योजनाबद्ध तरीके से अनेक अभिनव और कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में आशातीत सफलताएं हासिल हुई हैं ।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश का 60% से अधिक हिस्सा अनुसूचित क्षेत्र और 65% से अधिक हिस्सा आदिवासी उपयोजना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ जनजातीय आबादी 50% से अधिक है । इन क्षेत्रों में ढांचागत विकास, कौशल उन्नयन, आजीविका के अवसरों और उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समरसता और आर्थिक आत्मनिर्भरता स्थापित करना सरकार का मुख्य लक्ष्य है ।

इस दिशा में विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कई बड़े बजटीय प्रावधानों और क्रांतिकारी नीतियों की घोषणा की गई है, जिसका विस्तृत विवरण नीचे दिया जा रहा है:

1. विभागीय बजट और आदिवासी उपयोजना में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

  • विभागीय बजट: अनुसूचित जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए वर्ष 2026-27 के आदिम जाति विकास विभाग के बजट में ₹2,136 करोड़ 26 लाख 70 हजार का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है ।
  • आदिवासी उपयोजना (TSP): वित्तीय वर्ष 2026-27 के मुख्य बजट में विभिन्न विभागों के माध्यम से आदिवासी उपयोजना मद के तहत कुल समेकित बजट प्रावधान ₹42,165 करोड़ 95 लाख 95 हजार रखा गया है । यह पिछले वर्ष (2025-26) के मुख्य बजट के प्रावधान (₹40,800 करोड़ 76 लाख 49 हजार) की तुलना में 3.34 प्रतिशत अधिक है ।
  • विकास प्राधिकरणों का सुदृढ़ीकरण: स्थानीय विकास को गति देने के लिए बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण तथा नवगठित मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण प्रत्येक के लिए वर्ष 2023-24 में क्रमशः ₹55 करोड़, ₹35 करोड़ और ₹33 करोड़ का प्रावधान था । इसमें अभूतपूर्व वृद्धि करते हुए वर्ष 2026-27 के बजट में तीनों प्राधिकरणों के लिए ₹75-75 करोड़ (कुल ₹225 करोड़) का समान रूप से ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है ।

2. युवाओं के सपनों को उड़ान: नई प्रतियोगिता परीक्षा प्रोत्साहन योजना ‘CG-ACE’

राज्य के अनुसूचित वर्ग के युवाओं को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोग (CGPSC), बैंकिंग, रेलवे, SSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं और इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराने के लिए पुरानी योजना को पुनर्गठित कर एक नई महत्वाकांक्षी योजना CG-ACE (CG-Assistance for Competitive Examination) को वर्ष 2026-27 से लागू किया जा रहा है ।

इस नई योजना के लिए बजट में ₹15 करोड़ 89 लाख 13 हजार का प्रावधान किया गया है । योजना के तीन प्रमुख घटक होंगे:

  • उड़ान’: इंजीनियरिंग, मेडिकल और विधि संस्थानों में प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग ।
  • शिखर’: UPSC और CGPSC जैसी शीर्ष प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण ।
  • मंजिल’: SSC, रेलवे और बैंकिंग सेवाओं की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष तैयारी ।

(नोट: पुरानी युवा करियर निर्माण योजना के माध्यम से अब तक कुल 164 अभ्यर्थी सफल हो चुके हैं, जिनमें 4 IRS, 5 असिस्टेंट कमांडेंट, 16 डिप्टी कलेक्टर, 12 DSP और 19 नायब तहसीलदार शामिल हैं ।) इसके अतिरिक्त, वर्तमान में दिल्ली में UPSC की तैयारी कर रहे अनुसूचित जाति वर्ग के 4 अभ्यर्थियों ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 उत्तीर्ण कर मुख्य परीक्षा में जगह बनाई है ।

3. शैक्षणिक विकास एवं आवासीय अधोसंरचना में बड़े नवाचार

राज्य में शाला त्याग दर (ड्रॉप-आउट) को कम करने और उत्कृष्ट आवासीय शिक्षा देने के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं:

  • नारायणपुर और सुकमा में ‘एजुकेशन सिटी’: नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे दूरस्थ क्षेत्रों—ओरछा/अबूझमाड़ (नारायणपुर) तथा जगरगुंडा (सुकमा) में विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर सभी शैक्षणिक व आवासीय सुविधाएं देने के लिए ‘एजुकेशन सिटी’ की स्थापना की जा रही है । इसके तहत 50-50 सीटर प्री-मैट्रिक/पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास व आश्रमों के संचालन हेतु ₹4 करोड़ तथा इनके अधोसंरचना निर्माण के लिए ₹84 करोड़ का बड़ा प्रावधान किया गया है ।
  • बीजापुर में नया प्रयास विद्यालय: दक्षिण बस्तर के बच्चों को शानदार करियर निर्माण का अवसर देने के लिए जिला बीजापुर में 500 सीटर नवीन बालक/कन्या प्रयास आवासीय विद्यालय की स्थापना की जाएगी, जिसके लिए ₹2 करोड़ 5 लाख आवंटित किए गए हैं ।
  • मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना: जिन अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को सरकारी छात्रावासों में प्रवेश नहीं मिल पाता है, उन्हें शैक्षणिक और आवासीय सहायता देने के लिए इस योजना के तहत ₹500 लाख (₹5 करोड़) का विशेष प्रावधान किया गया है ।
  • भवन विहीन संस्थाओं का निर्माण: राज्य में संचालित भवन विहीन छात्रावासों, आश्रमों, क्रीड़ा परिसरों और प्रयास विद्यालयों के पक्के भवनों के निर्माण को प्राथमिकता देते हुए बजट में ₹75 करोड़ का प्रावधान किया गया है ।
  • शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण: छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों से परिचित कराने के लिए शैक्षणिक भ्रमण हेतु ₹2 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं ।
  • रामकृष्ण मिशन आश्रम (नारायणपुर) की क्षमता में वृद्धि: अबूझमाड़िया पीवीटीजी और स्थानीय आदिवासी बच्चों के विकास के लिए संचालित इस आश्रम के 05 आवासीय विद्यालयों में 150 सीटों की वृद्धि के लिए ₹13 लाख 98 हजार दिए गए हैं । इसके अलावा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के ओम अखंड राष्ट्र धर्म संस्थान को छात्रावास संचालन हेतु ₹40 लाख का अनुदान दिया गया है ।

4. छात्रवृत्ति और शिष्यवृत्ति वितरण में पारदर्शिता एवं सुशासन

  • ई-मेधा ऑनलाइन पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति: भारत सरकार (75%) और छत्तीसगढ़ राज्य (25%) के सहयोग से कॉलेज स्तर के विद्यार्थियों के लिए संचालित इस योजना को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत कर पारदर्शी बनाया गया है । सत्र 2025-26 से लागू नवीन समय-सीमा व्यवस्था के तहत, अब तक 84 हजार 702 (95%) विद्यार्थियों को ₹94.57 करोड़ की छात्रवृत्ति सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से त्वरित भुगतान की जा चुकी है ।
  • ऑनलाइन शिष्यवृत्ति: प्री-मैट्रिक छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले 1.44 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को भोजन और अन्य सुविधाओं के लिए ₹1500/- प्रतिमाह प्रति छात्र शिष्यवृत्ति दी जा रही है । हॉस्टल मैनेजमेंट पोर्टल के माध्यम से यह राशि सीधे अधीक्षकों और छात्र नायकों के संयुक्त खातों में हस्तांतरित होती है, जिससे समय की बचत और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है ।
  • सत्र 2025-26 के तहत कुल छात्रसंख्या एवं वितरण की स्थिति:
    • प्री-मैट्रिक संस्थाएं (छात्रावास व आश्रम): कुल 2,900 संस्थाओं में 1,62,828 विद्यार्थी प्रवेशित हैं, जिनके लिए ₹256.4322 करोड़ की शिष्यवृत्ति देय है । (इसमें केवल अनुसूचित जनजाति वर्ग के 1,326 छात्रावासों में 68,326 छात्र और 1,173 आश्रमों में 76,627 छात्र लाभान्वित हो रहे हैं) ।
    • पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास: कुल 457 संस्थाओं में 26,450 विद्यार्थी प्रवेशित हैं, जिनके लिए ₹33.31 करोड़ की राशि देय है ।
  • छात्र भोजन सहाय योजना: छात्रावासों में रहने वाले 19 हजार से अधिक पोस्ट-मैट्रिक विद्यार्थियों को बेहतर पोषण और भोजन व्यवस्था की कठिनाइयों को दूर करने के लिए ₹1200/- प्रतिमाह प्रति विद्यार्थी की अतिरिक्त सहायता दी जा रही है ।
  • विशेष शिक्षण केंद्र (ट्यूशन योजना): दूरस्थ अंचलों में कठिन विषयों (गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, वाणिज्य) के शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए 146 विकासखंडों में विशेष शिक्षण केंद्र शुरू किए गए हैं, जहाँ कक्षा 8वीं से 12वीं तक के बच्चों को उपचारात्मक शिक्षा दी जाती है 。
  • खाद्यान्न सुरक्षा योजना: वर्ष 2013 से संचालित इस योजना के तहत सरकारी व विशिष्ट/अशासकीय छात्रावास-आश्रमों के बच्चों के लिए मात्र ₹6.25 प्रति किलो की रियायती दर पर प्रति माह 15 किलो चावल उपलब्ध कराया जाता है । इसके अंतर की राशि (स्टेट पुल दर ₹28 से ₹30) का भुगतान आदिम जाति विकास विभाग द्वारा खाद्य निगम को किया जाता है ।

5. विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों (एकलव्य एवं प्रयास) की बड़ी उपलब्धियां

  • एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय: वर्तमान में प्रदेश में 75 एकलव्य विद्यालय संचालित हैं । इनमें कुल 28,860 स्वीकृत सीटों के मुकाबले 27,359 विद्यार्थी (12,865 बालक और 14,494 कन्या) अध्ययनरत हैं । इस वर्ष इन विद्यालयों का 10वीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम 88.93% तथा 12वीं का 72.13% रहा है ।
    • राष्ट्रीय गौरव: गरियाबंद जिले के एकलव्य विद्यालय कोसमबुड़ा को देश के 800 विद्यालयों में से मॉडल यूथ ग्राम सभा’ (MYGS) प्रतियोगिता का राष्ट्रीय विजेता चुना गया । राष्ट्रपति महोदया और पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी 2026 को इस विद्यालय के छात्रों को सम्मानित किया गया और ₹1 करोड़ की उपहार राशि प्रदान की गई ।
    • खेलों में जलवा: ओड़िशा में आयोजित चौथी राष्ट्रीय एकलव्य खेल प्रतियोगिता (नवंबर 2025) में छत्तीसगढ़ के 516 खिलाड़ियों के दल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 55 स्वर्ण, 43 रजत और 64 कांस्य सहित कुल 162 पदक जीतकर पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया 。
    • प्रतियोगी परीक्षाएं: एकलव्य विद्यालयों से विगत वर्ष 03 छात्रों का चयन JEE में तथा 01 छात्र का चयन NEET में हुआ है ।
  • प्रयास आवासीय विद्यालय (मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना): नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों के लिए वर्ष 2010 से शुरू की गई इस योजना के तहत वर्तमान में 10 जिलों में प्रयास विद्यालय संचालित हैं, जिनमें वर्ष 2025-26 में 2,717 सीटें स्वीकृत हैं । वर्ष 2026 की 10वीं बोर्ड परीक्षा में प्रयास के 13 विद्यार्थियों ने प्रावीण्य सूची (Merit List) में स्थान बनाया है । अब तक यहाँ से 136 छात्र IIT/IIIT, 363 छात्र NIT, 1,011 छात्र इंजीनियरिंग और 82 छात्र MBBS में चयनित हो चुके हैं ।
  • उत्कर्ष योजना: मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना के तहत प्रतिवर्ष 200 प्रतिभावान और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों (जिसमें 130 ST वर्ग के) को राज्य के महंगे व प्रतिष्ठित निजी आवासीय स्कूलों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा दिलाई जाती है ।

6. खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और बस्तर ओलंपिक में परचम

प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए विभाग द्वारा 17 क्रीड़ा परिसर (कुल 1700 सीट) संचालित किए जा रहे हैं, जो उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों से संबद्ध हैं । यहाँ प्रत्येक खिलाड़ी को ₹1500 शिष्यवृत्ति और ₹500 पोषण आहार (कुल ₹2000/- प्रतिमाह) के साथ ही वर्ष में एक बार ₹3000 मूल्य की खेल पोशाक किट (ट्रैक सूट, जूते, मोजे, खेल किट) दी जाती है ।

  • नवीन क्रीड़ा परिसर: खेल आवश्यकताओं को देखते हुए आदिवासी बाहुल्य जिले कोरबा में एक नए बालक क्रीड़ा परिसर की स्थापना हेतु ₹50 लाख का बजटीय प्रावधान किया गया है ।
  • बस्तर ओलंपिक 2025: जगदलपुर में आयोजित बस्तर ओलंपिक में क्रीड़ा परिसर धरमपुरा (जगदलपुर) के खिलाड़ियों ने 100 मीटर, 400 मीटर, 4X100 रिले और ऊंची कूद में स्वर्ण पदक जीते । इन प्रतिभावान खिलाड़ियों को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के कर-कमलों से सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ ।
  • वर्ष 2025-26 में इन क्रीड़ा परिसरों के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर कुल 1,022 स्वर्ण पदक, 156 रजत पदक और 176 कांस्य पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है ।

7. वन अधिकार अधिनियम (FRA) का प्रभावी क्रियान्वयन और रिकॉर्ड संशोधन

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2008 से ‘वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006’ का कड़ाई से पालन किया जा रहा है । वन भूमि पर व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों के लिए कट-ऑफ डेट 13 दिसंबर 2005 निर्धारित है ।

  • अब तक का वितरण: * व्यक्तिगत वन अधिकार: 4 लाख 28 हजार से अधिक हितग्राहियों को पट्टा वितरित, जिसका रकबा 3 लाख 53 हजार हेक्टेयर से अधिक है ।
    • सामुदायिक वन अधिकार: 48 हजार से अधिक दावाकर्ताओं को पट्टा वितरित, जिसका रकबा 17 लाख 47 हजार हेक्टेयर से अधिक है ।
    • सामुदायिक वन संसाधन अधिकार: 4 हजार से अधिक ग्राम सभाओं/समुदायों को अधिकार पत्र वितरित, जिसका रकबा 19 लाख 55 हजार हेक्टेयर से अधिक है ।
  • ऐतिहासिक प्रशासनिक सुधार व नवाचार: पट्टाधारकों की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों के नाम जोड़ने (नामांतरण), बंटवारा, सीमांकन, रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार और अपील के लिए पूर्व में कोई स्पष्ट नियम नहीं थे । राज्य सरकार ने पहली बार इन समस्याओं के सरलीकरण के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर इसे राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित किया है । इस नई व्यवस्था के तहत प्राप्त 19,037 प्रकरणों में से 16,105 जटिल मामलों का त्वरित निराकरण किया जा चुका है ।

8. संस्कृति का संरक्षण, गौरव दिवस और जनजातीय सम्मान

  • देवगुड़ी निर्माण एवं मरम्मत: आदिवासियों के आस्था और पूजा स्थलों के परिरक्षण हेतु संचालित योजना के तहत प्रति देवगुड़ी अधिकतम ₹5 लाख की राशि स्वीकृत की जाती है । वर्तमान में कुल 107 देवगुड़ी स्वीकृत की गई हैं ।
  • शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति सम्मान व लोक कला महोत्सव: वर्ष 2025-26 का ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति सम्मान’ जंगो रायतार विद्या केतुल शिक्षण संस्था दमकसा (जिला कांकेर) को दिया गया है । वहीं, ‘स्व. डॉ. भवर सिंह पोर्ते स्मृति आदिवासी सेवा सम्मान’ से कांकेर जिले के श्री हिरेश सिन्हा को नवाजा गया है ।
  • वीर सेनानी के शहादत दिवस (10 दिसंबर) पर उनके जन्मस्थल सोनाखान (बलौदाबाजार) में प्रतिवर्ष लोक कला महोत्सव का आयोजन किया जाता है । वर्ष 2025 में भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती के अवसर पर ‘जनजातीय गौरव वर्ष’ के रूप में अंबिकापुर (सरगुजा) के पीजी कॉलेज मैदान में माननीय राष्ट्रपति महोदया के मुख्य आतिथ्य में राज्य स्तरीय भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ ।
  • बैगा एवं पुजारियों को प्रोत्साहन: अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांवों के पारंपरिक बैगा और पुजारियों के आर्थिक प्रोत्साहन के लिए बजट में ₹3 करोड़ 34 लाख 55 हजार का विशेष प्रावधान प्रस्तावित किया गया है 。

9. विशेष रूप से कमजोर जनजातियों (PVTG) के लिए ‘पीएम-जनमन’ और ‘धरती आबा’ अभियान

  • पीएम-जनमन योजना: 15 नवंबर 2023 से शुरू हुए इस 3-वर्षीय विशेष अभियान (अवधि मार्च 2026 तक) के तहत छत्तीसगढ़ की 5 विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG)—बैगा, पहाड़ी कोरवा, कमार, अबूझमाड़िया और बिरहोर के 18 जिलों में स्थित 1,544 गांवों और 2,365 बसाहटों का विकास किया जा रहा है 。 9 केंद्रीय मंत्रालयों के सहयोग से 11 विभिन्न गतिविधियां संचालित हैं । इसके तहत 75 बहुउद्देशीय केंद्रों की स्वीकृति में से 37 केंद्र पूर्ण हो चुके हैं । इस अभियान में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य को माननीय राष्ट्रपति महोदया द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत भी किया जा चुका है ।
  • कोरबा में विशेष PVTG विद्यालय: कोरबा जिले में पहाड़ी कोरवा समूह के बच्चों के लिए कक्षा 1ली से 10वीं तक के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय आवासीय विद्यालय’ की स्थापना की जा रही है, जिसके लिए ₹50 लाख का प्रावधान बजट में है ।
  • धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA): माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा 2 अक्टूबर 2024 को शुरू की गई यह 5-वर्षीय योजना (2024-25 से 2028-29) राज्य के 32 जिलों के 6,691 अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांवों में लागू होगी । इसके तहत 17 मंत्रालयों की 25 प्रमुख योजनाओं के जरिए पक्के घर, बिजली-पानी, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, आंगनबाड़ी, ट्राइबल होम-स्टे, कौशल विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे बुनियादी ढांचे का कायाकल्प किया जाएगा 。

छत्तीसगढ़ सरकार के ये दूरगामी प्रयास और बजट आवंटन राज्य के वनांचलों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक सुशासन, शिक्षा और समृद्धि पहुंचाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं ।

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