जशपुर : छत्तीसगढ़ के जनजातीय बाहुल्य जिले जशपुर में स्थित केंद्रीय विद्यालय (KV) में वर्तमान शैक्षणिक सत्र (2026-27) के दौरान प्रवेश प्रक्रिया में बड़ी अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा (छत्तीसगढ़ प्रदेश) के कार्यसमिति सदस्य शिवप्रकाश तिवारी ने इन गड़बड़ियों को लेकर मोर्चा खोलते हुए न केवल स्थानीय जिला कलेक्टर, बल्कि भारत सरकार के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जाँच की मांग की है।
नियमों की अनदेखी और ‘बैकडोर‘ एंट्री के आरोप
शिकायती पत्रों के अनुसार, विद्यालय के प्राचार्य पर केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) के दिशानिर्देशों और चयन नियमों के खुले उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। श्री तिवारी का दावा है कि प्रशासन ने निर्धारित ‘प्राथमिकता क्रम’ (श्रेणीवार वरीयता) और ‘प्रतीक्षा सूची’ (वेटिंग लिस्ट) को दरकिनार कर अपारदर्शी तरीके से बच्चों को प्रवेश दिया है। आरोप है कि मुख्य प्रतीक्षा सूची में ऊपर स्थित योग्य छात्रों को सूचित किए बिना, पिछले दरवाजे से कम वरीयता वाले छात्रों का नामांकन किया गया है।
जाँच के घेरे में महत्वपूर्ण दस्तावेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री तिवारी ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की मांग की है:
- स्थानांतरण रिकॉर्ड का फर्जीवाड़ा: श्रेणी-1 और श्रेणी-2 के तहत प्रवेश लेने वाले अभिभावकों के पिछले 7 वर्षों के स्थानांतरण रिकॉर्ड की सत्यता की जाँच हो, क्योंकि इसमें हेरफेर की प्रबल संभावना जताई गई है।
- RTE कोटे का उल्लंघन: शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निर्धारित 5 किलोमीटर की दूरी के नियमों को ताक पर रखकर फर्जी निवास प्रमाण पत्रों के आधार पर प्रवेश देने का आरोप है।
- डेटा में हेरफेर: ऑनलाइन पंजीकरण और मुख्य डेटा सूची के मिलान के साथ-साथ अंतिम समय में डेटा में किए गए किसी भी ‘हस्तचालित बदलाव’ (Manual Changes) की तकनीकी जाँच की मांग की गई है।
कठोर कार्रवाई की मांग
शिक्षा मंत्री को लिखे पत्र में शिवप्रकाश तिवारी ने उल्लेख किया कि जशपुर जैसे दूरस्थ अंचल में केंद्रीय विद्यालय शिक्षा का एकमात्र उत्कृष्ट केंद्र है। यदि यहाँ के जिम्मेदार अधिकारी ही अनुचित कार्यों में लिप्त होंगे, तो इससे सरकार की ‘पारदर्शी शिक्षा नीति’ की छवि धूमिल होगी। उन्होंने नई दिल्ली से एक विशेष ‘केंद्रीय सतर्कता दल’ नियुक्त करने का आग्रह किया है ताकि दोषी पाए जाने पर प्राचार्य व अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सके।
वर्तमान में, स्थानीय स्तर पर जिला कलेक्टर को पत्र सौंपकर प्रवेश समिति की बैठकों के कार्यवृत्त और रिक्त सीटों के प्रबंधन की विधिवत जाँच की गुहार लगाई गई है। इस विवाद ने क्षेत्र के प्रतिभावान छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच गहरे आक्रोश को जन्म दे दिया है।

