नारायणपुर : जिला कांकेर के नक्सल प्रभावित सीमावर्ती जंगलों से एक अत्यंत दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां डी-माइनिंग और सर्च ऑपरेशन के दौरान हुए आकस्मिक विस्फोट में सुरक्षा बलों के चार वीर जवान शहीद हो गए। 2 मई 2026 को थाना छोटेबेठिया क्षेत्र अंतर्गत कांकेर–नारायणपुर सीमा पर मार्काबेड़ा, कोरोसकोडो और आदनार के सरहदी जंगलों में यह हादसा उस समय हुआ, जब पुलिस की डीआरजी टीम माओवादियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखे गए विस्फोटक सामग्री को बरामद कर उसे निष्क्रिय करने की कार्रवाई में जुटी थी।
पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के अनुसार, सर्च अभियान के दौरान पहले एक डंप से कंप्यूटर, मॉनिटर और प्रिंटर जैसी सामग्री बरामद की गई। इसके बाद समीप ही एक अन्य डंप से लगभग 15-15 किलो की 5 बोरियों में भरा पटाखा पाउडर (पोटेशियम नाइट्रेट और बेरियम नाइट्रेट) मिला, जिसे बम निरोधक दस्ते (BDS) की मदद से सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान संभवतः अत्यधिक तापमान और रासायनिक प्रतिक्रिया के चलते अचानक भीषण विस्फोट हो गया।
इस हादसे में निरीक्षक सुखराम वट्टी, आरक्षक कृष्णा कोमरा और आरक्षक संजय गढ़पाले मौके पर ही गंभीर रूप से घायल होकर शहीद हो गए, जबकि बस्तर फाइटर आरक्षक परमानंद कोर्राम को गंभीर हालत में हेलीकॉप्टर से रायपुर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस प्रकार कुल चार बहादुर जवानों ने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राणों की आहुति दे दी।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हाल के महीनों में आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों से मिली सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा बलों ने सैकड़ों आईईडी बरामद कर निष्क्रिय किए थे। उल्लेखनीय है कि निरीक्षक सुखराम वट्टी के नेतृत्व में इसी टीम ने कई सफल अभियानों में माओवादी ठिकानों से विस्फोटक सामग्री बरामद कर सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया था।
यह हादसा एक बार फिर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ड्यूटी कर रहे जवानों के सामने मौजूद खतरों और उनके साहस की कीमत को उजागर करता है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है, वहीं सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन और सतर्कता को और तेज कर दिया है। राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन वीर जवानों के प्रति देश सदैव ऋणी रहेगा।

