जसवंत क्लॉडियस ने उठाई जमीनी खेल विकास की आवाज: फीफा की पहल पर लिखा दूरदर्शी लेख, गांव-गांव तक फुटबॉल पहुंचाने का दिया स्पष्ट रोडमैप

जसवंत क्लॉडियस ने उठाई जमीनी खेल विकास की आवाज: फीफा की पहल पर लिखा दूरदर्शी लेख, गांव-गांव तक फुटबॉल पहुंचाने का दिया स्पष्ट रोडमैप

खेल को जन जन तक पहुंचाने का अभिनव प्रयास : फीफा का फुटबाल फॉर स्कूल्स के अंतर्गत फुटबाल भेंट करना

आलेख … जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार

रायपुर : सारे संसार में आबादी की दृष्टि से फुटबॉल सर्वाधिक पसंदीदा खेल है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भले ही दुनिया के देशों की संख्या 193 मानी जाती है जिसमें वेटिकन सिटी और पलिश्तीन शामिल नहीं है। दूसरी तरफ खोजी लोगों के अनुसार विश्व में देशों की संख्या करीब 237 हो गई है। फुटबाल के अधिकृत प्रचार-प्रसार, संरक्षण, प्रतियोगिता कराने के लिए फीफा याने फेडरेशन डी फुटबाल एसोसिएशन जिम्मेदार है। फीफा आज जगत भर में किसी भी खेल की सबसे बड़ी और धनवान संस्था है। फीफा के अंतर्गत 211 देशों तथा इकाइयों को मान्यता दी गई है।

इस खेल संघ के द्वारा पूरी दुनिया में फुटबाल को निरंतर खेला जाने वाला खेल माना जाता है इसके लिए फीफा द्वारा विभिन्न देशों और मान्यता प्राप्त इकाइयों में फुटबाल खेल के प्रशिक्षित खिलाड़ी तैयार करने में मदद की जाती है। साथ ही कोचिंग सेंटर को सुविधाओं से सुसज्जित किया जाता है। इस तरह की सुविधा अन्य किसी विश्व स्तरीय खेल संगठन द्वारा उपलब्ध कराये जाने की जानकारी नहीं है। यही वजह है कि आज फुटबाल खेल को संसार की 90 प्रतिशत से अािक आबादी जानती है।

फीफा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पुरुष विश्वकप, महिला विश्वकप, फीफा क्लब विश्वकप, 17 वर्ष से 20 वर्ष से कम आयु वर्ग के युवक व युवती वर्ल्डकप, फीफा फुस्टल विश्वकप और फीफा बीच साकर वर्ल्ड कप का आयोजन नियमित रूप से कुछ न कुछ अंतराल में आयोजन करता है। एक तो विश्व प्रसिद्ध चैंपियनशिप और उनको देखने वाले फुटबॉल प्रेमी दर्शक ,तरह-तरह के विश्व स्तरीय स्पर्धा के आयोजन के माध्यम से बड़ी राशि फीफा को प्राप्त होती है। 2019 से 2022 की अवधि में कतर विश्वकप आयोजन हुआ था फीफा ने कुल मिलाकर लगभग 637.5 अरब रुपये का राजस्व अर्जित किया

। इतनी बड़ी राशि की प्राप्ति के बाद फीफा उसे सिर्फ खजाने में भरकर नहीं रखता है वह इस धन से विभिन्न राष्ट्रों में या मान्यता प्राप्त इकाइयों में प्रतियोगिता के आयोजन, विकास परियोजनाओं के लिए सुविधा देता है। इसी तारतम्य में फीफा की नजर भारत ी ओर है। फीफा भारत के खेल प्रेमियों से अपने उपरोक्त 9 चैंपियनशिप के टिकिट बिक्री तथा विभिन्न उत्पादों के विज्ञापन के माध्यम से बड़ी राशि में धन प्राप्त करता है अत: वह भारत में फुटबाल के अपार संभावना को देखते हुए एफ 4 एस अर्थात फुटबाल फार स्कूल्स आरंभ किया है। यह भारत के फुटबाल के भविष्य के लिए बहुत ही लाभप्रद है।

भारत के शिक्षा मंत्रालय, अखिल भारतीय फुटबाल संघ और भारतीय खेल प्राधिकरण नईदिल्ली के संयुक्त तत्वावधान के साथ हमारे देश की शालाओं में 4 से 14 आयु वर्ग के तथा विभिन्न देशों के करीब 7 अरब लड़के व लड़कियों को फुटबाल उपलब्ध कराने के निश्चय में यूनेस्को भी शामिल है। इस योजना के अंतर्गत भारत में नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय , केंद्रीय स्कूल संगठन आदि मिलकर 10 लाख एडिडास फुटबॉल को भारत के 789 जिलों में वितरित करने की चुनौती दी गई है .फरवरी 2026 में भारत के 244 जिलों में 2.53 लाख फुटबाल बाटे गए हैं। खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 से प्रयासरत हैं ऐसी स्थिति में भारत के बच्चों, किशोरों, युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे मुफ्त में मिलने वाली फुटबाल को 04 से 14 वर्ष के बच्चों के बीच बांटकर इस खेल के प्रति जन्मजात लगाव पैदा करें।

आज फुटबाल में भारत की रेकिंग विश्व 211 देशों में पुरुष में 141वीं जबकि महिलाओं में 119 में 67वीं है। फुटबाल कम खर्च में आसानी से किसी भी मौसम में खुले आसमान के नीचे खेला जा सकता है। 1956 के मेलबोर्न ओलंपिक में भारतीय पुरुष टीम चौथे नंबर पर थी आज उसकी स्थिति दयनीय है। अत: फीफा की प्रत्येक स्कूल के लिए फुटबाल कार्यक्रम का लाभ बच्चों को उठाना चाहिए । शालेय बच्चे ही क्यों इस कार्यक्रम में झुग्गी झोपड़ी में पैदा हुए प्रतिभाशाली बच्चे, अनाथ, बेसहारा जो स्कूल नहीं जाते है ऐसे प्रतिभाशाली फुटबॉल खेल के प्रति दिलचस्पी रखनेवाले बच्चों को भी जो 04 से14 वर्ष के हैं उन्हें भी फीफा के इस कार्यक्रम से जोड़ना चाहिए .और इस बात पर नजर रखना चाहिए जो फुटबॉल मुफ्त में वितरित किया जा रहा है वह वास्तव में ठीक स्थान पर पहुंच सके।

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