“पैसे दे नहीं तो जान ले लूंगा!” — व्यापारी से चाकू की नोक पर लूट करने वाले चिड़रू को दो साल की सजा, कुनकुरी न्यायालय ने सुनाया सख्त फैसला

“पैसे दे नहीं तो जान ले लूंगा!” — व्यापारी से चाकू की नोक पर लूट करने वाले चिड़रू को दो साल की सजा, कुनकुरी न्यायालय ने सुनाया सख्त फैसला

कुनकुरी, 26 सितंबर 2025 | विशेष रिपोर्ट | संपादक – सागर जोशी

जशपुर जिले की कुनकुरी न्यायालय ने एक सनसनीखेज लूटकांड मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी रामवृक्ष पात्रे उर्फ चिड़रू, निवासी ग्राम तुबा (थाना फरसाबहार), को विभिन्न धाराओं में कुल दो वर्ष का कठोर कारावास और ₹5000 अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री नरेंद्र कुमार तेंदुलकर की अदालत ने सुनाया।


दिनांक 10 जनवरी 2025 की शाम लगभग 6:50 बजे, कपड़ा व्यापारी हलधर यादव, ग्राम फरसाबहार निवासी, अपनी मारुति ईको कार (CG 14 MR 5964) से तुबा साप्ताहिक बाजार से लौट रहे थे।
जैसे ही वे ग्राम तुबा के आम बगीचा मोड़ के पास पहुंचे, तभी मोटरसाइकिल हीरो होंडा पैशन प्रो (CG 15 CJ 0106) पर सवार आरोपी रामवृक्ष पात्रे उर्फ चिड़रू ने व्यापारी का रास्ता रोक लिया।

आरोपी ने उतरते ही हलधर यादव पर चाकू तान दिया और धमकाते हुए कहा —

“जो भी है, सब दे दे, नहीं तो यहीं खत्म कर दूंगा!”

भयभीत व्यापारी ने अपना बैग और मोबाइल फोन (वीवो कंपनी) आरोपी को सौंप दिया।
बैग में ₹5000 नगद, एक लाल डायरी, कपड़ा काटने की कैंची, दो एटीएम कार्ड, और आधार कार्ड रखे हुए थे।
लूट के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।


व्यापारी की रिपोर्ट पर थाना फरसाबहार पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अपराध क्रमांक 02/2025 दर्ज किया।
थाना प्रभारी विवेक कुमार भगत ने जांच के दौरान गवाहों शिवा चौहान और मोनू चौहान को साथ लेकर आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार किया।

पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया और बताया कि —

“मैंने पहले से व्यापारी को लूटने की योजना बनाई थी। पैसे और मोबाइल छिपाकर घर के ट्रॉली बैग में रखे थे।”

आरोपी के घर से लूटे गए ₹5000, मोबाइल फोन, डायरी, आधार कार्ड, एटीएम कार्ड और कैंची बरामद की गई।
घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी पुलिस ने जप्त की।


मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से ए.डी.पी.ओ. संजय विश्वकर्मा ने ठोस तर्क पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सतीश शर्मा ने आरोपी को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया।

मुख्य गवाह प्रार्थी हलधर यादव ने न्यायालय में स्पष्ट रूप से आरोपी की पहचान करते हुए कहा कि —

“जिसने मुझसे चाकू की नोक पर लूट की थी, वही आरोपी रामवृक्ष पात्रे उर्फ चिड़रू है।”

साक्षियों शिवा चौहान और मोनू चौहान ने भी बयान दिया कि उन्होंने आरोपी को वारदात के बाद भागते हुए देखा था।
साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पुलिस ने उनके सामने आरोपी से बरामदगी की कार्यवाही की थी।


न्यायालय ने अभियोजन के साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए कहा कि —

“अभियुक्त का कृत्य गंभीर प्रकृति का है। उसने न केवल व्यापारी से लूट की, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी। ऐसे अपराधों को समाज में सहन नहीं किया जा सकता।”

हालांकि अदालत ने यह माना कि अभियोजन धारा 296 (अश्लील भाषा प्रयोग) साबित करने में असफल रहा,
लेकिन धारा 126, 115(2), 351(3) एवं 309(4)(6) भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध सिद्ध पाया गया।


धारासजा का प्रकारअवधिजुर्मानाकारावास की प्रकृति
धारा 126कारावास1 माहकठोर
धारा 115(2)कारावास3 माहकठोर
धारा 351(3)कारावास6 माहकठोर
धारा 309(4)(6)कारावास2 वर्ष₹5000कठोर

सभी सजाएं साथ-साथ भुगताने का आदेश दिया गया।
अर्थदंड न भरने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।


न्यायालय ने आदेश दिया कि —

  • जप्त किए गए ₹5000 नकद, मोबाइल, डायरी, कैंची, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड व्यापारी हलधर यादव को लौटाए जाएं।
  • मोटरसाइकिल को अपील अवधि समाप्ति के बाद उसके स्वामी को लौटाया जाएगा।

फैसला सुनाते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री नरेंद्र कुमार तेंदुलकर ने कहा —

“यह अपराध पूर्व नियोजित था। आरोपी ने एक व्यापारी की आजीविका छीनने की कोशिश की। ऐसे मामलों में नरमी न्याय के साथ अन्याय होगी।”

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