100 लीटर अवैध ताड़ी रखने वाले श्रवण बेहरा को एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ₹35,000 का अर्थदंड — कुनकुरी न्यायालय का सख्त फैसला

100 लीटर अवैध ताड़ी रखने वाले श्रवण बेहरा को एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ₹35,000 का अर्थदंड — कुनकुरी न्यायालय का सख्त फैसला

ग्राम कुचमुंडा निवासी श्रवण बेहरा के घर से पुलिस ने 100 लीटर ताड़ी जब्त की, न्यायिक मजिस्ट्रेट नरेंद्र कुमार तेंदुलकर का सख्त निर्णय

कुनकुरी, जिला जशपुर (छत्तीसगढ़)। सागर जोशी (संपादक)
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री नरेंद्र कुमार तेंदुलकर के न्यायालय ने अवैध शराब कारोबार के एक चर्चित मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी श्रवण बेहरा पिता चैतन (उम्र 43 वर्ष), निवासी ग्राम कुचमुंडा, थाना तुमला, जिला जशपुर (छत्तीसगढ़) को दोषसिद्ध करार दिया है। अदालत ने आरोपी को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(1)(घ) एवं 34(2) के अंतर्गत एक-एक वर्ष का कठोर कारावास तथा कुल ₹35,000 का अर्थदंड देने का आदेश पारित किया है।

मामले की पृष्ठभूमि : अवैध ताड़ी की बड़ी खेप बरामद

दिनांक 1 अप्रैल 2025 को थाना तुमला पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम कुचमुंडा निवासी श्रवण बेहरा अपने घर के पास भारी मात्रा में ताड़ी (मादक द्रव्य) अवैध रूप से बिक्री हेतु रखे हुए है। सूचना पर तत्काल कार्यवाही करते हुए प्रधान आरक्षक फ्रांसिस बेक हमराह आरक्षक शिवकुमार महतो, महिला आरक्षक सरोजनी खलखो, तथा दो स्वतंत्र गवाह सुरेंद्र साहू और हेमलाल चौहान को साथ लेकर मौके पर पहुंचे।

छापेमारी के दौरान श्रवण बेहरा के कब्जे से तीन प्लास्टिक के जरीकेन में कुल 100 लीटर ताड़ी, गिलास, मग, एक छोटा बाल्टी तथा ₹250 नकद बरामद किए गए। आरोपी से ताड़ी रखने के वैध दस्तावेज मांगे गए, किंतु कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। पुलिस ने मौके पर ही देहाती नालसी, तलाशी पंचनामा, बरामदगी पंचनामा आदि तैयार कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

विवेचना और अभियोजन

प्रकरण की विवेचना के दौरान आबकारी विभाग को परीक्षण हेतु नमूना भेजा गया, जिसमें पुष्टि हुई कि जब्त तरल पदार्थ ताड़ी युक्त शराब थी।
अभियोजन की ओर से ए.डी.पी.ओ. संजय विश्वकर्मा ने तर्क दिया कि आरोपी ने भारी मात्रा में मादक द्रव्य रखकर उसे बेचने की मंशा प्रदर्शित की है।

बचाव पक्ष की दलीलें और अदालत की दृष्टि

अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता श्री सतीश शर्मा ने यह तर्क दिया कि पुलिस ने झूठा प्रकरण बनाकर श्रवण बेहरा को फंसाया है तथा स्वतंत्र गवाहों ने भी जप्ती का समर्थन नहीं किया। परंतु न्यायालय ने यह माना कि—

“स्वतंत्र गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने से मात्र पुलिस अधिकारियों के कथन को अस्वीकार नहीं किया जा सकता, जब तक उनके कथनों का खंडन न हुआ हो।”

अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के कई न्यायदृष्टांतों का हवाला देते हुए कहा कि विवेचक एवं हमराह आरक्षकों के कथन सुसंगत, अखंडित और विश्वसनीय हैं। अभियुक्त के पास भारी मात्रा में 100 लीटर ताड़ी का पाया जाना यह स्पष्ट करता है कि वह उसे परिवहन या विक्रय हेतु रखे था।

न्यायालय का निर्णय

सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए अदालत ने कहा —

“अभियोजन यह सिद्ध करने में सफल रहा है कि अभियुक्त ने छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(घ) एवं 34(2) के अंतर्गत अपराध किया है। अभियुक्त के विरुद्ध आरोप संदेह से परे प्रमाणित हैं।”

अतः न्यायालय ने निम्न दंडादेश सुनाया —

धाराकारावासअर्थदंडव्यतिक्रम की दशा में
34(1)(घ)1 वर्ष कठोर₹10,0001 माह कठोर कारावास
34(2)1 वर्ष कठोर₹25,0001 माह कठोर कारावास

दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, और अर्थदंड की राशि ₹35,000 शासन को जमा की जाएगी।

न्यायालय का संदेश

अपने निर्णय में न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री नरेंद्र कुमार तेंदुलकर ने कहा कि —

“अवैध मादक पदार्थों का उत्पादन, परिवहन और विक्रय समाज के नैतिक ताने-बाने को कमजोर करता है। ऐसे अपराधों पर कठोर दंड ही सामाजिक चेतना और कानून के प्रति सम्मान को बनाए रख सकता है।”

समापन टिप्पणी

इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया है कि छत्तीसगढ़ न्यायपालिका अवैध शराब और मादक पदार्थों के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाए हुए है। ग्रामीण अंचलों में ताड़ी और महुआ शराब की अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने हेतु यह फैसला मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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