बस्तर की धरती से उठेगा अगला ओलंपिक सितारा? जसवंत क्लॉडियस की कलम का बड़ा संदेश—प्रशिक्षण, संसाधन और जवाबदेही से ही बदलेगी छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की तकदीर

बस्तर की धरती से उठेगा अगला ओलंपिक सितारा? जसवंत क्लॉडियस की कलम का बड़ा संदेश—प्रशिक्षण, संसाधन और जवाबदेही से ही बदलेगी छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की तकदीर

प्रशिक्षण से तस्वीर बदल सकते हैं छत्तीसगढ़िया : खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आगे आये सचिन तेंदुलकर

आलेख ..जसवंत क्लॉडियस,वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टी वी कमेंटेटर, रायपुर. छ ग

रायपुर : अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाड़ियों के प्रदर्शन का अध्ययन किया गया उसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश के गांव- गांव तक खेलकूद में आम जनता विशेषकर 8 से 19 वर्ष तक के खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर प्रयास आरंभ हो गये हैं। खेलो इंडिया नामक महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत अत्याधुनिक खेल मैदान बनाये जा रहे हैं। साथ ही खेल सामग्री, खेल पोशाक, उच्च प्रशिक्षित कोच, उचित भोजन, खेल अकादमी उपलब्ध कराया जा रहा है। व्यायाम और योग के महत्व को और प्रतिबंधित दवा के प्रयोग से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जा रही है।

भारत के खेल मंत्री मनसुख मांडविया और भारतीय खेल प्राधिकरण (सांईँ) के अधिकारियों द्वारा खेलो भारत नीति 2025 का क्रियान्वयन पूरी तन्मयता से की जा रही है। इस बीच हमारे देश के प्रमुख सावर्जनिक क्षेत्र के संस्थानों,निजी व्यापार संस्थानों, उद्योगपतियों, खिलाड़ियों आदि के द्वारा देश के सुदुर, बीहड़ वन, पहाड़ियों वाले क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को परखकर उन्हें उचित प्रशिक्षण, उनके देखभाल का कार्य किया जा रहा है। इस दिशा में छत्तीसगढ़ में भी भारत रत्न सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी आगे आ रहे हैं।

24 अप्रैल को अपने जन्मदिन के अवसर पर महान क्रिकेटर सचिन ने अपनी संस्था सचिन फाउंडेशन तथा सहयोगी संस्था मानदेशी फाउंडेशन के साथ बस्तर के बीजापुर जिले में खेल गतिविधियों को आगे बढ़ाने का निश्चय किया है। जंगलों में बसे बस्तर के होनहार बच्चों, किशोरों में खेलकूद के प्रति दिलचस्पी पैदा करने के लिए सचिन फाउंडेशन और मानदेशी फाउंडेशन ने बीजापुर के गीदम ब्लाक के छिंदनार, कासोली, कोरलापाल, हितामेटा, गुमड़ा, कारली, बांगापाल में सीमित संसाधनों में बहुउद्देशीय खेल मैदान बनाने का निर्णय लिया है। इस तरह करीब 25 से अधिक शालाओं और आश्रमों में खेल मैदान, प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में विकसित किया जा रहा है। मानदेशी फाउंडेशन द्वारा अब तक 15 शिक्षकों को मुंबई में इन बच्चों को सिखाने ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

सवाल अब यह है कि स्थानीय स्तर पर सचिन फाउंडेशन और मानदेशी फाउंडेशन द्वारा की जा रही है गतिविधि की देखरेख व संचालन कौन कर रहा है?

छत्तीसगढ़ सरकार को तथा छत्तीसगढ़ के खेल विभाग को उपरोक्त दोनों फाउंडेशन के कर्ताधर्ता कितनी पूछ परख कर रहे हैं। यह प्रशन इसलिए उठ खड़ा हुआ है कि कार्यक्रम तय होने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दोनों फाउंडेशन के इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। बीजापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में शासन को सहयोग देना खेल के भविष्य के लिए अच्छा है। बीजापुर कहें या संपूर्ण बस्तर जिसे कांकेर, नारायणपुर का क्षेत्र मानतेहैं यहां पर विभिन्न खेलकूद में प्रतिभागियों की कोई कमी नहीं है।

2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के आयोजन की कोशिश जारी है। उसमें एथलेटिक्स में महिला पुरूष 20 किलोमीटर पैदल चाल,10000 मीटर दौड़, मेराथन,जिमानस्टिक्स (नारायणपुर के जो खिलाड़ी मलखब करते हैं उन्हें आसानी से सिखाया जा सकताहै। केनोइंग डोंगी में रोज नदी पार करने वाले नाविकों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है। सायकलिंग बस्तर के ऐसे युवक-युवती जो प्रतिदिन 20 किलोमीटर तक सायकल चलाकर स्कूल जाते हैं या बाजार करते हैं। तैराकी जो बच्चे प्रतिदिन तालाब में तैरते हैं या नदी पार करके स्कूल या बाजार जाते हैं। तीरंदाजी आदि कुछ ऐसे खेल हैं जिन पर इच्छुक व प्रतिभाशाली बस्तर क्षेत्र के खिलाड़ियों को चुना जाए. फिर प्रशिक्षण देने से इसका दूरगामी परिणाम ये होगा कि छत्तीसगढ़िया भारत की तरफ से खेलते हुए ओलंपिक में भी पदक जीत सकते हैं।

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