जशपुर, 14 सितंबर 2025 : आदिम जाति कल्याण विभाग कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़, जिला शाखा-जशपुर (पंजीयन क्रमांक-30183) की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल रविवार को छठवें दिन भी जारी रही। छात्रावास एवं आश्रमों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 8 सितंबर से हड़ताल पर हैं, जिसके चलते व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
संघ के जिलाध्यक्ष रामधन साय ने जानकारी दी कि विभागीय लापरवाही और शासन की उदासीनता से मजबूर होकर कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि 06 मार्च 2025 को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन आज तक कोई पहल नहीं की गई। इस उपेक्षा से कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है।
हड़तालरत कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि हड़ताल के दौरान किसी कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी या अप्रिय घटना घटती है तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
कर्मचारियों की प्रमुख पांच मांगें
- विभागीय छात्रावास / आश्रमों में कार्यरत कलेक्टर दर (संविदा) भृत्य, दैनिक मजदूरी दर कर्मी, पूर्णकालिक व अंशकालिक स्वीपर तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को आकस्मिक निधि के रिक्त पदों पर समायोजित कर तीन वर्ष सेवा पूर्ण होने पर नियमित वेतनमान का लाभ दिया जाए।
- मौखिक आदेश से कार्यरत दैनिक मजदूरी दर कर्मचारियों को कार्यानुभव के आधार पर कलेक्टर दर पर नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाए।
- नियमित भृत्य कर्मचारियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय समय वेतनमान का लाभ शीघ्र दिया जाए।
- हायर सेकेण्डरी उत्तीर्ण नियमित भृत्यों को 100 से 500 सीटर छात्रावास/आश्रमों में सहायक ग्रेड-03 के पद पर पदोन्नति दी जाए तथा सहायक अधीक्षक के पद सृजित किए जाएं।
- छात्रावास/आश्रमों में दैनिक मजदूरी दर कर्मचारियों की भर्ती को पूर्णतः बंद किया जाए।
हड़ताल के चलते छात्रावासों और आश्रमों की व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। विद्यार्थियों को भोजन, सफाई और अन्य आवश्यक सेवाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने शासन से तुरंत हस्तक्षेप कर मांगों का समाधान निकालने की अपील की है।
जिलाध्यक्ष रामधन साय ने दोहराया कि यह आंदोलन कर्मचारियों के सम्मान और हक की लड़ाई है तथा जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, हड़ताल जारी रहेगी।

