कुनकुरी, 10 जुलाई 2025 : जिला जशपुर के ग्राम डोभ में हुए पारिवारिक विवाद ने एक हंसते-खेलते घर को तबाह कर दिया। अपने ही बड़े भाई की नृशंस हत्या करने वाले अभियुक्त सुरजन राम (45 वर्ष) को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और ₹1000 के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में उसे छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
क्या है मामला?
घटना 17 सितंबर 2022 की रात करीब 9 बजे की है। मृतक समरू राम और उसका छोटा भाई सुरजन राम शराब सेवन के बाद घर लौटे थे। पुराने घर और जमीन के बंटवारे को लेकर दोनों भाइयों में विवाद हुआ। मृतक की पुत्री सबरी बाई ने बताया कि जब वह शोर सुनकर बाहर निकली, तो देखा कि उसका चाचा सुरजन राम ने घर से लोहे की टांगी (कुल्हाड़ी) लाकर उसके पिता के चेहरे और सिर पर वार कर दिया। खून से लथपथ समरू वहीं गिर पड़ा और कुछ ही घंटों में उसकी मृत्यु हो गई।
घटना की सूचना थाने को दी गई, जिसके आधार पर थाना दुलदुला में अपराध क्रमांक 81/2022 के तहत धारा 302 भादंसं के अंतर्गत मामला दर्ज कर विवेचना की गई। अभियुक्त को 24 नवम्बर 2022 से न्यायिक हिरासत में रखा गया था।
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें
सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए अभियुक्त को कड़ी सजा दिए जाने की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्री एस. अहमद ने यह दलील दी कि यह अभियुक्त का पहला अपराध है और उसने पहले कभी कोई आपराधिक कृत्य नहीं किया है। उन्होंने अभियुक्त की उम्र (45 वर्ष) और न्यायिक हिरासत में बिताए गए समय का हवाला देते हुए उदारता बरतने की अपील की।
कोर्ट का निष्कर्ष
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह हत्या मात्र किसी तात्कालिक आवेश का परिणाम नहीं थी, बल्कि जानबूझकर टांगी से सिर पर एक से अधिक बार वार करना यह दर्शाता है कि हत्या करने का पूरा इरादा था। न्यायालय ने यह भी कहा कि मृतक की पुत्री ने घायल पिता को 108 पर कॉल करने या किसी से मदद मांगने का प्रयास नहीं किया, लेकिन इससे अभियुक्त की आपराधिक मंशा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए उदारता का कोई स्थान न रखते हुए उम्रकैद की सजा दी।
पीड़िता को मुआवजा
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मृतक की पुत्री सबरी बाई को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत न्यायोचित आर्थिक सहायता दिलाई जाए। इसके लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जशपुर को भेजी गई है।

