कुनकुरी, 12 जुलाई 2025 | जहां पूरा देश शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात कर रहा है, वहीं कुनकुरी विकासखंड के देवबोरा गांव की प्राथमिक शाला आज भी संसाधनों और शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रही है। विद्यालय में कक्षा पहली से पांचवीं तक कुल 21 विद्यार्थी पढ़ते हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए केवल एक शिक्षिका – प्रधान पाठिका श्रीमती उर्सीला मिंज ही मौजूद हैं। बाकी सब केवल कागजों पर दर्ज हैं।
विद्यालय में दूसरी शिक्षक की नियुक्ति जरूर है – श्री मनोज सिंह, लेकिन वे पिछले शिक्षा सत्र से ही मनोरा विकासखंड में मंडल संयोजक के अतिरिक्त प्रभार पर चले गए हैं। तब से आज तक श्रीमती उर्सीला मिंज ही अकेले सभी कक्षाओं की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यही नहीं, सभी पाँचों कक्षाओं के बच्चों को एक ही कक्षा-कक्ष में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, क्योंकि न शिक्षक हैं, न पर्याप्त संसाधन।
माध्यमिक शाला में चार शिक्षक, प्राथमिक में केवल एक
उल्लेखनीय है कि देवबोरा माध्यमिक शाला और प्राथमिक शाला दोनों एक ही परिसर में संचालित हैं। माध्यमिक शाला में मात्र तीन कक्षाओं के लिए चार शिक्षक पदस्थ हैं, वहीं प्राथमिक शाला में एकमात्र प्रधान पाठिका ही पांचों कक्षाओं को संभाल रही हैं। यह विडंबना दर्शाता है कि प्रशासनिक प्राथमिकता किस ओर झुकी हुई है।
संकुल भी प्रभार में, भवन का अब तक नहीं कोई नामोनिशान
देवबोरा विद्यालय को संकुल केंद्र भी घोषित किया गया है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अब तक संकुल प्रभारी की नियुक्ति नहीं हुई है, और न ही संकुल भवन का निर्माण हुआ है। संकुल संचालन भी जोकारी संकुल प्रभारी के भरोसे चल रहा है, जिसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। यह शिक्षा व्यवस्था में “प्रभार संस्कृति” की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
प्रधान पाठिका की ज़ुबानी जमीनी हकीकत
जब संवाददाता ने प्रधान पाठिका श्रीमती उर्सीला मिंज से बात की, तो उन्होंने कहा –”मैं अकेली ही सभी पांच कक्षाओं को पढ़ा रही हूं। सभी बच्चों को एक कमरे में बैठाकर अलग-अलग विषय पढ़ाना किसी युद्ध से कम नहीं है।“

