प्रेम संबंधों में शंका और प्रतिशोध की परिणति बनी युवती की दर्दनाक मौत
कुनकुरी, 30 अप्रैल 2025 : चार साल का प्रेम, दो साल की दूरी और कुछ महीनों की नाराज़गी — और फिर एक जानलेवा वार, जिसने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं और समाज को झकझोर कर रख दिया। कुनकुरी में वर्ष 2022 में घटित बहुचर्चित देवकी चक्रेश की दिल दहला देने वाली हत्या के मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने फैसला सुनाते हुए आरोपी मनोज कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रकरण में की और से पैरवी अपर लोक अभियोजक श्रीमती श्यामा महानंद द्वरा की गई।
- घटना का विवरण: प्रेम और प्रतिशोध का घातक टकराव
22 सितम्बर 2022 की दोपहर। स्थान — ग्राम खारीझरिया के पास श्रीनदी पुलिया। देवकी बाई चक्रेश, एक 23 वर्षीय सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर), रोज़ की तरह अपनी स्कूटी से ड्यूटी पर जा रही थी। तभी रास्ते में आरोपी मनोज कुमार, जो कि उसका पुराना प्रेमी था, ने धारदार टांगी से उस पर जानलेवा हमला किया। सिर पर 3-4 वार कर उसकी मौके पर ही हत्या कर दी गई। घटनास्थल से टांगी, गमछा, स्कूटी और खून से सनी मिट्टी बरामद की गई।
- हत्या का कारण: प्रेम संबंधों में टूटन और धमकी
प्रार्थी राघुराम ने बताया कि देवकी और आरोपी मनोज के बीच लगभग चार वर्षों से प्रेम संबंध थे। किन्तु जब देवकी ने विवाह से इनकार किया, तो आरोपी ने पहले धमकियां दीं और अंततः हत्या जैसा जघन्य कदम उठा लिया। देवकी के भाई व परिजनों ने बताया कि आरोपी ने पूर्व में कई बार विवाह के लिए दबाव बनाया था और न मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी।
- पुलिस जांच और साक्ष्य: तकनीकी और भौतिक सबूतों का जाल
जांच अधिकारी स.उ.नि. रामजी साय पैकरा के नेतृत्व में पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए, जिसमें खून से सनी कुल्हाड़ी, देवकी की स्कूटी, मोबाइल फोन और एक पेनड्राइव शामिल है जिसमें आरोपी घटना के पश्चात मोटरसाइकिल से भागते हुए दिखाई दे रहा है। आरोपी का कपड़ा, जूते और हथियार सभी एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) जांच में दोष सिद्ध करने वाले पाए गए।
- अदालत का फैसला: न्याय और नजीर
प्रकरण की सुनवाई द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन की अदालत में हुई। निर्णय में न्यायाधीश ने कहा कि प्रेमिका को केवल शंका के आधार पर बेरहमी से मार देना न केवल कानूनन जघन्य अपराध है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने के लिए भी एक खतरा है। इस प्रकार की घटनाएं समाज में स्त्रियों की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं।
अदालत ने अभियुक्त मनोज कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और ₹1000 के आर्थिक दंड की सजा सुनाई। साथ ही, दंड न भरने की स्थिति में अतिरिक्त 6 माह का सश्रम कारावास भी निर्धारित किया गया। आरोपी को 22 सितंबर 2022 से निरंतर न्यायिक हिरासत में गिना गया है, जिसकी अवधि को सजा में समायोजित किया गया।

