चुनाव में हार का डर या जनविश्वास की कमी? एसआईआर, ईवीएम और चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवालों से भड़के मुख्यमंत्री साय, बोले—“हंगामे और आरोपों से नहीं, जनता का दिल जीतकर जीते जाते हैं चुनाव”

चुनाव में हार का डर या जनविश्वास की कमी? एसआईआर, ईवीएम और चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवालों से भड़के मुख्यमंत्री साय, बोले—“हंगामे और आरोपों से नहीं, जनता का दिल जीतकर जीते जाते हैं चुनाव”

राज्य स्थापना दिवस जैसे ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश से दूर रहकर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

जनता का विश्वास जीतने के बजाय एसआईआर, ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का परिचायक : मुख्यमंत्री

चुनाव हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, जनता का दिल जीतने से जीते जाते हैं : मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस जैसे ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण अवसर पर प्रदेश से बाहर रहकर एसआईआर, ईवीएम और चुनाव आयोग को लेकर प्रदर्शन करने पर विपक्ष की कड़ी आलोचना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब पूरा छत्तीसगढ़ अपने राज्य की स्थापना का उत्सव मना रहा है, तब विपक्ष के नेता इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश की जनता के बीच रहने के बजाय दिल्ली में संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने में व्यस्त हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव, स्वाभिमान और उत्सव का अवसर है। यह दिन हमारी साझा आकांक्षाओं, संघर्षों और उपलब्धियों का प्रतीक है। लेकिन दुर्भाग्य है कि विपक्ष इस महत्वपूर्ण अवसर पर भी राजनीतिक विरोध और प्रदर्शन को प्राथमिकता दे रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एसआईआर, ईवीएम और चुनाव आयोग जैसे विषयों को लेकर लगातार सवाल खड़े करना और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास का वातावरण बनाना उचित नहीं है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपने कार्यों और नीतियों के आधार पर विश्वास अर्जित करना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है और उसका निर्णय ही अंतिम होता है। यदि जनता किसी राजनीतिक दल को अपना आशीर्वाद नहीं दे रही है, तो उसका समाधान चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने या राजनीतिक हंगामा खड़ा करने में नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर उसकी अपेक्षाओं को समझने और उसका विश्वास जीतने में है।

उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए जनता का दिल जीतना पड़ता है, उसके सुख-दुःख में सहभागी बनना पड़ता है और उसके विकास एवं कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य करना पड़ता है। लोकतंत्र में जनविश्वास का कोई विकल्प नहीं है।

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