सेवा संकल्प अभियान: सेवा की कहानी
धान से बैंगन की ओर बढ़े संतराम, 0.400 हेक्टेयर में मिला 1.07 लाख रुपये का लाभ
उद्यानिकी विभाग की योजना, तकनीकी मार्गदर्शन और अनुदान से मिली नई राह, परंपरागत खेती की तुलना में बढ़ा लाभ
जांजगीर-चांपा : परंपरागत खेती के साथ यदि किसान फसल विविधीकरण को अपनाएं तो कम रकबे में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और अनुदान का लाभ लेकर विकासखण्ड मुख्यालय बलौदा निवासी कृषक संतराम, पिता सुनेराम ने इसका उदाहरण प्रस्तुत किया है। पहले जिस भूमि पर वे धान की खेती करते थे, उसी के 0.400 हेक्टेयर रकबे में बैंगन की खेती कर उन्होंने करीब 1 लाख 7 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया।
कृषक संतराम के पास कुल 1.400 हेक्टेयर भूमि है। पूर्व में वे पूरी भूमि पर धान की खेती करते थे। उद्यानिकी फसलों में रुचि होने पर उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क कर विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि विभागीय मार्गदर्शन और अनुदान से प्रोत्साहित होकर उन्होंने 0.400 हेक्टेयर भूमि में बैंगन की फसल लगाई। इससे उन्हें लगभग 90 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने करीब 1 लाख 62 हजार रुपये में विक्रय किया। इनपुट, श्रमिक एवं अन्य लागतों को घटाने के बाद उन्हें लगभग 1 लाख 7 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। इसी भूमि पर पहले धान की खेती से लगभग 20 क्विंटल उत्पादन होता था, जिसका विक्रय मूल्य करीब 62 हजार रुपये था। सभी लागतों को घटाने के बाद धान से लगभग 32 हजार रुपये का लाभ प्राप्त होता था। इस तरह समान रकबे में बैंगन की खेती से संतराम को धान की तुलना में करीब 75 हजार रुपये अधिक लाभ मिला।
संतराम बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग से मिली योजना की जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन और अनुदान ने उन्हें परंपरागत खेती से आगे बढ़कर नई फसल अपनाने का हौसला दिया। अब वे स्वयं के अनुभव साझा कर आसपास के किसानों को भी उद्यानिकी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने शासन की योजनाओं एवं उद्यानिकी विभाग मार्गदर्शन से खेती में नई संभावनाओं की राह खुल रही है और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है।

