‘कवच’ से संरक्षित हो रही भारतीय रेल की रफ्तार…
दुर्ग से मांढर तक 70 रूट किलोमीटर पर स्टैंडर्ड ‘कवच’ (Non-SIL) कमीशन
बिलासपुर : भारतीय रेल में आधुनिक तकनीक के माध्यम से रेल संरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। दुर्ग से मांढर तक 70 रूट किलोमीटर के सभी रेल मार्गों सहित सरोना–उरकुरा बाईपास लाइन पर स्टैंडर्ड ‘कवच’ (Non-SIL) की कमीशनिंग 03 अक्टूबर 2026 को पूर्ण की गई।
इस परियोजना के अंतर्गत 984 ट्रैकसाइड RFID टैग्स को अतिरिक्त वैकल्पिक व्यवस्था के साथ स्थापित एवं प्रोग्राम किया गया है। RFID प्रणाली का कार्यान्वयन कवच 4.0 के तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप किया गया है।
क्या है ‘कवच’?
‘कवच’ भारतीय रेल के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा विकसित स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। यह ट्रेनों की गति एवं स्थिति से संबंधित जानकारी के आधार पर संरक्षित परिचालन में सहायता करती है तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग के माध्यम से ट्रेन को सुरक्षित रोकने में सक्षम है।
प्रमुख संरक्षा लाभ
‘कवच’ से लैस लोकोमोटिव में निम्न प्रमुख संरक्षा सुविधाएं उपलब्ध होती हैं—
आमने-सामने की संभावित टक्कर से बचाव।
पीछे से होने वाली संभावित टक्कर से बचाव।
ट्रेन के अनियंत्रित रूप से आगे बढ़ने (Roll-away) से सुरक्षा।
स्टैंडस्टिल के दौरान अनावश्यक मूवमेंट से सुरक्षा।
असामान्य रूप से ट्रेन रुकने की स्थिति में ऑनबोर्ड SOS सुरक्षा सुविधा।
रायपुर मंडल में कवच के इस विस्तार से आधुनिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली के दायरे में वृद्धि हुई है, जिससे संरक्षित एवं विश्वसनीय रेल परिचालन को और मजबूती मिलेगी।

