बारिश के बाद टमाटर की फसल पर मंडराया रोग का खतरा! खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी न ठहरने दें, फफूंदजनित रोगों से बचाव के लिए कृषि विभाग ने जारी की जरूरी सलाह

बारिश के बाद टमाटर की फसल पर मंडराया रोग का खतरा! खेत में 24 घंटे से ज्यादा पानी न ठहरने दें, फफूंदजनित रोगों से बचाव के लिए कृषि विभाग ने जारी की जरूरी सलाह

बारिश के बाद टमाटर की फसल को लेकर किसानों को सलाह

जलभराव की स्थिति में तत्काल जल निकासी करें, सड़े फल-पौधों को खेत से हटाएं

जशपुर : जिले में लगातार बारिश के बाद टमाटर की फसल में फूल एवं फल झड़ने, काले धब्बे, फल सड़ने तथा जड़ क्षेत्र में जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। फसल को इन समस्याओं से बचाने के लिए किसानों को खेत में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने के साथ रोगग्रस्त फल एवं पौधों को तत्काल हटाने की सलाह दी गई है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के बाद सबसे पहले खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करना जरूरी है। खेत में 24 घंटे से अधिक पानी जमा न रहने दें। मेड़ अथवा नाली काटकर अतिरिक्त पानी को तत्काल बाहर निकालें। भारी मिट्टी वाले खेतों में पौधों की कतारों के बीच निकासी नाली बनाकर जलभराव की समस्या को कम किया जा सकता है।

सड़े एवं रोगग्रस्त फलों को तत्काल हटाना भी आवश्यक है। काले-भूरे धब्बे वाले तथा सड़े हुए फलों को तोड़कर खेत से बाहर नष्ट करें। जमीन पर गिरे हुए फलों को खेत में नहीं छोड़ना चाहिए। अत्यधिक संक्रमित पौधों को भी खेत से निकालकर नष्ट करने की सलाह दी गई है, ताकि रोग का प्रसार अन्य स्वस्थ पौधों तक न हो।

लगातार बारिश के बाद टमाटर की फसल में फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लेट ब्लाइट, अर्ली ब्लाइट एवं फ्रूट रॉट से बचाव के लिए पंजीकृत अनुशंसा के अनुसार Mancozeb 75 WP @ 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव किया जा सकता है। यदि झुलसा रोग के लक्षण दिखाई दें तो Metalaxyl + Mancozeb @ लगभग 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव की सलाह दी गई है। छिड़काव सुबह या शाम के समय करना चाहिए तथा बारिश की स्थिति में मौसम साफ होने के बाद ही छिड़काव करें। किसी एक ही फफूंदनाशी का लगातार बार-बार प्रयोग करने से भी बचना चाहिए।

काले धब्बे एवं फल सड़न की स्थिति में संक्रमित फलों को हटाने के साथ पंजीकृत फफूंदनाशी का उपयोग कृषि विशेषज्ञों की अनुशंसा के अनुसार किया जा सकता है। रोग की स्थिति के अनुसार Copper oxychloride जैसे कॉपर-आधारित उत्पादों का भी अनुशंसित मात्रा में प्रयोग किया जा सकता है। बारिश के बाद खेत से अतिरिक्त पानी निकल जाने और मिट्टी में पर्याप्त नमी कम होने के बाद पौधों की ताकत एवं वृद्धि वापस लाने के लिए हल्की मात्रा में घुलनशील NPK का पत्तियों पर छिड़काव किया जा सकता है। हालांकि पत्तियों पर अत्यधिक नाइट्रोजन देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे नरम व अधिक शाकीय वृद्धि होने के साथ रोग का जोखिम बढ़ सकता है। सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग मिट्टी अथवा पत्ती परीक्षण तथा फसल की अवस्था के अनुसार करने की सलाह दी गई है।

कृषि विभाग ने किसानों को फिलहाल सिंचाई बंद रखने की सलाह दी है। बारिश के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी होने की स्थिति में ड्रिप सिंचाई बिल्कुल न चलाएं। दोबारा सिंचाई करने से पहले खेत की मिट्टी में नमी की स्थिति की जांच अवश्य करें और आवश्यकता होने पर ही सिंचाई करें।

Jashpur