राहुल गांधी को चुनाव आयोग और देश से भी माफी मांगनी चाहिए : मुख्यमंत्री साय
बार-बार जनता से ठुकरायी जा रही कांग्रेस अब देश के संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने पर आमादा : श्री साय
चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस और विपक्षी इण्डी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाश, भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त
रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि लगभग सौ बार चुनाव हार चुके कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब बौखलाहट में लगातार देशद्रोही आचरण पर उतारू हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस अब देश की तमाम संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने, लगातार झूठ और फरेब के राजनीति कर देश को बदनाम करने में जुटी हुई है। श्री साय रविवार को यहाँ कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आहूत पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त द्वय की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह साबित हो गया है कि आयोग में मतभेद संबंधी कांग्रेस के तमाम दावे न केवल खोखले हैं, बल्कि जान-बूझ कर देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने और भारत की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की राहुल गांधी की सोची-समझी साजिश है। केंद्रीय चुनाव आयोग की संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। यह फिर से साबित हो गया है कि कांग्रेस सिर्फ और सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रही है। उसका झूठ फिर से बेनकाब हो गया है। श्री साय ने कहा कि अपने संयुक्त बयान में आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि एसआईआर समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए। भारत के चुनाव आयोग की दुनियाभर में साख है। उसकी निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक है। कांग्रेस को ऐसी हरकतों से बाज आना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस संबंध में अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट भी कोरी कल्पना के अलावा कुछ नहीं है। समाचार में कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे जिस पत्र का जिक्र है, वह न तो किसी किसी नीतिगत विषय से संबंधित है, न ही एसआईआर से संबंधित। वह सामान्य प्रशासकीय विषय था। वैसे भी चुनाव आयोग सीधे राष्ट्रपति के प्रति जिम्मेदार है, इसलिए कैबिनेट सचिव को किसी नीतिगत मामले पर पत्र लिखने का कोई तुक ही नहीं है, न ही आयुक्तों ने ऐसा कोई पत्र लिखा है। श्री साय ने इस बात पर अफसोस जताया कि जिन विषयों को सुप्रीम कोर्ट तक सही ठहरा चुका है, उसके खिलाफ भी कांग्रेस झूठ फैला रही है। फॉर्म-6 के घोषणापत्र समेत अनेक विषयों पर सर्वोच्च न्यायालय से पहले ही पक्ष में निर्णय आ चुका है, फिर भी कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की नाकाम कोशिश करती रहती है। कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब भी कांग्रेस जनता की अदालत में पराजित होती है, वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ने लगती है। निर्वाचन आयोग के स्पष्ट और कड़े वक्तव्य ने विपक्ष के सभी झूठ और दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. एस. एस. संधू एवं डॉ. विवेक जोशी ने शनिवार को बैठक कर एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि देशभर में संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 को इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया है। इसके बावजूद विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर झूठा कीचड़ उछालने का घिनौना काम कर रहा था। श्री साय ने कहा कि देश की जनता भली-भाँति जानती है कि जितने भी राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जब चुनाव हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर, कभी संवैधानिक संस्थाओं पर तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप लगाते हैं। चुनाव आयोग के इस पूर्ण और सर्वसम्मत बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व को देश और संवैधानिक संस्थाओं से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक आदतन अपराधी की तरह राहुल गांधी लगातार संविधान का निरादर कर रहे हैं। संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रहे हैं। हर बार और हर मंच पर मुंह की खाते हैं, बार-बार माफी मांगते हैं और फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते। इसकी जितनी निंदा की जाय वह कम है। इससे पहले ईवीएम पर सवाल उठाते थे। उसे ‘ब्लैक बॉक्स’ कहते थे लेकिन उसी ईवीएम से जीत कर स्वयं भी सांसद हैं। और अनेक राज्यों में उनकी न केवल सरकार है बल्कि 600 से अधिक विधायक और 99 लोकसभा सदस्य हैं, जो इसी चुनाव प्रक्रिया और इसी ईवीएम से चुन कर आए हैं। जीत जाने पर सरकार भी बनाना, विधायक और सांसद आदि भी बनना, इसी चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेकर राजनीति करना और उसी पर लगातार प्रहार करना।श्री साय ने कहा कि वास्तव में कांग्रेस आज राहुल गांधी की अज्ञानता का शिकार होकर पेड़ की उसी डाली को काट रही है जिस पर वह बैठी है। दु:खद यह है कि जिस थाली में खाती है, उसी में लगातार छेद करने की कांग्रेस करती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राहुल गांधी भारत को बदनाम करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ते हैं। यहाँ तक कि अमेरिका के दौरों में भी राहुल गांधी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहा कि भारत में सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही है और उस पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है। राहुल गांधी उरी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा सीमा पार की गई ऐतिहासिक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को भी ख़ून के दलाली कह देने जैसा शर्मनाक बयान दे दिया था। उनके द्वारा की गई ऐसी हरकतों की एक लंबी सूची है। श्री साय ने कहा कि बात चाहे ईवीएम की हो या कैग की, जाँच एजेंसियों की या फिर कोर्ट की। सबकी अवमानना करने, रंगे हाथ पकड़े जाने पर माफी मांग कर भाग खड़े होने और फिर अगले दिन से वही ऊल-जुलूल कहते रहने को कांग्रेस ने अपनी नीति बना ली है। दशकों तक देश पर एकछत्र शासन करने वाली कांग्रेस की ऐसी दुर्गति वास्तव में शर्मिंदा करती है। श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस को 2018 में इकतरफा और ऐतिहासिक बहुमत मिला था। वह इसी चुनाव प्रक्रिया द्वारा ईवीएम से ही मिला था। वह तब तीनों राज्य जीत गई थी। अभी भी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के 35 विधायक हैं। क्या वे सभी यह मानते हैं कि गलत प्रक्रिया से चुनकर आए हैं? अगर वे यह मानते हैं कि उनके निर्वाचन की प्रक्रिया सही नहीं है तो क्या उन्हें विधायक रहने का नैतिक अधिकार है? कांग्रेस के हर जन प्रतिनिधि को यह सवाल स्वयं से पूछना चाहिए। जीत गए तो प्रक्रिया अच्छी और हारे तो गलत, ऐसा नहीं होता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश और प्रदेश की जनता काफ़ी समझदार है। कांग्रेस की ऐसी हरकतों की वजह से उसका रहा-सहा जनाधार भी समाप्त हो जायेगा। वास्तव में राहुल गांधी के नेतृत्व में करीब सौ चुनाव हार चुकी कांग्रेस ने अब खुद को इतिहास के कूड़ेदान में फेके जाने लायक बना लिया है।
इस दौरान पत्रकार वार्ता में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पांडेय, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, डॉ. नवीन मार्कंडेय, प्रदेश कार्यालय मंत्री अशोक बजाज, प्रदेश मीडिया संयोजक हेमंत पाणिग्रही मौजूद रहे।


