दो गजराजों की मौत ने बदल दी गांव की आस्था की कहानी, अंतिम संस्कार के बाद उसी स्थल पर स्थापित हुई भगवान गणेश की प्रतिमा; जशपुर के शेखरपुर में 17 वर्षों से हाथियों की स्मृति में मनाया जा रहा अनोखा गणेश उत्सव

दो गजराजों की मौत ने बदल दी गांव की आस्था की कहानी, अंतिम संस्कार के बाद उसी स्थल पर स्थापित हुई भगवान गणेश की प्रतिमा; जशपुर के शेखरपुर में 17 वर्षों से हाथियों की स्मृति में मनाया जा रहा अनोखा गणेश उत्सव

शेखरपुर में ‘गज श्रद्धा’ की अनूठी परंपरा, हाथियों की स्मृति में मनाया जा रहा गणेश उत्सव

जशपुर : जशपुर जिले के वन परिक्षेत्र पत्थलगांव के परिसर सरईटोला अंतर्गत ग्राम शेखरपुर में वन्यजीवों के प्रति आस्था और सह-अस्तित्व की एक अनूठी परंपरा आज भी जीवंत है। वर्ष 2009 में विद्युत करंट की चपेट में आने से दो जंगली हाथियों की मृत्यु हो गई थी। ग्रामीणों ने उन्हें भगवान गणेश का प्रतीक मानते हुए हिन्दू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कर उसी स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की थी। तब से प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी पर यहाँ श्रद्धा और उल्लास के साथ गणेश उत्सव का आयोजन किया जाता है।

 वन्यजीव संरक्षण तथा मानव-हाथी सह-अस्तित्व के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से 22 सितम्बर 2026 को वन परिक्षेत्र पत्थलगांव द्वारा ग्राम शेखरपुर में गजरथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। इस दौरान ग्रामीणों को हाथियों के संरक्षण, उनके व्यवहार और मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के उपायों के बारे में जानकारी दी गई। गणेश प्रतिमा विसर्जन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

 वन विभाग ने ग्रामवासियों की इस भावना की सराहना करते हुए कहा कि शेखरपुर की ‘गज श्रद्धा’ की परंपरा प्रकृति, संस्कृति और वन्यजीव संरक्षण के समन्वय का प्रेरणादायी उदाहरण है।

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