पीएनबी बैंक फ्रॉड मामले में तीन और आरोपी गिरफ्तार, ₹30.67 लाख की धोखाधड़ी के मामले में नारायणपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई.
बैंकिंग प्रणाली में फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपये की हेराफेरी करने वाले गिरोह पर पुलिस का शिकंजा.
फर्जी दस्तावेजों और निष्क्रिय खातों के दुरुपयोग से किए गए आर्थिक अपराध का हुआ पर्दाफाश.
आर्थिक अपराध के विरुद्ध लगातार कार्रवाई, आरोपियों को न्यायालय में पेश कर भेजा गया न्यायिक रिमांड पर.
नारायणपुर : नारायणपुर में बैंकिंग सिस्टम को हिला देने वाले पीएनबी बैंक फ्रॉड मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। ₹30.67 लाख की धोखाधड़ी से जुड़े प्रकरण में तीन और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ अब तक कई अहम खुलासे हुए हैं। निष्क्रिय खातों को सक्रिय कर फर्जी केवाईसी और कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से की गई इस सुनियोजित हेराफेरी ने बैंकिंग सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से इस आर्थिक अपराध गिरोह पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है।
पंजाब नेशनल बैंक शाखा नारायणपुर में हुए बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी प्रकरण में नारायणपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला बैंक खातों में फर्जी केवाईसी, कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, निष्क्रिय खातों को पुनः सक्रिय कर अवैध निकासी तथा फर्जी लेन-देन के माध्यम से कुल ₹30,67,500 (तीस लाख सड़सठ हजार पांच सौ रुपये) की धोखाधड़ी से संबंधित है।
प्रकरण में थाना नारायणपुर में अपराध क्रमांक 21/2026 धारा 316(5), 318(4), 338, 336(3), 340(4), 3(5) बी.एन.एस. के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है।
मामले की शुरुआत दिनांक 05 फरवरी 2026 को पंजाब नेशनल बैंक शाखा नारायणपुर के शाखा प्रमुख मनीष कुमार सोनी द्वारा प्रस्तुत लिखित शिकायत एवं बैंक की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर हुई। शिकायत में बताया गया कि बैंक की आंतरिक जांच एवं विशेष ऑडिट के दौरान यह सामने आया कि बैंक में पदस्थ कर्मचारी गोपाल सिंह समुंद ने रिकवरी एजेंट एवं बी.सी. सेंटर संचालकों तिलकराम मंडावी तथा रामकरण साहू के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से बैंक खातों में फर्जीवाड़ा किया।
जांच में पाया गया कि कई वर्षों से निष्क्रिय (डॉरमेंट) पड़े खातों को पहले एक-एक रुपये जमा कर पुनः सक्रिय किया गया तथा बाद में खाताधारकों की जानकारी के बिना आधार लिंकिंग, फर्जी केवाईसी एवं अन्य दस्तावेजों में कूटरचना कर खातों से राशि निकाली गई। ऑडिट में यह भी सामने आया कि दिनांक 17 अगस्त 2024 से लगातार इस प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से 18 खातों से लगभग ₹8,92,000 की फर्जी निकासी की गई।
विवेचना के दौरान यह भी पाया गया कि फर्जी व्यक्तियों को विभिन्न बी.सी. सेंटरों में ले जाकर खातों से धनराशि निकाली गई। जांच के अनुसार तिलकराम मंडावी के बी.सी. सेंटर से ₹6,27,700 तथा रामकरण साहू के बी.सी. सेंटर से ₹15,47,800 की निकासी की गई। इसके अतिरिक्त धनराशि को स्वयं एवं परिचितों के खातों में स्थानांतरित किए जाने के तथ्य भी सामने आए हैं।
अब तक की जांच में बैंक दस्तावेज, खातों से संबंधित अभिलेख, सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य संकलित किए जा चुके हैं तथा संबंधित व्यक्तियों के कथन दर्ज किए गए हैं।
प्रकरण में पूर्व में आरोपी तिलकराम मंडावी एवं गोपाल सिंह समुंद को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।
विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों एवं पूछताछ के आधार पर पुलिस द्वारा दिनांक 23 जून 2026 को आरोपी अशोक जैन पिता सुभाष जैन उम्र 30 वर्ष निवासी बंगलापारा नारायणपुर, सुनैना समुंद पिता लोकेश्वर उम्र 24 वर्ष निवासी नयापारा नारायणपुर तथा रामकरण साहू पिता जुगधर साहू उम्र 33 वर्ष निवासी सिंगोड़ीतराई वार्ड क्रमांक 05 नारायणपुर को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान प्रकरण से संबंधित बैंक पासबुक एवं अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं। आरोपियों को दिनांक 23 जून 2026 को माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
नारायणपुर पुलिस द्वारा मामले में शेष साक्ष्यों का संकलन, गवाहों के कथन एवं वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रकरण में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आर्थिक अपराधों के विरुद्ध नारायणपुर पुलिस की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी तथा दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

