आदिम जाति विकास विभाग की अनुकरणीय पहल: राज्य के 1000 आश्रम-छात्रावासों में विकसित होगी पोषण वाटिकाएं, बच्चों को मिलेंगे ताजे फल एवं सब्जियां
मुख्यमंत्री की पहल पर इस वर्ष लगभग 2000 सीटों की वृद्धि
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने की विभागीय काम-काज की समीक्षा
रायपुर : आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने प्रदेश के छात्रावास-आश्रमों में शैक्षणिक सुविधाओं, पोषण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। प्रमुख सचिव श्री बोरा ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में छात्रावास-आश्रमों में सतत मॉनीटरिंग सुनिश्चित करने तथा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में श्री बोरा ने राज्य के 1000 आश्रम-छात्रावासों में पोषण वाटिकाएं विकसित करने के भी निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि प्रमुख सचिव श्री बोरा के मार्गदर्शन में राज्य के 1000 आश्रम-छात्रावासों में पोषण वाटिकाएं विकसित करने जा रहे हैं, ताकि यहां रहने वाले बच्चों को ताजे फल और सब्जियां मिल सकें। इन वाटिकाओं में आम, अमरूद, जामुन, पपीता, सीताफल और केला जैसे फलदार वृक्षों के साथ भिंडी, टमाटर, करेला, लौकी, आलू, प्याज और मुनगा जैसी सब्जियों के पौधे लगाए जाएंगे। इससे बच्चों को ताजे और पौष्टिक फल-सब्जियां उपलब्ध होंगी तथा परिसर को हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकेगा।
बैठक में प्रमुख सचिव ने कहा कि विभागीय छात्रावास-आश्रम शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए यहां अध्ययनरत बच्चों को सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने 16 जून से शुरू हुए नवीन शैक्षणिक सत्र की समीक्षा करते हुए छात्रावास-आश्रमों में आधार बेस उपस्थिति प्रणाली को सख्ती से लागू करने तथा सत्र प्रारंभ होने से पहले पाठ्य-पुस्तकें, गणवेश और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 3357 छात्रावास-आश्रम संचालित है और यहां 1,98,371 स्वीकृत सीटें हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल और विभागीय मंत्री श्री नेताम के मार्गदर्शन में इस वर्ष लगभग 2000 सीटों की वृद्धि की है।
प्रमुख सचिव ने वर्ष 2025-26 में स्वीकृत छात्रावास-आश्रम भवन निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने जानकारी दी कि कुल 254 स्वीकृत कार्यों में से 191 कार्य निर्माणाधीन हैं तथा 45 कार्य अप्रारंभ हैं। इस प्रकार पूर्ण कार्यों का प्रतिशत 27 प्रतिशत रहा। समीक्षा के दौरान जिलावार प्रगति दर्ज करने, शीर्ष और न्यूनतम प्रदर्शन वाले जिलों की पहचान करने तथा सभी परियोजनाओं के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार कर 31 जुलाई तक अधिकतम कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य सचिव के टी.एल. में लंबित प्रकरणों, वित्त विभाग में लंबित मामलों, संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के स्वीकृत कार्यों की प्रगति और 2026-27 की प्रस्तावित कार्य योजना की भी समीक्षा की गई।
बैठक में आयुक्त श्री डी.राहुल वेंकट, संचालक, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, प्रबंध संचालक, अत्यावसायी सहकारी वित एवं विकास निगम श्री जगदीश कुमार सोनकर, संयुक्त सचिव श्री बी.के.राजपूत एवं श्री अनुपम त्रिवेदी, अपर संचालक श्री संजय गौड़, वित्तीय सलाहकार श्री नीरज मिश्रा, उपायुक्त श्री एल.आर.कुर्रे, श्री विश्वनाथ रेडडी, श्रीमती मेनका चंद्राकर, कार्यपालन अभियंता श्री त्रिदीप चक्रवर्ती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

