वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का ओलंपिक पर गहन विश्लेषण: प्राचीन ग्रीस से आधुनिक विश्व खेलों तक का प्रेरक सफर

वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का ओलंपिक पर गहन विश्लेषण: प्राचीन ग्रीस से आधुनिक विश्व खेलों तक का प्रेरक सफर

23 जून : अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस- खेल को जीवन का अंग बनाना है

विश्व में बढ़ाना है उत्कृष्टता, मित्रता, सम्मान का संदेश

आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर.रायपुर.छ ग

रायपुर : खेलकूद के इतिहास पर नजर डालने से स्पष्ट हो जाता है कि प्राचीन ओलंपिक खेलों की शुरुआत ईसा पूर्व 776 में प्राचीन ग्रीस (यूनान) के ओलंपिया शहर में हुई। ये खेल यूनानी देवताओं के पिता गॉड ज्यूस के सम्मान में प्रत्येक चार वर्ष में सम्पन्न होते थे। करीब 1100 वर्षों तक इन खेलों के आयोजन के पश्चात 393 ईस्वी में रोम के सम्राट थियोडोसियस प्रथम ने इन खेलों को मूर्तिपूजा से जुड़ा मानकर इन खेलों के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया। सच्चाई तो यह है कि मनुष्य के जीवन में खेलकूद की महत्ता कमी कम नहीं हुई। ईस्वी सन. 393 के पश्चात् 16वीं सदी तक खेलकूद गतिविधियों की व्यापक जानकारी नहीं है। इसके कई कारण हैं जैसे विभिन्न देशों के राजाओं, शासकों के बीच आपसी मनमुटाव होना .अपने-अपने राज्य को बचाने या उसकी सीमा के विस्तार के लिए छोटे-छोटे युद्ध में व्यस्त रहना। इनके अलावा 15 वीं सदी में जर्मनी के जोहान्स गुटेनबर्ग द्वारा 1439 में आधुनिक प्रिंटिंग प्रेस का अविष्कार होना। मशीनीकृत छपाई की इस तकनीक ने ज्ञान और सूचना प्रसार में पूरी दुनिया में एक क्रांति ला दी। इसी वजह से खेलकूद के इतिहास की कुछ जानकारी उपलब्ध है, जिसके अनुसार लोक खेल किस तरह वैश्विक हुए, खेल और खिलाड़ी व्यावसायिकता की ओर कैसे व क्यों बढ़े और खेल नियमों में किस तरह परिवर्तन हुए ?इसकी जानकारी 17वीं सदी में लिखित प्रकाशित, दस्तावेजों के अध्ययन से मिलती है.उपलब्ध साहित्य से स्पष्ट हो गया कि 17वीं सदी के पहले खेल प्रतियोगिताएं बिना किसी कड़े नियम या संख्या के खेले जाते थे। इसके बाद खेल मुकाबले का स्वरूप तेजी से बदलते चला गया। 17वीं से 18वीं सदी खेलों का संस्थागतकरण और नियम निर्माण का हुआ। वस्तुत: इसी अवधि के दौरान खेलकूद को केवल मनोरंजन से ना जोड़कर शारीरिक स्वस्थता तथा मुकाबले के रूप में स्वीकार किया गया। 18वीं सदी में क्रिकेट गांवों से निकलकर धनवान और शिक्षित वर्ग के बीच प्रतिस्पर्धा का मुख्य आधार बना। 1599 में लान टेनिस के पूर्व रियल टेनिस के नियम का प्रकाशन हुआ। इससे 17वीं सदी में यूरोप के राजघरानों में खेलकूद के मुकाबले बढ़े। ब्रिटेन में आधुनिक घुड़दौड़ की शुरुआत हुई और स्काटलैंड में 1744 में गोल्फ के पहले लिखित नियम बनाये गए। इसी दौरान दुनिया में विभिन्न देशों के राष्ट्रीय खेल संघों का गठन आरंभ हुआ। इंग्लैंड के पब्लिक स्कूल में खेलों को पढ़ाई के साथ अनिवार्य घोषित किया गया। आज की तरह खेल एसोसिएशन के गठन की परंपरा में खेल इतिहास में सबसे पहले फुटबाल एसोसिएशन का गठन 1863 में इंग्लैंड में किए जाने की जानकारी है ,जिसने खेल को विश्वव्यापी स्वरूप प्रदान करने में मदद की। इस क्रम में आज जैसा अंतरराष्ट्रीय मैच के आयोजन की शुरुआत सबसे पहले 1844 में यूएसए विरुद्ध कनाड़ा के बीच क्रिकेट मुकाबला से हुआ। इस तरह प्राचीन ओलंपिक खेलों के 393 ईस्वी में समाप्त होने के बाद विभिन्न खेलों के लिए मैच की शुरुआत 19वीं सदी में हुई। इस दौरान इन खेलों को प्राचीन ओलंपिक (ईसा पूर्व 776 से ईस्वी सन 393) की तरह फिर से आयोजित करने के लिए यूरोप के प्रबुद्ध खेलप्रेमियों में विचार विमर्श होने लगा। आपसी युद्ध व तनाव से दूर होकर मानव जाति को खेल के माध्यम से दुनिया को एक ही डोर में बांधकर आपसी प्रेम, एकता, स्वस्थ शरीर के संदेश को फैलाने के लिए 19वीं सदी में कई प्रयास हुए। सबसे पहले यूनान के इंवांगेलिस जैवास ने 1859 में एथेंस में जैपस ओलंपिया नाम के खेलों की शुरुआत की। वास्तव में यह प्राचीन ओलंपिक परंपरा को आधुनिक युग में लाने की पहला प्रयास था। इसके बाद 1860 में एक अंग्रेज .चिकित्सक विलियम पेनी ब्रूक्स ने वेनलाक ओलंपियन गेम्स की स्थापना की। ब्रूक्स की कोशिश से प्रभावित होकर फ्रांस के शिक्षाविद बैरन पियरे डी कूबर्टिन अपने साथ ग्रीक व्यापारी इंवांगेलिस जैपास के साथ मिलकर 23 जून 1894 को पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की स्थापना की। परिणाम स्वरूप 1896 में यूनान के एथेंस में पहले आधुनिक ओलंपिक खेलों का आयोजन 6 अप्रैल से 15 अप्रैल 1896 तक संभव हुआ। इसलिए फ्रांस के बैरन प्रियरे डी कूबर्टिन को आधुनिक ओलंपिक खेलों का जन्मादाता माना जाता है। 23 जून 1948 से ओलंपिक दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य खेलों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना ओलंपिक मूल्यों यथा उत्कृष्टता, मित्रता और सम्मान को संदेश को फैलाना है। अत: इस दिन ओलंपिक दिवस दौड़, खेल प्रदर्शिनिया, सेमीनार व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयेजन देशभर के ओलंपिक संघों द्वारा किया जाता है।

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