नगर पंचायत कार्यालय से महज 1 किलोमीटर दूर खुलेआम डंप हो रहा शहर का कचरा
SLRM सेंटर की योजना बनी सफेद हाथी, योजना की आड़ में लाखों रुपये महीने का भ्रस्टाचार
कुनकुरी : शासन-प्रशासन की नाक के नीचे स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती हैं, इसका जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण देखना हो तो नगर पंचायत कुनकुरी का रुख कीजिए। यहाँ स्वच्छता के नाम पर हर महीने लाखों रुपये के सरकारी बजट की बंदरबांट तो हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पूरा नगर पंचायत प्रशासन घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के दलदल में धंसा हुआ है। घर-घर से कचरा इकट्ठा करने का ढोल पीटने वाले इस निकाय के सफाई वाहन नियमों को ताक पर रखकर नगर की सीमा पर, नेशनल हाईवे (NH) के किनारे खुलेआम कचरे का पहाड़ खड़ा कर रहे हैं। यह डंपिंग यार्ड किसी सुनसान इलाके में नहीं, बल्कि नगर पंचायत कार्यालय से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर है, जो अफसरों की अंधाधुंध अनदेखी या फिर उनके मूक संरक्षण की गवाही दे रहा है।
नियमों को ठेंगा: SLRM सेंटर के बजाय NH किनारे फेंक रहे कचरा
नियमों के मुताबिक, डोर-टू-डोर और अन्य माध्यमों से संकलित किए गए गीले और सूखे कचरे को सीधे सॉलिड एंड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट (SLRM) सेंटर ले जाना अनिवार्य है, ताकि वहां इसका वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से निपटान (Segregation) किया जा सके। लेकिन कुनकुरी नगर पंचायत के हुक्मरानों ने इस पूरी व्यवस्था को ठेंगा दिखा दिया है। एसएलआरएम सेंटर को केवल सफेद हाथी बनाकर छोड़ दिया गया है और सरकारी कचरा वाहनों में डीजल फूंककर तथा इलेक्ट्रिक वाहनों से नगर के कचरे को राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अवैध रूप से फेंका जा रहा है। हाईवे के किनारे इस तरह खुले में गीला और सूखा कचरा एक साथ डंप किए जाने से पूरे इलाके में असहनीय सड़ांध और बदबू फैल चुकी है। नेशनल हाईवे से गुजरने वाले राहगीरों का वहां से सांस लेना तक दूभर हो चुका है, और आने वाले मानसून के सीजन में यह लापरवाही किसी बड़ी महामारी या संक्रामक बीमारी के विस्फोट का कारण बन सकती है।
कार्यालय से महज 1 किमी दूर ‘लापरवाही का पहाड़’
इस प्रशासनिक कुप्रबंधन ने न केवल पर्यावरण को खतरे में डाला है, बल्कि यह बेजुबान मवेशियों के लिए भी मौत का कुआं साबित हो रहा है। इस अवैध डंपिंग साइट पर भारी मात्रा में प्रतिबंधित सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और पॉलीथिन बिखरा पड़ा है, जिसे हाईवे पर घूमने वाले आवारा मवेशी भूख के मारे खा रहे हैं, जिससे उनकी तड़प-तड़प कर मौत होने का अंदेशा बढ़ गया है। इसके अलावा, नेशनल हाईवे के किनारे इस तरह कचरा फेंकना नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) के नियमों का उल्लंघन तो है ही, साथ ही यह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पर्यावरण संरक्षण संबंधी कड़े दिशा-निर्देशों का भी सरेआम मखौल है। यह सीधे तौर पर एक आपराधिक लापरवाही है, जहां जिम्मेदार अधिकारी जनता के स्वास्थ्य और टैक्स के पैसे से खिलवाड़ कर रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि जब कार्यालय से महज 1 किलोमीटर दूर यह अवैध काम महिनों से चल रहा है, तो मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) और स्वच्छता निरीक्षक की नजरें इस पर क्यों नहीं पड़ीं? क्या इस पूरे खेल में किसी बड़े भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश की जा रही है? इस पूरे घालमेल की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और जनता की जान जोखिम में डालने वाले दोषी अधिकारियों पर न केवल विभागीय कार्रवाई हो, बल्कि उन पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि कुनकुरी को इस प्रशासनिक गंदगी से निजात मिल सके।
अगली कड़ी में नगर पंचायत के सफाई घोटाले का एक और सच भी सामने लाया जाएगा !

