नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसानों को मिल रहे बेहतर परिणाम
कम लागत, अधिक दक्षता और बेहतर उत्पादन से बढ़ रहा किसानों का भरोसा
रायपुर : कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग प्रदेश के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इनके प्रयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिल रहा है।
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कंचनपुर के प्रगतिशील किसान श्री राम लखन राजवाड़े ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग से मिले सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि में विभिन्न फसलों की खेती करने वाले श्री राजवाड़े ने बताया कि उन्होंने पत्ता गोभी, धान तथा अन्य फसलों में नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया, जिससे फसलों की वृद्धि और विकास में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए।उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। परिणामस्वरूप फसल को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है। धान की फसल में भी बेहतर वृद्धि तथा विकसित बालियों के रूप में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ाने में सहायक हैं। इनके प्रयोग से उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है, जिससे खेती की लागत में कमी आती है। साथ ही पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होने से पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।
राज्य सरकार एवं कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी प्रदान की जा रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के कृषि क्षेत्र में दिखाई दे रहा है।
नैनो उर्वरकों का सफल उपयोग करने वाले किसान अब अन्य कृषकों को भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

