जशपुर (कुनकुरी) : भीषण गर्मी के बीच जशपुर जिले के ग्राम पंचायत रायकेरा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शासकीय बोरवेल पर कथित रूप से ताला जड़ दिए जाने से पूरे गांव में हाहाकार मच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र के बाजार डांड स्थित नल-जल योजना से संचालित सरकारी बोरवेल को सरपंच के पुत्र द्वारा मनमाने तरीके से बंद कर दिया गया, जिससे 50 से 60 परिवारों के सामने पीने के पानी का गहरा संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कुनकुरी को सौंपे गए शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि “बिजली बिल ज्यादा आने” का हवाला देकर बोरवेल को बंद कर दिया गया और उसमें ताला लगा दिया गया। इस फैसले ने गांव की जीवनरेखा माने जाने वाले जलस्रोत को अचानक ठप कर दिया, जिससे पिछले दो दिनों से ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
पानी के लिए दर-दर भटक रहे ग्रामीण
स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं। कई परिवारों को दिनभर लाइन लगाकर पानी भरना पड़ रहा है, जबकि कुछ लोग निजी स्रोतों पर निर्भर हो गए हैं। तेज गर्मी में पानी की यह किल्लत लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रही है।
सरकारी संपत्ति पर निजी नियंत्रण का आरोप
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में साफ कहा है कि संबंधित बोरवेल एक शासकीय संपत्ति है, जिसका उपयोग आमजन के लिए होना चाहिए। ऐसे में इसे व्यक्तिगत निर्णय लेकर बंद करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों का हनन भी है।
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की तुरंत जांच कर बोरवेल को चालू कराया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी गुहार लगाई गई है।
शिकायत पत्र दिनांक 22 अप्रैल 2026 को समस्त ग्रामवासियों के हस्ताक्षर के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि समस्या व्यापक और गंभीर है।
व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस घटना ने पंचायत स्तर पर जवाबदेही और प्रशासनिक निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। भीषण गर्मी के दौर में जब सरकार जल संकट से निपटने के लिए कई योजनाएं चला रही है, ऐसे में एक सरकारी बोरवेल का इस तरह बंद होना सिस्टम की बड़ी विफलता को उजागर करता है।
अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है—क्या जल्द खुलेगा “पानी पर लगा ताला” या यूं ही प्यास से जूझते रहेंगे ग्रामीण?


