जसवंत क्लॉडियस का विश्लेषण: 2026 में 48 टीमों के विस्तार के बावजूद भारत बाहर—भारतीय फुटबॉल के पतन, प्रशासनिक खामियों और खोई लोकप्रियता पर उठाए गंभीर सवाल

जसवंत क्लॉडियस का विश्लेषण: 2026 में 48 टीमों के विस्तार के बावजूद भारत बाहर—भारतीय फुटबॉल के पतन, प्रशासनिक खामियों और खोई लोकप्रियता पर उठाए गंभीर सवाल

क्या हम कभी विश्व कप के लिए कर पाएंगे योग्यता हासिल ?

फीफा विश्वकप 2026, 11 जून से 19 जुलाई 2026 तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में

आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ खेल पत्रकार व टी वी कमेंटेटर. रायपुर

रायपुर : संसार के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबाल के विश्वकप का पहला आयोजन 1930 में हुआ। इस स्पर्धा को फीफा याने फ्रांसिसी भाषा में फेडरेशन इंटरनेशनल डी फुटबाल एसोसिएशन द्वारा 23वीं बार आयोजित की जा रही है। द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण 1942 और 1946 में इस प्रतियोगिता को स्थगित रखा गया था। क्रिकेट में आईपीएल और अमेरिका, इजरायल विरूद्ध ईरान के बीच चल रही युद्ध की वजह से विश्वकप फुटबाल 2026के आयोजन की जानकारी मीडिया द्वारा कम से कम मिल पा रही है।

विश्वकप फुटबाल चैंपियनशिप 1930 से लेकर अब तक कई दौर से गुजरी है। उरूग्व में खेले गये 1930 के पहले विश्वकप में 13 टीमों ने भाग लिया। 1934 से 1978 तक विश्व के 16 टीम,1982 से 1994 तक 24 टीम इसी तरह 1998 से 2022 तक 32 टीम, 1982 से 1994 तक 24 टीम, इसी तरह 1998 से 2022 तक 32 टीम और अब 2026 से 48 टीमों ने मुख्य ड्रा के लिए योग्यता हासिल कर लिया है। 2026 के टूर्नामेंट में चार टीम के 12 ग्रुप बनाये गये हैं। इसमें से सभी ग्रुप से प्रथम दो स्थान प्राप्त करने वाली टीम और ग्रुप में तीसरा स्थान रखने वाली सर्वश्रेष्ठ आठ टीम नॉक आउट दौर में प्रवेश करेगीको रखा गया है। इस तरह नाक आऊट राऊंड में 32 टीम पहुंचेगी। अब स्पर्धा 32 दिनों की अपेक्षा 39 दिवस में समाप्त होगी। विश्वकप फुटबाल 2026 में 64 की जगह 104 मैच खेले जायेंगे। तीन देशों में यह प्रतियोगिता आयोजित की गई है। जिसमें तीन देशों के सोलह शहरों में मैच खेले जाएंगे . इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका में 11,कनाडा में 03 और मैक्सिको में 02 शहरों में मैच खेले जायेंगे। 13 जून 2018 को मास्को में संपन्न 68 वें फीफा कांग्रेस की

बैठक में हुए मतदान के द्वारा संयुक्त राज्य, कनाडा, मैक्सिको को कुल उपस्थित 203 सदस्यों में से 134 मत मिले जबकि मोरोक्को को 65 मत मिले इस प्रकार 2026 के विश्वकप फुटबाल के आयोजन की समस्या कर हल निकल आया। इसमें तीन टीम मेजबान यूरोप से 16 टीम,अफ्रीका से 10, एशिया से 09, दक्षिण अमेरिका से 06.उत्तर मध्य अमेरिका तथा केरेबियन से 03 तथा ओशिआनिया से 01 टीम का चयन हुआ है। 23 वें फीफा विश्वकप के लिए योग्यता पाये हुए 48 देशों में भारत का नाम नहीं होना बेहद निराशाजनक है। भारतीय फुटबाल टीम ने विश्वकप के लिए सिर्फ एक बार 1950 में योग्यता हासिल की थी जिसमें में किसी कारणवश वह भाग लेने में असफल हुई हालांकि एक समय भारतीय फुटबॉल टीम दुनिया की प्रमुख टीम मानी जाती थी वह समय था जब भारतीय फुटबाल टीम 1956 के मेलबोर्न ओलंपिक खेलों में सेमीफायनल तक पहुंचकर चौथे स्थान पर रही थी। इसके अलावा 1962 में भारतीय टीम ने एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक तथा 1970 में कांस्य पदक जीता था।1970 के बाद भारतीय फुटबाल टीम में काफी गिरावट आई यह एक गंभीर चिंता का विषय है। 1890 के बाद से 1990 तक एक अवधि थी जब भारत के गांव- गांव में फुटबाल खेला जाता था क्योंकि इस खेल में कोई ज्यादा खर्च नहीं था। एक गेंद, चार पोल और अधिकतम 100×120 फुट का समतल मैदान गांव- गांव में मिल जाता था। भारत में फुटबाल की लोकप्रियता में कमी के लिए खेल प्रशासकों और खेल संघ के पदाधिकारियों को दोषी जरूर ठहराया जाता है परंतु समाज में इस खेल को लेकर आई उदासीनता भी बहुत बड़ा कारण है।फरवरी 1996 में भारत को विश्व में सबसे अच्छी 94वीं रेकिंग प्राप्त थी परंतु आज अप्रैल 2026 में उसकी 136 वीं रेकिंग है। वैसे मार्च 2015 में भारत की रैंकिंग 173 वीं थी जो अब तक सबसे खराब प्रदर्शन रहा। दूसरी तरफ एक अप्रैल 2026 को फीफा द्वारा जारी पुरुषों की रैंकिंग सूची में भारत 46 एशियाई देशों में 25 वें स्थान है रही बात विश्व कप के मुख्य ड्रॉ में स्थान पाने की तो एशिया महाद्वीप से योग्यता प्राप्त 09 देशों में एशिया में 23 वें नम्बर पर काबिज कुवैत ने अपनी प्रतिभा के डी पर अन्य 14 देशों को पीछे छोड़ते हुए 2026 के विश्वकप के मुख्य ड्रॉ में स्थान बना लिया है। फुटबाल को भारत में पुन: स्थापित करने के लिए सबसे पहले अभिभावकों और बच्चों, किशोरों में इस खेल के प्रति लगाव बढ़ाना होगा। शाला में अध्ययन के साथ- साथ फुटबाल टीम का चयन करके उनके बीच मुकाबला करवाना होगा। इसके अलावा जिस तरह दक्षिण अमेरिका महाद्वीप और यूरोप महाद्वीप में फुटबाल क्लब का गठन करके उन्हें उचित सुविधा दी जाती है वैसे ही मदद, मार्गदर्शन दिलाना होगा। फुटबाल के क्लबों के बीच साल भर प्रतियोगिता का आयोजन करके फुटबाल की लोकप्रियता पुन:बढ़ाई जा सकती है। विश्वकप के कुछ प्रमुख मैच तथा क्वार्टर फायनल से फायनल तक के मैच को विभिन्न शहरों में प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर बड़े स्क्रीन पर दिखाना चाहिए साथ ही साथ यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत के प्रत्येक ग्राम पंचायत भवन में विश्वकप के मुकाबले को ग्रामवासियों को दिखाया जाना चाहिए। फिर खिलाड़ियों का चयन निष्पक्ष हो उन्हें उचित प्रशिक्षण मिले तो फुटबॉल में विश्व स्तर पर भारत के सुनहरे दिन आने से कोई नहीं रोक सकता।

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