तुरंत आरटीजीएस करो’ का फर्जी आदेश बना जाल! एमडी के नाम पर साइबर ठगों ने रची 49 लाख की ठगी की चाल, समय रहते खुली पोल—हेल्पलाइन 1930 पर पहुंचा मामला

तुरंत आरटीजीएस करो’ का फर्जी आदेश बना जाल! एमडी के नाम पर साइबर ठगों ने रची 49 लाख की ठगी की चाल, समय रहते खुली पोल—हेल्पलाइन 1930 पर पहुंचा मामला

एमडी के नाम से फर्जी संदेश भेजकर साइबर ठगी की कोशिश : अधिकारियों की सतर्कता से ठगों के मनसूबे हुए नाकाम

रायपुर : छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला के नाम का दुरुपयोग करते हुए अज्ञात व्यक्तियों व्दारा अधिकारियों को ठगने का प्रयास किया गया। अधिकारियों की सजगता एवं सतर्कता से ठगों के मनसूबे नाकाम हो गए और इसकी शिकायत टोल फ्री नंबर 1930 में कर दी गई है।

ट्रांसमिशन कंपनी के कुछ अधिकारियों को आज दोपहर में एक फर्जी मोबाइल नंबर 99315-25803 से व्हाट्सएप के माध्यम से संदेश भेजे गए, जिनमें स्वयं को एमडी बताते हुए यह कहा गया कि वे किसी महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और तत्काल प्रभाव से एक बड़ी राशि 49 लाख 60 हजार 801 आरटीजीएस के माध्यम से एक निर्दिष्ट खाते में स्थानांतरित की जाए। संदेश में जल्दबाजी का माहौल बनाते हुए अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई करने का दबाव भी बनाया गया, जो कि साइबर ठगों द्वारा अपनाई जाने वाली सामान्य रणनीति मानी जाती है। मैसेज में बैंक का नाम, खाता संख्या, आईएफएसई कोड और लाभार्थी के संस्थान का नाम लिखा था।

कंपनी के सतर्क अधिकारियों ने इस संदिग्ध संदेश को गंभीरता से लेते हुए इसकी पुष्टि करने का प्रयास किया, जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने तत्काल सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी और स्पष्ट निर्देश दिए कि इस प्रकार के किसी भी संदेश पर कोई प्रतिक्रिया न दी जाए तथा किसी भी स्थिति में कोई भी वित्तीय लेन-देन न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक माध्यमों के जरिए भुगतान का निर्देश देना पूरी तरह असंगत और संदिग्ध है।

इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर अपराधी अब बड़े अधिकारियों के नाम और पद का दुरुपयोग कर संगठनों को निशाना बना रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को भ्रमित कर त्वरित आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के मामलों में “मैं मीटिंग में हूं”, “तुरंत भुगतान करें” और “गोपनीय रखें” जैसे शब्दों का प्रयोग कर मानसिक दबाव बनाया जाता है, ताकि व्यक्ति बिना सोचे-समझे निर्णय ले ले।

 प्रबंधन द्वारा सभी कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध संदेश, कॉल या ईमेल से सतर्क रहें, संबंधित नंबर को तुरंत ब्लॉक करें तथा आवश्यक होने पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। साथ ही, यह भी कहा गया है कि किसी भी असामान्य वित्तीय निर्देश की पुष्टि सदैव संबंधित अधिकारी के आधिकारिक संपर्क माध्यम से ही की जाए। यह मामला समय रहते पकड़ में आ जाने से किसी प्रकार की आर्थिक क्षति नहीं हुई, किंतु यह घटना सभी के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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