नये कीर्तिमान मचा देते हैं खिलाड़ी के मन में खलबली
ट्रेलर है यह ! फिल्म आना बाकी है. प्रश्न है कितनी ऊंची बाधा और पार करेंगे अर्मांड डुप्लांटिस ?
रायपुर : मनुष्य की चाहत का कोई अंत नहीं है। वैज्ञानिक के रूप में स मुद्र के सबसे नीचले तल में क्या हेाता है? कौन रहते हैं? जैसे प्रश्न का उत्तर खोजने मनुष्य प्रशात महासागर के सबसे गहरे स्थल में पहुंच चुका है यह करीब 11 किमी गहराई में स्थित है जिसे चैलेंजर डीप के नाम से जाना जाता है। इसी तरह अंतरिक्ष में चंद्रमा तक की दूरी को 384400 किमी को वायु मार्ग से पहुंच चुका है। अर्थात मनुष्य एक जिज्ञासु प्राणी है जो नित नये प्रयोग, नित नई कोशिश करता है।
इस प्रयास में कुछ नये कीर्तिमान, कुछ विश्व रिकॉर्ड दर्ज हो जाते हैं.खेलकूद की दुनिया भी बहुत ही रोचक है। इसे हम सिर्फ एथलेटिक्स खेल की दृष्टि से देखें तो ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में शामिल एथलेटिक्स के करीब 23-23 महिला व पुरुष इवेंट तथा 4&400 रिले मिश्रित युगल के साथ मेराथन रेस वाक रिले मिश्रित टीम इवेंट मिलाकर 48 इवेंट होते हैं। इसी तरह प्रत्येक दो वर्ष की अवधि में विश्व एथलेटिक्स स्पर्धा होती है। अगर आप इन दोनों प्रतियोगिताओं के नतीजे पर नजर डालेंगे तो आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि मनुष्य चाहे स्त्री हो या पुरुष एक प्रतिभागी के रूप में प्रतियोगिताओं के प्रत्येक चरण में कम से कम 50 से 60 प्रतिशत तक इवेंट में परिणामों में बदलाव करते हैं।
एथलेटिक्स में दौडऩा, कूदना, उछलना और फेंकना प्रमुखत: ये चार विधाएं होती है जिनमें हार जीत के लिए एथलीट खेल मैदान एरिना या ट्रेक पर उतरता है। एथलेटिक्स में नये कीर्तिमान के बनने का सीधा अर्थ है प्रतिभागी ने टूर्नामेंट की तैयारी में पहले से अधिक पसीना बहाया है, नई तकनीक का सहारा लिया है और पिछली बार की अपेक्षा इस बार मानसिक रूप से अधिक मजबूत हुए हैं। एथलेटिक्स के एक इवेंट बांसकूद जिसे अंग्रेजी में पोल वाल्ट कहते हे।
इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी वजह स्वीडन के एथलीट डुप्लांटिस हैं जिनके द्वारा 8 फरवरी 2020 से लेकर अब तक पोलवाल्ट के रिकार्ड को 15 बार तोड़कर नया विश्व कीर्तिमान बनाना है । 26 वर्षीय डुप्लांटिस में 5.65 मीटर की ऊंचाई को पार करने या कूद लेने की क्षमता सबसे पहले आई फिर पहली बार 2020 में उन्होंन 6.17 मीटर की ऊंचाई पार करके विश्व रिकार्ड कायम किया फिर लगातार इससे अधिक ऊंचाई पार कर विश्व कीर्तिमान दर्ज करते जा रहे हैं. गत दिनों उन्होंने 6.31 मीटर की बाधा को पार करके सबको आश्चर्यचकित कर दिया। पिछले बार टोक्यो में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में डुप्लांटिस ने कीर्तिमान रचते हुए 6.30 मीटर तक ऊंची बाधा पार की थी।
1896 के आधुनिक ओलंपिक खेलों के पहले संस्करण में यह खेल शामिल था। उस समय इतिहास में 17 सितबर 1892 को दर्ज विश्व कीर्तिमान अमेरिका के वालटर रोडनबाघ के नाम था उन्होंने तब 3.49 मीटर ऊंचाई को पार किया था। 1896 के पहले आधुनिक ओलंपिक में बासकूद में अमेरिका के विलियम डायट 3.30 मीटर की बाधा पार करके विजेता बने। उसके बाद आज करीब 130 वर्षों बाद इस खेल में नियमों में बदलाव, नये तकनीक, अत्याधुनिक खेल सामग्री का प्रयोग करते हुए डुप्लांटिस ने 6.31 मीटर बाधा पार करके पूरी दुनिया का ध्यान अपनी उपलब्धि की ओर आकर्षित किया है। वस्तुत: बांसकूद को लोकप्रिय बनाने में इस इवेंट के नियम में किए गए बदलाव ,1900 के दौरान जंप को चार मीटर, फिर 1970 से जंप को 5 मीटर से अधिक दिया गया।
1980 से 1990 तक सर्जेय बुबका ने 6 मीटर की ऊंचाई तक ले गये और लगातार 14 विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। 1960 से पहले साइबर डलास फिर कार्बन ग्लास बांस पोल के द्वारा कूदने की अनुमति दी गई जिससे इस खेल में रोचकता बढ़ी। डुप्लांटिस ने आने वाली पीढ़ी को बता दिया है कि लक्ष्य निर्धारित करके प्रयासरत रहें। नियमित अभ्यास और उचित खानपान तथा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ऐसी सफलता पाई जा सकती है।


