शंकराचार्य के अपमान का मुद्दा गरमाया: कुनकुरी में कांग्रेस बोली—यह केवल एक संत नहीं, भारत की धार्मिक आत्मा और लोकतंत्र पर प्रहार है

शंकराचार्य के अपमान का मुद्दा गरमाया: कुनकुरी में कांग्रेस बोली—यह केवल एक संत नहीं, भारत की धार्मिक आत्मा और लोकतंत्र पर प्रहार है

कुनकुरी में कांग्रेस का तीखा हमला, प्रयाग घटना को बताया “धर्म और संविधान पर सीधा आघात”

कुनकुरी : प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य के साथ हुए कथित अपमान को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने कुनकुरी में एक अहम प्रेस वार्ता आयोजित की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस जिलाध्यक्ष यू. डी. मिंज, पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज सागर यादव, ब्लॉक अध्यक्ष वाल्टर कुजूर, सेवादल जिलाध्यक्ष इरफान आलम, नगर पंचायत उपाध्यक्ष दीपक केरकेट्टा, महेश त्रिपाठी, मोनू अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे। प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर धर्म, लोकतंत्र और संविधान पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया।

प्रेस को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष यू. डी. मिंज ने कहा कि शंकराचार्य कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं, बल्कि सनातन धर्म की सर्वोच्च बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक हैं। मौनी अमावस्या जैसे पवित्र पर्व पर उन्हें शाही स्नान से रोकना और उनके श्रद्धालुओं पर पुलिस बल का प्रयोग करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि यह घटना भारत की आत्मा को आहत करने वाली है।

पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज सागर यादव सहित कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का खुला उल्लंघन है, जो हर नागरिक को अपने धर्म का पालन, प्रचार और आचरण करने की स्वतंत्रता देता है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या अब धर्म पालन के लिए भी सरकारी अनुमति जरूरी हो गई है? क्या सरकार तय करेगी कि कौन संत शाही स्नान करेगा और कौन नहीं? यदि ऐसा है तो यह धर्म नहीं, बल्कि राज्य द्वारा धर्म पर नियंत्रण का प्रयास है।

प्रेस वार्ता में श्रद्धालुओं पर पुलिस लाठीचार्ज को लेकर भी सरकार को घेरा गया। नेताओं ने कहा कि मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए पहुंचे भक्त न तो हिंसा कर रहे थे और न ही किसी तरह का उपद्रव था, फिर भी उन पर बल प्रयोग क्यों किया गया? कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव के समय “भक्त” शब्द का उपयोग करने वाली सरकार आज उसी भक्ति को अपराध बना रही है। क्या केवल सत्ता समर्थक भक्ति ही सुरक्षित है और स्वतंत्र श्रद्धा अपराध बन चुकी है?

कांग्रेस ने भाजपा पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय संत, साधु और धर्म की बातें की जाती हैं, लेकिन सत्ता में आते ही वही संत अगर सवाल पूछें या स्वतंत्र राय रखें तो उन्हें अपमानित किया जाता है। नेताओं ने कहा कि शंकराचार्य का एकमात्र “अपराध” यह है कि उन्होंने कभी किसी पार्टी के लिए वोट नहीं मांगा और सत्ता से सवाल पूछने का साहस किया।

प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि सनातन परंपरा का मूल विमर्श, शास्त्रार्थ और असहमति है, जबकि आज की सरकार “आदेश आधारित भक्ति” और “नियंत्रित धर्म” को बढ़ावा दे रही है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य सनातन परंपरा की आत्मा हैं और सत्ता को आत्मा नहीं, बल्कि नियंत्रण चाहिए।

अंत में कांग्रेस ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी धर्म को सत्ता का औजार नहीं बनाती, लेकिन किसी भी धर्मगुरु या श्रद्धालु का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेस ने योगी सरकार और केंद्र सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर वह चुप नहीं बैठेगी। नेताओं ने कहा कि यह किसी एक शंकराचार्य का नहीं, बल्कि भारत की धार्मिक आत्मा और लोकतांत्रिक चेतना का अपमान है, और कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से संसद तक लड़ेगी।

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