धर्म नीति से नेतृत्व की नई परिभाषा — आईआईएम रायपुर में दो दिवसीय ‘युक्ति 3.0’ व्यापार सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

धर्म नीति से नेतृत्व की नई परिभाषा — आईआईएम रायपुर में दो दिवसीय ‘युक्ति 3.0’ व्यापार सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

धर्म नीति के माध्यम से नेतृत्व की नई कल्पना: आईआईएम रायपुर प्रस्तुत करता है युक्ति 3.0 व्यापार सम्मेलन

आईआईएम रायपुर ने 10 और 11 जनवरी 2026 को दो दिवसीय व्यापार सम्मेलन ‘युक्ति 3.0’ का आयोजन किया

रायपुर : भारतीय प्रबंध संस्थान, रायपुर ने 10 जनवरी 2026 को अपने युक्ति व्यापार सम्मेलन के तीसरे संस्करण ‘युक्ति 3.0’ का शुभारंभ किया। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “धर्म नीति – व्यवसाय और नेतृत्व में धर्मपूर्ण रणनीति की कला” रखा गया है। युक्ति 3.0 में मुख्य अतिथि के रूप में श्री भरत पंचाल उपस्थित रहे, जो एशिया-प्रशांत और मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए मुख्य जोखिम एवं विनियामक अधिकारी हैं। वे एक प्रतिष्ठित उद्योग नेता हैं, जो व्यवसायों, ग्राहकों और समुदायों को सशक्त बनाने के लिए जाने जाते हैं।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत प्रोफेसर रामकुमार एम., सहायक प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, छात्र कार्य समिति, आईआईएम रायपुर के स्वागत संबोधन से हुई, जिसके साथ उन्होंने सम्मेलन के शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सत्य, न्याय, कर्तव्य और संयम पर आधारित धर्म नीति नैतिक, सुदृढ़ नेतृत्व तथा सतत संस्थागत विकास की आधारशिला है।

आईआईएम रायपुर के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए भारत की उस सभ्यतागत परंपरा पर प्रकाश डाला, जो धर्म में निहित है। उन्होंने कहा कि “लाभ पवित्र होना चाहिए, ऐसा जो दूसरों को हानि न पहुँचाए।” उन्होंने मुख्य अतिथि श्री भरत पंचाल का सम्मान किया और युक्ति को आईआईएम रायपुर का एक प्रमुख मंच बताया, जो उद्योग, शिक्षा और नीति के बीच संवाद को बढ़ावा देता है। उन्होंने संस्थान के शैक्षणिक कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जिनमें प्रमुख प्रबंधन कार्यक्रम, कार्यकारी कार्यक्रम, सार्वजनिक नीति एवं शासन में प्रबंधन कार्यक्रम तथा एचपीसीएल के सहयोग से प्रारंभ किया गया ऊर्जा प्रबंधन में नया प्रबंधन कार्यक्रम शामिल है। उन्होंने बताया कि केवल 16 वर्षों में आईआईएम रायपुर देश के शीर्ष 15 संस्थानों में स्थान बना चुका है। युक्ति 3.0 के संदर्भ में उन्होंने कर्तव्य नीति, भारतीय उत्थान और साम-दाम-दंड-भेद जैसे विषयों के माध्यम से धर्म और नीति के समन्वय पर बल दिया तथा विद्यार्थियों से सक्रिय भागीदारी और गहन चिंतन का आग्रह किया।

अपने मुख्य संबोधन में मुख्य अतिथि श्री भरत पंचाल ने धर्म और धर्म नीति को नेतृत्व के लिए एक साहसिक ढांचा बताया। उन्होंने कहा कि सच्चे नेतृत्व का मूल्यांकन केवल परिणामों से नहीं, बल्कि स्थिरता, विकास और नैतिक निर्णय सुनिश्चित करने की क्षमता से किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक निर्णयों को तेज कर सकती है, पर नैतिक जिम्मेदारी का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने विद्यार्थियों को स्मरण कराया कि नेता अपने निर्णयों के परिणामों के लिए उत्तरदायी होते हैं और कहा कि जो लोग धर्म का पालन करते हैं, अंततः धर्म ही उनकी रक्षा करता है।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न उद्योगों से जुड़े दूरदर्शी, उद्यमी और विचारशील नेता एक मंच पर एकत्र हुए और बदलते व्यावसायिक परिवेश पर परिचर्चाएँ कीं। इन अंतरविषयी पैनल चर्चाओं में विविध दृष्टिकोण सामने आए और नवाचारी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

पहली पैनल चर्चा का विषय “कर्तव्य नीति” था। इसमें श्री एम. नरेंद्र, पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, इंडियन ओवरसीज बैंक; श्री सत्य लंका; श्री हरजीत सिंह खंडूजा; श्री कनिष्क नेगी; तथा सुश्री अर्शिया सिंह ने भाग लिया। इस चर्चा का संचालन आईआईएम रायपुर के प्रोफेसर संजीव पराशर ने किया।

 पैनल सदस्यों ने व्यक्तिगत और व्यावसायिक निर्णयों में धर्म, कर्तव्य और नीति को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अंतरात्मा की आवाज़ सुनने, उद्देश्य पर प्रश्न करने और असुविधाजनक परिस्थितियों में भी नैतिक कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अल्पकालिक लक्ष्यों और दीर्घकालिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने, मूल्य-आधारित निर्णय लेने और संगठनों में विश्वास बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

दूसरी पैनल चर्चा “भारतीय उत्थान” विषय पर केंद्रित रही। इसमें श्री उत्कर्ष घाटे, श्री नितिन मखीजा, श्री स्वदेश बेहरा, सुश्री अनुजा बशीर, श्री हरेश पंजवानी तथा श्री मोहम्मद साद ने भाग लिया। इस चर्चा का संचालन आईआईएम रायपुर के प्रोफेसर सुमीत गुप्ता ने किया।

 वक्ताओं ने बताया कि उत्थान अर्थात सतत विकास का आधार लचीलापन, दूरदृष्टि और सामूहिक कल्याण है। उन्होंने बाजार की अस्थिरता को अवसर में बदलने, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने तथा ऐसे संगठन बनाने पर बल दिया जो केवल लाभ ही नहीं, बल्कि व्यापक प्रभाव भी उत्पन्न करें। उन्होंने कहा कि सच्चा विकास सहानुभूति, सजग नेतृत्व और मूल्यों के पालन से ही संभव है।

सम्मेलन ने आईआईएम रायपुर के विद्यार्थियों को अनेक उपयोगी सीख और महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान किए, जो उन्हें भविष्य में सक्षम और जिम्मेदार नेतृत्व के लिए तैयार करेंगे। युक्ति 3.0 का पहला दिन गहन और विचारोत्तेजक चर्चाओं के साथ संपन्न हुआ। विद्यार्थी अगले दिन आयोजित होने वाली पैनल चर्चाओं और बोर्डरूम अनुकरण अभ्यास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस अभ्यास में प्रतिभागी उच्च प्रबंधन स्तर की भूमिकाएँ निभाते हुए जटिल व्यावसायिक समस्याओं के समाधान और उनके क्रियान्वयन की रणनीति तैयार करेंगे। यह अनुभव उन्हें रणनीतिक सोच, निर्णय क्षमता और प्रभावी नेतृत्व कौशल विकसित करने में सहायक होगा।

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