बजट से पहले आंगनबाड़ी संघ की मांग : 50 साल की सेवा, फिर भी असुरक्षित भविष्य—आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगें बजट में सम्मिलित करने की अपील, जशपुर में सौंपा गया मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन.

बजट से पहले आंगनबाड़ी संघ की मांग : 50 साल की सेवा, फिर भी असुरक्षित भविष्य—आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगें बजट में सम्मिलित करने की अपील, जशपुर में सौंपा गया मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन.

09 जनवरी को पेश होने वाले बजट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं की मांगों को सम्मिलित कर स्वीकृति देने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ पंजी. 409 के पदाधिकारियों ने जशपुर के अपर कलेक्टर प्रदीप साहू को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, वित्त मंत्री ओपी चौधरी और महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नाम ज्ञापन सौंपा है।

संघ की जिला अध्यक्ष श्रीमती कविता यादव के मार्गदर्शन व दिशा निर्देश पर अंजना टोप्पो जिला उपाध्यक्ष एवं परियोजना अध्यक्ष जशपुर, यशोमती बाई जिला संरक्षक,आशा एवं अन्य के द्वारा बुधवार को कलेक्ट्रेड कार्यालय पहुंच कर  अपर कलेक्टर प्रदीप साहू को ज्ञापन सौंपा है। इनके द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार देश में महिला एवं बाल विकास विभाग के अन्तर्गत आइसीडीएस योजना के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन 2 अक्टूबर 1975 से प्रारम्भ हुआ है और आज लगभग 50 वर्ष (स्वर्ण जयंती) पूरा कर रहा है। लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों में पूरे भारत वर्ष में लगभग 27 लाख और छत्तीसगढ़ में 1 लाख से अधिक कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं का जीवन अंधकारमय है। देश और प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के अधीन जो केन्र्द सरकार की अन्य योजना जैसे पंचायती राज के तहत निर्मित, शिक्षा कर्मी, पंचायत कर्मी और जनगणना निर्वाचन जैसे कार्य में लगे मान सेवियों को सरकार निति बनाकर समय-समय में नियमित (शासकीय कर्मचारी) घोषित कर चुकी है, तो 50 वर्ष से कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं के लिये इसी तरह से नीति बनाकर नियमित (शासकीय कर्मचारी) नही किया जाना अत्यन्त दुखद बात हैं। इन पच्चास वर्षो में केन्द्र सरकार से अभी तक कार्यकर्ता को 4500/- रूपये और सहायिका को 2250/- रूपये ही प्रति माह मानदेय अनियमित रूप से मिल रहा है। जिसे किसी भी स्थिति में जीने लायक वेतन नहीं कहा जा सकता। यह सरकार द्वारा बनाये गये श्रम कानून न्यूनतम पारश्रमिक की गारंटी का उलघंन है। मानदेय के अलावा सेवा निवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा के रूप में बुढ़ापा के सहारा के लिये ना कोई पेशन है और ना ही एक मुस्त ग्रेज्युवेटी। बिमार और आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में ना तो चिकित्सा सुविधा और ना ही अवकाश सुविधा है। यदि बीमार है या अपने बेटी-बेटा का हाथ पिला करनी है तो मानदेय कटवाकर ये सब करना पड़ता है। एक तरफ इन सब बुनियादी सुविधा और मौलिक संवैधानिक अधिकारों से वंचित है, दुसरे तरफ चौतरफा काम का बोझ। एक बहुउद्देशीय कार्यकर्ता के रूप में काम लिया जाने का काम शासकीय कर्मियो से ज्यादा जिम्मेदारी के साथ लेना और पारश्रमिक और प्रासंगिक लाभ शून्य, काम में यदि थोड़ा बहुत चूक हुआ तो सीधे सेवा से बर्खास्तगी का दंश झेल रहे हैं।

इन्होंने आगे लिखा है कि हमारी निम्न मांगों की पूर्ति हेतु आगामी विधान सभा बजट सत्र में हमारी मांगों को बजट में सम्मिलित कर मांगों की पूर्ति करने की कृपा करेंगे।

साथ ही केन्द्र सरकार से भी हमारी मांगों की पूर्ति हेतु नरेद्र मोदी प्रधान मंत्री.भारत सरकार को पत्र प्रेषित कर सहयोग प्रदान करने की कृपा करेगे।

1- सेवा निवृत्त होने वाले कार्यकर्ता को 5 लाख सहायिका को 4 लाख एक मुस्त ग्रेज्युवेटी एवं क्रमशः 10,000/- रुपये और 8,000/- रुपये मासिक पेशन एवं समूह बीमा योजना.का लाभ दिया जावे.

2- शासकीय कर्मचारी घोषित किया जावे। शासकीय कर्मचारी घोषित होते तक 26000/- रुपये कार्यकर्ता को और सहायिका को 22100/- रुपये प्रतिमाह मानदेय स्वीकृत किया जावे। (मध्य प्रदेश मे 15000/- रुपये और सहायिका को 8000/- रुपये मानदेय प्राप्त हो रहा है और 1000/- रुपये प्रतिवर्ष जुलाई में वृद्धि का प्रावधान है, यहां भी किया जावे।).

3- रिक्त सुपरवाईजर और कार्यकर्ता के शतप्रतिशत पद पर कार्यकर्ता और सहायिकाओं को वरिष्टता सह योग्यता के आधार पर पदोन्नति दिया जावे।

4- कैस लेस चिकित्सा और पर्याप्त अवकाश सुविधा उपलब्ध कराई जावे।

जिस पर कार्यवाही नहीं एसडीएम से विनम्र अनुरोध है कि उनकी उक्त मांगो पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर पूर्ति करने की कृपा करेंगे।

प्रदेश के एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकायें एवं उनके परिवार के सदस्य आपके हमेशा आभारी रहेंगे।

Jashpur