जशपुर हत्या कांड में सनसनीखेज मोड़ : अधजले शव की पहचान गलत साबित, सीमित खाखा मिला जीवित; वास्तविक मृतक का पता लगाने हेतु राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में गठित की गई टीम, जाँच जारी.

जशपुर हत्या कांड में सनसनीखेज मोड़ : अधजले शव की पहचान गलत साबित, सीमित खाखा मिला जीवित; वास्तविक मृतक का पता लगाने हेतु राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में गठित की गई टीम, जाँच जारी.

सिटी कोतवाली जशपुर को दिनांक 18 अक्टूबर 2025 को सूचना मिली थी कि ग्राम पुरनानगर के तुरीटोंगरी में किसी व्यक्ति का अधजला शव मिला है, जिसके शरीर का अधिकांश हिस्सा जला हुआ है। जिस पर सिटी कोतवाली पुलिस के द्वारा तत्काल घटना-स्थल जाकर देखने पर मिला कि एक गड्ढे में एक युवक के शव को जलाया गया है, जिसके शरीर के चेहरे सहित अधिकांश हिस्सा जल गया था। घटना-स्थल के निरीक्षण व शव के पंचनामा के पश्चात पुलिस के द्वारा, थाने में मर्ग कायम कर जांच विवेचना में लिया गया था। पुलिस के निरीक्षण के दौरान, चूंकि प्रथम दृष्टिया मामला हत्या का प्रतीत होता था, अतः पुलिस के द्वारा शव का डॉक्टर से पीएम भी कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण हत्यात्मक बताने पर थाना सिटी कोतवाली जशपुर में बी.एन.एस. की धारा 103(1) व 238(क) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर जांच विवेचना में लिया गया था।

चूंकि शव अज्ञात था व शरीर का आधे से अधिक हिस्सा जल चुका था, अतः उसकी पहचान कर, आरोपियों की पतासाजी करना, पुलिस के लिए चुनौती बन चुकी थी। पुलिस के द्वारा शव की पहचान हेतु उसके फोटो को आस-पास के थानों/चौकियों में सर्कुलेट किया गया था व क्षेत्र में गुम इंसानों की जानकारी भी ली जा रही थी। साथ ही पुलिस के मुखबिर तंत्र को सक्रिय करते हुए टेक्निकल टीम की भी मदद ली जा रही थी। इसी दौरान पुलिस व टेक्निकल सेल की संयुक्त टीम को पता चला कि थाना सिटी कोतवाली जशपुर क्षेत्रांतर्गत ग्राम सीटोंगा का एक युवक सीमित खाखा कुछ दिनों पूर्व अपने गांव के ही अन्य आरोपियों के साथ झारखंड के हजारीबाग में मजदूरी कर रहा था, उसके साथी सीमित खाखा को हजारीबाग में ही छोड़ कर वापस आ गये थे।

इस घटना में मिले शव का कार्यपालिक मजिस्ट्रेट (नायब तहसीलदार) के समक्ष शव शिनाख्ती की कार्यवाही की गई है। पुलिस के द्वारा फारेंसिक एक्सपर्ट से पूरे घटना का “सीन ऑफ क्राईम” का रिक्रियेशन कराया गया। मृतक के परिजनों द्वारा उक्त शव का पहचान कर उसे सीमित खाखा का ही शव होना स्वीकार किया है। पुलिस के द्वारा आरोपियों का न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने कथन (धारा 183 बी.एन.एस.) के तहत् कराया गया था, जिसमें आरोपियों ने स्वयं बताया कि उन्होनें ही घटना को अंजाम दिया है। पुलिस के द्वारा आरोपियों का कथन न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने कराया है, जिसमें उन्होनें हत्या का अपराध घटित करना स्वीकार किया है, दोनों ही न्यायिक प्रक्रिया पुलिस की अनुपस्थिति में कराई गई थी। जशपुर पुलिस द्वारा इनकी रिहाई हेतु वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।   

सीमित खाखा पिछले दिनों वापस अपने घर सिटोंगा लौटा तत्पश्चात परिजनों द्वारा इसकी सूचना सिटी कोतवाली जशपुर में दिया गया। पूछताछ में सीमित खाखा ने पिछले कुछ माह से हजारीबाग क्षेत्र में काम करना बताया है।

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