अदालत ने पीड़ित पिताम्बर यादव को क्षतिपूर्ति दिलाने का भी आदेश दिया, लोक अभियोजक पुष्पा सिंह ने अदालत में मजबूती से रखा पक्ष
सागर जोशी – संपादक
कुनकुरी : जमीन विवाद में पनपी वैमनस्यता ने एक बार फिर खूनी रूप ले लिया। जशपुर जिले के तुमला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जामटोली में हुए जानलेवा हमले के संवेदनशील प्रकरण में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी रवि यादव (35 वर्ष) को विभिन्न धाराओं में कुल 10 वर्ष का सश्रम कारावास, आर्थिक दंड तथा व्यतिक्रम की सजा से दंडित किया है। यह निर्णय खुले न्यायालय में सुनाया गया।
क्या था मामला?
27 मार्च 2024 की शाम लगभग छह बजे अटल चौक, जामटोली के पास आरोपी रवि यादव ने अपने रिश्तेदार पिताम्बर यादव का रास्ता रोक लिया। ग्रामीणों के अनुसार आरोपी कई दिनों से विवादों को लेकर आक्रोशित था। उसी दिन उसने पिताम्बर के साथ कहासुनी के बाद लोहे की टांगी (कुल्हाड़ी) से उसके “पंजरा” हिस्से पर घातक वार किया। घायल पिताम्बर को पहले लैलूंगा और फिर रायगढ़ रेफर किया गया।
इसी दौरान आरोपी ने उन्मत्त होकर बुलेरो, पिकअप, स्कूटी, मोटरसाइकिल सहित घर की खिड़कियां, दरवाजे और कई सामानों को नुकसान पहुंचाया। मौके पर मौजूद लोगों ने इसकी पुष्टि पुलिस और अदालत में की।
अभियोजन का तर्क
अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने अदालत में ठोस और सुव्यवस्थित तार्किक प्रस्तुति देते हुए बताया कि आरोपी ने न केवल जान से मारने की नीयत से हमला किया, बल्कि प्रतिबंधित धारदार हथियारों का अवैध रूप से उपयोग भी किया। उन्होंने कहा कि यदि पिताम्बर को तत्काल उपचार न मिलता तो उसकी जान जा सकती थी।
सभी गवाह, पंचनामे, चिकित्सकीय रिपोर्ट और बरामद हथियारों के आधार पर अपराध संदेह से परे प्रमाणित हुआ।
अदालत की तगड़ी टिप्पणी
माननीय न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने अपने फैसले में लिखा कि आरोपी ने न सिर्फ रास्ता रोका, बल्कि परिस्थितियाँ ऐसी उत्पन्न की जिनसे हत्या का प्रयास सिद्ध होता है। साथ ही राज्य शासन की अधिसूचना का उल्लंघन कर अवैध हथियार रखने और उसका उपयोग करना भी प्रमाणित हुआ।
अदालत द्वारा दी गई सजा
अदालत ने आरोपी को निम्नानुसार दंडित किया—
| अपराध | सजा | अर्थदंड |
| धारा 341 | 1 माह सादा कारावास | ₹500 |
| धारा 307 | 10 वर्ष सश्रम कारावास | ₹2000 |
| धारा 427 | 1 वर्ष सश्रम कारावास | ₹1000 |
| धारा 27 आयुध अधिनियम | 3 वर्ष सश्रम कारावास | ₹1000 |
सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी।
अभियुक्त पहले ही 5 माह न्यायिक अभिरक्षा में रह चुका है, जिसे धारा 428 के तहत समायोजित किया जाएगा।
पीड़ित को मिलेगा मुआवजा
अदालत ने पीड़ित पिताम्बर यादव की गंभीर चोटों, आर्थिक नुकसान और मानसिक आघात को ध्यान में रखते हुए आदेश दिया कि उसे पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना (धारा 357A दं.प्र.सं. / 396 BNSS) के तहत प्रतिकर उपलब्ध कराया जाए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

