“द्वेषपूर्ण कार्रवाई का शिकार बनाया गया”—निलंबन के खिलाफ करडेगा विद्यालय प्राचार्य गीताप्रसाद मधुकर का बड़ा बयान

“द्वेषपूर्ण कार्रवाई का शिकार बनाया गया”—निलंबन के खिलाफ करडेगा विद्यालय प्राचार्य गीताप्रसाद मधुकर का बड़ा बयान

जशपुर, 22 सितम्बर 2025 जशपुर जिले के दुलदुला से निकल रही है एक ऐसी कहानी, जिसने शिक्षा जगत और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। एक प्राचार्य का कसूर सिर्फ इतना है कि उसने अपने ही विद्यालय के हित में तहसील कार्यालय में चुनाव कार्य के लिए भेजे गए बाबू को वापस बुलाने की मांग कर दी, और नतीजा? उसे भुगतना पड़ा निलंबन का दंश!

जशपुर जिले के विकासखंड दुलदुला अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करडेगा में पदस्थ प्राचार्य गीता प्रसाद मधुकर इन दिनों प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में हैं। हाल ही में जिला प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है। निलंबन का कारण विद्यालय में मिली अनियमितताओं और शिकायतों को बताया गया है, लेकिन प्राचार्य मधुकर इसे पूर्णतः द्वेषपूर्ण और पक्षपातपूर्ण कार्यवाही बता रहे हैं।

प्राचार्य का आरोप है कि तहसील कार्यालय में भेजे गए विद्यालय के सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी विनय कुमार साय को वापस विद्यालय में पदस्थ कराने के लिए उन्होंने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा था। यही मांग उनके अनुसार प्रशासन को नागवार गुजरी और इसके परिणामस्वरूप उन्हें टारगेट बनाकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

कारण बताओ नोटिस और निलंबन की पूरी कहानी

दिनांक 04 सितम्बर 2025 को जिला प्रशासन ने प्राचार्य को कारण बताओ सूचना पत्र (नोटिस) जारी किया, जिसमें उन्हें 03 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया।
प्राचार्य का कहना है कि यह नोटिस उन्हें 05 सितम्बर की शाम 7 बजे के बाद प्राप्त हुआ। ऐसे में 03 दिन का समय स्पष्टीकरण हेतु पर्याप्त नहीं था, जबकि सामान्यतः नियमों में 07 दिन का समय निर्धारित होता है।

फिर भी, उन्होंने समयाभाव में विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया और प्रत्येक बिंदु पर दस्तावेजों सहित सफाई दी। लेकिन प्रशासन ने उनके जवाब को असंतोषजनक मानते हुए निलंबन आदेश जारी कर दिया।

प्राचार्य गीताप्रसाद मधुकर का विस्तृत पक्ष

अपने लिखित उत्तर में प्राचार्य जी.पी. मधुकर ने एक-एक आरोप का खंडन करते हुए निम्न बातें रखीं –

  1. अनुपस्थिति का आरोप झूठा:
    उन्होंने कहा कि वे नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहते हैं। तीन माह की उपस्थिति पंजी और समय सारिणी की छाया प्रति भी संलग्न की गई, जिसमें उनके हस्ताक्षरित उपस्थिति प्रमाण उपलब्ध हैं।
  2. कक्षाएं न लेने का आरोप निराधार:
    वार्षिक समय सारिणी में उनके नाम से संस्कृत विषय की कक्षाएं दर्ज हैं और वे नियमित रूप से पढ़ाते हैं।
  3. सुविधाओं में लापरवाही का आरोप गलत:
    विद्यालय में स्वच्छ पेयजल और शौचालय की व्यवस्था है। एनएसएस व स्काउट-गाइड गतिविधियां व्यायाम शिक्षक और प्रभारी नियमित रूप से कराते हैं।
  4. सीपेज और फर्नीचर खराब होने का मामला:
    प्राचार्य का कहना है कि आंशिक सीपेज हर भवन में बारिश के दौरान होता है। उन्होंने समय रहते इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर दी थी।
  5. बैठकों में अनुपस्थिति:
    उनका कहना है कि यदि वे किसी अनिवार्य शासकीय कार्य या निजी कारण से अनुपस्थित रहते हैं, तो विद्यालय से प्रतिनिधि बैठक में अवश्य शामिल होता है।
  6. दुर्व्यवहार के आरोपों को खारिज:
    प्राचार्य का कहना है कि किसी शिक्षक या छात्र से कभी भी दुर्व्यवहार नहीं किया गया। यदि आरोप हैं तो दस्तावेज या गवाह प्रस्तुत किए जाएं।
  7. आर्थिक अनियमितताओं का आरोप निराधार:
    विद्यालय को मिले बजट का पूरा उपयोग नियमों के अनुसार किया गया है। कैशबुक, स्टॉक रजिस्टर और बिल-वाउचर की प्रतियां प्रमाण के रूप में उपलब्ध कराई गई हैं।

परिणामों के जरिए जवाब

प्राचार्य मधुकर ने अपने जवाब में विद्यालय के परिणामों का भी उल्लेख किया।

  • कक्षा 12वीं और 11वीं का परिणाम 100%
  • कक्षा 10वीं का परिणाम 98%
  • कक्षा 9वीं का परिणाम 95%

उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय की व्यवस्थाएं ठीक न होतीं, तो ऐसे उत्कृष्ट परिणाम संभव नहीं होते।

प्राचार्य जी.पी. मधुकर का कहना है कि विद्यालय में कार्यरत बाबू को वापस बुलाने की मेरी मांग को लेकर तहसील कार्यालय से टकराव हुआ। इसी के बाद मुझे टारगेट बनाकर नोटिस जारी किया गया और जल्दबाजी में निलंबित कर दिया गया। यह कार्यवाही पूर्णतः द्वेषपूर्ण और पक्षपातपूर्ण है।

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