बगिया आश्रम में छात्र की सर्पदंश से मौत पर जशपुर कलेक्टर ने की कार्रवाई तेज़, 5 अधिकारियों-कर्मचारियों पर गिरी गाज!

बगिया आश्रम में छात्र की सर्पदंश से मौत पर जशपुर कलेक्टर ने की कार्रवाई तेज़, 5 अधिकारियों-कर्मचारियों पर गिरी गाज!

जशपुर, 10 जुलाई 2025जशपुर ज़िले के विकासखंड कांसाबेल स्थित शासकीय अनुसूचित जनजाति बालक आश्रम, बगिया में 08 जुलाई को कक्षा तीसरी के छात्र अमृत साय की सांप के काटने से हुई दर्दनाक मौत ने प्रशासनिक महकमे को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद प्रशासन ने गंभीर लापरवाही मानते हुए 5 अधिकारियों और कर्मचारियों पर त्वरित कार्रवाई की है।

क्या हुआ था 08 जुलाई को?

बालक अमृत साय, ग्राम झारमुंडा, विकासखंड फरसाबहार निवासी था और बगिया आश्रम में रहकर पढ़ाई कर रहा था। 08 जुलाई को आश्रम में सर्पदंश की सूचना मिलने पर छात्र को फौरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, फरसाबहार लाया गया, लेकिन चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उसकी मौत हो गई

कलेक्टर के आदेश पर की गई कार्रवाई:

घटना की सूचना मिलते ही अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बगीचा द्वारा की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की। विवरण इस प्रकार है:

  1. पीड़ित परिवार को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता राशि 11 जुलाई 2025 को आर.बी.सी. 6-4 के अंतर्गत दी जाएगी।
  2. प्रभारी अधीक्षक ठाकुर दयाल सिंह (एल.बी.) को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
  3. नियमित भृत्य रामकुंवर सिरदार को भी निलंबित किया गया है।
  4. पूर्णकालीन स्वीपर सीता राम चौहान को अन्यत्र हटाया गया है।
  5. नैतिक भृत्य तेज कुमार टोप्पो को भी हटाया गया है।
  6. प्रभारी मंडल संयोजक फकीर राम यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

क्यों मानी गई लापरवाही?

जांच में जो तथ्य सामने आए, वे आश्रम प्रबंधन की घोर लापरवाही और निरीक्षण की अनुपस्थिति को साफ उजागर करते हैं। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि आश्रम परिसर में खिड़कियाँ टूटी हुई थीं, जिससे विषैले जीव-जंतुओं के प्रवेश की आशंका बनी रहती है। वहीं, परिसर के चारों ओर लंबी घास और झाड़ियाँ उगी हुई थीं, जिनकी नियमित कटाई-छंटाई नहीं की गई थी। छात्र कक्षों में पिछले 3-4 दिनों से सफाई नहीं हुई थी, जिससे साफ-सफाई की स्थिति बेहद चिंताजनक थी। सबसे गंभीर बात यह रही कि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति के बाद भी छात्र को समय पर समुचित उपचार नहीं मिल सका, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। ये सभी लापरवाहियाँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि आश्रम में न केवल प्रशासनिक शिथिलता रही, बल्कि नियमित निरीक्षण का भी घोर अभाव रहा।

Breaking Jashpur