छत्तीसगढ़ हॉकी लीग से बदलेगी प्रदेश की हॉकी की तस्वीर! आदिवासी अंचलों की छिपी प्रतिभाओं को मिलेगा राष्ट्रीय पहचान का मंच, ओलंपियनों के अनुभव से तैयार होंगे भविष्य के सितारे

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग से बदलेगी प्रदेश की हॉकी की तस्वीर! आदिवासी अंचलों की छिपी प्रतिभाओं को मिलेगा राष्ट्रीय पहचान का मंच, ओलंपियनों के अनुभव से तैयार होंगे भविष्य के सितारे

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग जमीनी स्तर पर हॉकीको मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

रायपुर : छत्तीसगढ़ ने भारत को लेसली क्लाउडियस जैसा उधम सिंह के साथ ओलंपिक में तीन स्वर्ण व एक रजत सहित चार पदक जीतने वाला बेहतरीन राइट हाफ, 1978 में ब्यूनर्स आयर्स (अर्जेंटीना) में हॉकी विश्व कप में पांचवें स्थान पर रही भारतीय टीम के बतौर सेंटर फॉरवर्ड विंसेंट लाकरा के साथ 2016 में रियो ओलंपिक में शिरकत करने वाली मिडफील्डर रेणुका यादव, 2002 के मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और 2006 में मेलबर्न में रजत पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की सेंटर फॉरवर्ड सबा अंजुम करीम जैसी बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी दी है। साथ ही नीता डुमरे, मृणाल चौबे, बलविंदर कौर, रेणुका राजपूत और बलविंदर कौर व तनवीर जमां और शेख जाफर जैसे बेहतरीन अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी भी छत्तीसगढ़ की धरती से ही आते हैं। छत्तीसगढ़ के भारत के लिए खेलने वाले हॉकी खिलाड़ियों की यह संख्या उसके आदिवासी अंचल के गांवों में मौजूद हॉकी प्रतिभाओं के बावजूद उसके पड़ोसी ओडिशा और झारखंड जैसे देश के अन्य आदिवासी बहुल राज्यों से आने वाले हॉकी खिलाड़ियों की तुलना में खासी कम है। बहुत कम लोग शायद इस बात से वाकिफ होंगे कि हॉकी पर शाहरुख खान की चर्चित हॉकी फिल्म ‘चक दे’ इंडिया भारतीय महिला हॉकी टीम की 2002 में मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में सुनहरी कामयाबी से प्रेरित है।

 चाहे वह क्रिकेट हो, हॉकी, कबड्डी, बैडमिंटन, खो खो, वॉलीबॉल और तीरंदाजी इन खेलों की पेशेवर लीग नेभारत का इन सभी खेलों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत टीमें तैयार करने में अहम रोल अदा किया है। खासतौर पर भारत के क्रिकेट के छोटे फॉर्मेट में अपना एक खास मुकाम बनाने में इसकी दुनिया की सबसे महंगी लीग आईपीएल का सबसे अहम योगदान है। इतिहास गवाह है कि भारत में किसी भी खेल में पहली पेशेवर फ्रेंचाइजी आधारित पुरुष प्रीमियर हॉकी लीग (पीएचएल) 2005 में शुरू होकर 2007 तक चली बंद हो गई। फिर 2013 में हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) शुरू हुई और 2017 तक चली और बंद हो गई। हॉकी इंडिया ने इसके बाद 2024-25 में एक साथ पुरुषों के साथ महिला हॉकी लीग भी शुरु की । वहीं पहली टी 20 इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2008 में पुरुषों के लिए क्या शुरू हुई की यह क्रिकेट में भारत का सबसे बड़ा ब्रैंड बन गई। ओडिशा सरकार ने हॉकी इंडिया के साथ शुरू में पुरुष व महिला सीनियर और जूनियर हॉकी टीमों को 2018 से 2023 तक पांच बरस के डेढ़ सौ करोड़ रुपये सालाना करीब 30 करोड़ रुपये का प्रायोजन करार किया था, जिसे 2023 में इसे दस बरस के लिए बढ़ा कर 434.12 करोड़ रुपये कर दिया। अब भाजपा शासित ओडिशा सरकार के मु्ख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे 2036 के लिए बढ़ा दिया।

 अपने पड़ोसी ओडिशा से प्रेरणा लेकर भारतीय हॉकी को फिर शिखर पर पहुंचाने के क्रम में छ्त्तीसगढ़ ने हॉकी इंडिया के तत्वावधान में पहली छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के रूप में रायपुर के सरदार वल्लभभाई अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में 21 अक्टूबर से 1 नवंबर तक पहली फ्रेंचाइजी आधारित आधिकारिक राज्य स्तरीय हॉकी लीग आयोजित की। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग है बेशक छत्तीसगढ़ हॉकी के भविष्य की नींव साबित होगी। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) छत्तीसगढ़ में हॉकी का एक मजबूत ढांचा विकसित करने का एक सार्थक प्रयास है। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग दरअसल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव विजन के तहत, राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ को हॉकी हब में बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल है। सीएचएल का मकसद छत्तीसगढ़ में जमीनी स्तर पर हॉकी का मजबूत ढांचा बनाने, हॉकी के उस्ताद तैयार करने के साथ राज्य के हॉकी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के तैयार कर इसे बतौर करियर अपनाने के लिए प्रेरित करना है। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के 21 अक्टूबर को उदघाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए ठीक ही कहा कि यह लीग जमीनी स्तर पर हॉकी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के एंबेसडर पूर्व हॉकी ओलंपियन सरदार सिंह भी इस लीग को राज्य के हॉकी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने और भारतीय हॉकी टीम में स्थान पाने की दावेदार का बढ़िया मंच मानते हैं।

 सीएचएल के एंबेसडर सरदार सिंह ने कहा,‘छ्त्तीसगढ़़ हॉकी लीग के जरिए छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के हॉकी खिलाड़ियों को हॉकी में अपना पहचान बनाने के लिए मंच मुहैया करा रही है। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग राज्य में जमीनी स्तर पर हॉकी प्रतिभाओं को तलाशने व तराशने का बड़ा मंच साबित हो सकती है। फिलहाल भारतीय हॉकी की नगोया(जापान) एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला और पुरुष हॉकी टीमों में जिस तरह पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के ही ज्यादातर खिलाड़ी हैं। छत्तीसगढ़ में खासतौर पर इसके आदिवासी अंचल में हॉकी की अपार प्रतिभाएं मौजूद हैं और जरूरत बस उन्हें तलाश कर तराशने की है। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में जब राज्य के खिलाड़ी ललित उपाध्याय, गुरजंट सिंह, एसवी सुनील और शमशेर जैसे हॉकी ओलंपियन के साथ खेले तो उनका खुद का खेल निखरा ही उन्हें बड़े मंच पर खेलने का आत्मविश्वास भी मिला। राज्य स्तर सीएचएल जैसी बड़ी लीग में खेलने से मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले तीन चार बरस में देश छत्तीसगढ़ के हॉकी खिलाड़ी भारत की विभिन्न हॉकी टीमों में खेलते दिखाई देंगे। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के जियो पर सीधे प्रसारण से बेशक हॉकी इंडिया में राष्ट्रीय हॉकी चयनकर्ताओं को विभिन्न प्रतिभाशाली हॉकी खिलाड़ी मिल सकते हैं।‘

       सीएचएल में शिरकत करने वाली छत्तीसगढ़ के अलग अलग शहरों की छह फ्रेंचाइजी आधारित टीमें हैं: राजधानी रॉयल्स, न्यायधानी नाइट्स, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स, चक्रधर चैंपियंस, बैलाडीला बुल्स और मैनपाट टाइटंस। छत्तीसगढ़ हॉकी टीम में शिरकत करने वाली विभिन्न छह टीमों में हर टीम में राज्य के 18 खिलाड़ियों और राज्य के बाहर के चार अंतर्राष्ट्रीय अथवा राष्ट्रीय खिलाड़ियों सहित कुल 22 -22 खिलाड़ी हैं। सीएचएल में शुरू में सभी छह टीमें राउंड रॉबिन लीग में आपस में एक दूसरे के खिलाफ खेली और फिर शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी और 1 नवंबर को फाइनल खेला जाएगा।

       भारत को 2020 में टोक्यो और 2024 में पेरिस ओलंपिक में लगातार कांसा जिताने वाली टीम के हॉकी के कलाकार ललित उपाध्याय और गुरजंट सिंह के साथ 2020 ओलंपिक में कांसा जीतने वाली टीम के आक्रामक सेंटर हाफ शमशेर सिंह और फुलबैक सुरेन्दर कुमार तथा 2012 के लंदन ओलंपिक में खेलने वाले एसवी सुनील के साथ देवेंद्र वाल्मीकि और जसकरण सिंह जैसे अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बतौर मार्की हॉकी खिलाड़ी सीएचएल में अलग अलग टीमों के लिए खेले। ललित उपाध्याय, गुरजंट और शमशेर, सुरेन्दर कुमार व एसवी सुनील जैसे कई पूर्व हॉकी ओलंपियनों के साथ राज्य की अलग अलग टीमों के लिए शिरकत करने से छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को अपना हॉकी कौशल बेहतर करने का मौका मिला। सीएचएल में छ्त्तीसगढ़ के 108 और 24 मेहमान खिलाड़ियों ने शिरकत की। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की पुरुष टीमों के सभी 18 मैच और सेमीफाइनल और फाइनल रायपुर में होंगे । छत्तीसगढ़ में महिला हॉकी को बढ़ावा देने और उन्हें हॉकी बड़ी भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सीएचएल के आखिरी दिन महिलाओं का एक प्रदर्शनी मैच भी रखा गया।

 2014 में अपनी कप्तानी में भारत को एशियाई खेलों का स्वर्ण जिताने वाले पूर्व हॉकी ओलंपियन सरदार सिंह छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के एंबेसडर हैं।सीएचएल के साथ सरदार सिंह का जुड़ाव युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने और भारत की हॉकी विरासत को मजबूत करने में मदद करेगा। सीएचएल की पहचान छत्तीसगढ़ की संस्कृति है। सीएचएल का शुभंकर ‘बाघवा’ बाघ से प्रेरित है, जबकि इसका नारा है और ‘चलो रे संगी, हॉकी खेलबो‘ इस पहल के स्थानीय स्वरूप को दर्शाता है। साथ ही छत्तीसगढ़ के लोगों को हॉकी को बतौर खेल अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) में कुल पुरस्कार राशि 21 लाख रुपये है और इसमें खिताब जीतने वाली टीम को 11 लाख रुपये और उपविजेता टीम को छह लाख रुपये दिए जाएंगे। साथ ही इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को निजी तौर पर भी इनाम दिए जाएंगे। जियो हॉट स्टार पर लीग के सभी मैचों का प्रसारण होने से हॉकी प्रेमियों ने इसका लुत्फ उठाया। छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से इस लीग के जरिए राज्य के खिलाड़ियों को अनुभवी खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिला। यह लीग भारतीय हॉकी में छत्तीसगढ़ के योगदान को मजबूत करने और खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने का प्रयास करती है।

सत्येन्द्र पाल सिंह, वरिष्ठ खेल पत्रकार और लेखक

Chhattisgarh