खड़गे की टिप्पणी से गरमाई सियासत, कुनकुरी में भाजयुमो का जोरदार प्रदर्शन! प्रधानमंत्री मोदी पर बयान के विरोध में पुतला दहन और नारेबाजी, बीजेपी-कांग्रेस के बीच बढ़ी जुबानी जंग

खड़गे की टिप्पणी से गरमाई सियासत, कुनकुरी में भाजयुमो का जोरदार प्रदर्शन! प्रधानमंत्री मोदी पर बयान के विरोध में पुतला दहन और नारेबाजी, बीजेपी-कांग्रेस के बीच बढ़ी जुबानी जंग

खड़गे के बयान पर कुनकुरी में सियासी संग्राम, भाजयुमो ने फूंका पुतला; प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी को लेकर बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने

कुनकुरी : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बयान के विरोध में सोमवार को कुनकुरी बस स्टैंड पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर खड़गे का पुतला दहन किया और जमकर नारेबाजी की। इस घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव को फिर चर्चा में ला दिया है।

विवाद की शुरुआत रविवार को पटना में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां एक कार्यकर्ता ने मंच से कहा कि जब तक विद्रोह नहीं होगा, मोदी सरकार नहीं हटेगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कथित तौर पर कहा, “मोदी क्या, मोदी का बाप भी जाएगा।” इसी टिप्पणी को लेकर बीजेपी ने आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि इस तरह की भाषा प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है और इससे राजनीतिक संवाद की मर्यादा प्रभावित होती है।

इसी मुद्दे को लेकर कुनकुरी में भाजयुमो कार्यकर्ता पार्टी के झंडे लेकर बस स्टैंड पहुंचे। उन्होंने खड़गे के खिलाफ नारे लगाए और उनका पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के जरिए भाजयुमो ने कांग्रेस नेतृत्व के बयान पर अपनी नाराजगी जाहिर की।

प्रदर्शन में भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष नितेश पारीक, एल्डरमैन चाणक्य चौहान, जिला कार्यसमिति सदस्य अभिषेक अग्रवाल और तरुण डनसेना, मंडल अध्यक्ष रंजित सोनी, अल्पसंख्यक मोर्चा मंडल अध्यक्ष जुनैद सहित कृष्णा साहू, राजा आलम, हसीब अंसारी, देवेंद्र सिंह, अमन वर्मा, संतोष यादव, रवि चौहान, लवीश गुप्ता, नीतीश शर्मा, मोहित बंग, अनुराग चौहान और मसरत हुसैन समेत अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल रहे।

बयान से बढ़ी राजनीतिक तल्खी

खड़गे की टिप्पणी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज होने के संकेत हैं। बीजेपी इसे प्रधानमंत्री पद की गरिमा से जोड़कर विरोध जता रही है, जबकि पूरे विवाद का केंद्र राजनीतिक मंच से इस्तेमाल की गई भाषा और उसके राजनीतिक मायने बने हुए हैं।

कुनकुरी में हुआ पुतला दहन इसी राष्ट्रीय राजनीतिक विवाद की स्थानीय प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। अब यह मुद्दा केवल एक बयान तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक मर्यादा, नेताओं की भाषा और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच बढ़ती तल्खी की बहस का हिस्सा बन गया है।

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